हिंदू ‘कॉमरेड’ की पूजा से चिढ़, मोहम्मडन की नमाज़ से प्यार…

मेरे एक मित्र हैं. मित्र क्या, हमारे गुरुजी के शब्दों में कहिए तो ‘हमज़ाद’ हैं. खांटी वामपंथी हैं, 36 कैरेट वाले, प्योर डायमंड. अनकट (अंग्रेजीवाले), अनगढ़.

समय-समय पर वे अपनी चुल करने की आदत से मज़बूर होकर ‘सरकारी वामपंथियों’ को आईना दिखाते रहते हैं और बदले में कड़ी निंदा, कठोर निंदा, भर्त्सना, जाति-बहिष्कार आदि झेलते हैं.

इस वक्त उन्होंने महान मार्क्सवाद मर्मज्ञ, विचार-वैचित्र्यालंकृत, वरेण्य-वरिष्ठ, लब्धप्रतिष्ठ, लाल गिरोह के सर्वथा संपूज्य माननीय विप्र-शिरोमणि मैनेजर पांडेय की एक तस्वीर साझा कर दी है.

तस्वीर कुछ खास नहीं है, बस पांडेय सर उसमें पूजा कर रहे हैं. साझा की तो की, उस पर ‘सरकारी वामपंथियों’ से राय भी ले डाली. भाषण भी दे दिया, मने गुनाह-ए-अज़ीम कर दिया.

अब वही हो रहा है. संशोधनवादी, बुर्जुआ, पेटी-बुर्जुआ, क्रांति-विरोधी, मध्यवर्गीय चूहा आदि विशेषणों से शोभित होकर घर में लटके पड़े हैं.

मेरा मसला यहां वह फोटो नहीं, बल्कि उन परम मित्र की चालाकी और षडयंत्र है.

जेएनयू में हमने हरेक शुक्रवार (सॉरी, जुम्मे) को मोहम्मडन कॉमरेड्स को एक घंटे के लिए परिसर से गायब होते देखा है.

फिर, वे नमूदार होते थे- अपने पांयचों को नीचे करते हुए, फैज कैप को कुरता या शर्ट की जेब में खोंसते हुए.

कई राशिद, रिजवान, बकर, इरफान आदि को हमने ऐसे ही देखा है, हमराहों. (अब, महिला कॉमरेड का नाम नारीवाद के तहत मत मांगिएगा, वह संयोग ज़रा मुश्किल है).

हमने कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत को भी देखा है, जो आखिरी सांस तक सिख रहे.

तो, मित्रवर! आपको किसी मोहम्मडन या सिख कॉमरेड के धर्म-पालन में दिक्कत नहीं है, लेकिन माननीय गुरुवर अगर जड़ों की ओर लौट रहे हैं, तो आपको खासी परेशानी है.

अगर, नामवर बाबा गीता-पाठ सुनने की इच्छा जताते हैं, तो आपको दिक्कत है, कोई उदित हो चुका कॉमरेड अपने कमरे में छुपकर हनुमान चालीसा पढ़े तो आपको बाइ उखड़ जाती है. ऐसा क्यों?

मेरे मित्र, मेरे ‘हमज़ाद’ हालांकि, अपने तरफदारों की वजह से यह लेख साझा नहीं करेंगे, क्योंकि उनमें जाति-बहिष्कृत हो जाने के बावजूद अब भी डर बना हुआ है.

मुझे, उनको और सनातन धर्म पर पूरा भरोसा है, लेकिन. उसकी यात्रा शुरू हो गयी है. सनातन से अलग भला कौन रह सका है…

….ईशावास्यमिदंसर्व यत्किंचजगत्यांजगत्….

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