अब तो समझ जाएं कि भारत में उनके लिये किस हद तक घर कर गयी है नफ़रत

एनडीटीवी से जुड़ा कोई भी समाचार हो, उसकी यह खासियत होती है कि वह लोगों को दूसरी खबरों का मज़ा नहीं लेने देता है.

अब देखिये न, जिन खबरों से 2020 के दशक के भूगोल और राजनीति बदलनी है उन खबरों पर या तो लगाम लग गयी है या फिर वहां ध्यान ही नहीं जा रहा है.

परसो लंदन में अल्लाह को खुश करने के लिये कुछ लोग गाड़ी से कुचलते और चाकुओं से गोदाते है, वही एक बार फिर भारत में तमाम विरोध के बाद भी भारत क्रिकेट खेलते हुये, पाकिस्तान को फिर हराते है.

आज कश्मीर की सीमा पर जहां 4 आतंकियों को गोली से उड़ाये जाते हैं, वहां बाड़मेर सीमा पर 5 पाकिस्तानी घुसपैठिये पकड़े जाते है.

मिडिल ईस्ट में अरब राष्ट्रों में बड़े उलटफेर के शुभ संकेत, क़तर से सऊदी अरेबिया, मिस्र, बहरीन और यमन द्वारा राजनैतिक सम्बंध खत्म करने से मिल रहे हैं…

लेकिन खबर जो तूफान लायी है वह यह कि एनडीटीवी के प्रमुख मालिक प्रणय रॉय और उनकी धर्मपत्नी राधिका रॉय के यहां सीबीआई का छापा पड़ा है और उनके खिलाफ एफआईआर भी हो गयी है.

सुबह से आ रही यह खबर जिस तरह से लोगों को दिवाली और होली मनाने का सुख दे रही है उससे एनडीटीवी और उसके समर्थकों को यह समझ लेना चाहिये कि भारत में उनके लिये किस हद तक नफरत घर कर गयी है.

मैं यहां झूठ नहीं बोलूंगा, आज तमाम खबरों पर नज़र रखते हुये भी मैं बेहद खुश हूं. मुझे भी इस खबर के आगमन की आस थी, हालांकि मैं 2017 के अंत में इस खबर की अपेक्षा कर रहा था.

अब कुछ लोग सीधे-सीधे संबित पात्रा और निधि राजदान के बीच हुये सार्वजनिक नोक झोंक को इसका कारण मान रहे है जो कि पूरी तरह बकवास है.

प्रणय रॉय के यहां छापा संबित पात्रा की बेइज्जती के कारण नहीं हुआ हूं क्योंकि राजनीति में बेइज्जती, शह और मात के बीच की चालें होती है और गम्भीर राजनैतिज्ञ उसे प्रतिशोध का कारण नहीं बनाते है.

यह तो होना बहुत पहले से ही तय था, बस उसकी टाइमिंग क्या होगी यह तय होना था, जो अब शासकों ने तय कर लिया है.

मैं पिछले ढाई वर्षो से बराबर कह रहा हूँ कि भारत के अपरिवर्तनीय बदलाव के लिये होने वाली घटनाएं 2017 से पहले नहीं होंगी.

मोदी जी के प्रधानमंत्रित्व वाली सरकार, अपने समर्थकों की तमाम आलोचनाओं और उनके उग्र कोप के बाद भी अपनी समयसारणी में कोई परिवर्तन नहीं करने वाली है.

मैं यहां अरुण जेटली, राजनाथ सिंह और मोदी जी को तमाम कटाक्ष की उक्तियों से अलंकृत करने वालो से यही कहूंगा कि अभी यह सिर्फ संकेतो का आदान प्रदान है, दूरगामी परिणामों के लिये की गयी गणेश वंदना भर है. इसके राजनैतिक चरित्र का असली पटाक्षेप 2018-19 में होगा.

हमेशा की तरह एक बार फिर मैं यही कहूंगा कि कृष्ण निर्मोही है लेकिन अब क्योंकि यह कलयुग है तो इसमें जहां राजनीति भी होगी, वहीं आदर्शों और शुचिता की यदा-कदा हत्या भी होती रहेगी. हमें मीठे के साथ खट्टा और कडुआ खाना ही होगा, इसको सीख लेना चाहिये क्योंकि इसमें कोई आरक्षण नहीं है.

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