हिंदी बोलते हैं तो कमतर मानते हैं, लेकिन अंग्रेजी में सड़ा टमाटर भी नजर आता है अंगूर

बिहार की शिक्षा दीक्षा फिर चर्चा में है. पहले तो बिहार सरकार को बधाई कि प्राचीन काल से शिक्षा के लिये दुनिया में चर्चित बिहार को आज तक भी आपने अपनी शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में बने रहना मेंटेन किया है.

ये अलग बात है तब हम अपने अच्छे व्यवस्था के लिए चर्चा में रहते थे, आज गड़बड़ी को लेकर हैं, लेकिन मेंटनेंस का क्रेडिट तो बनता ही है. 29 राज्य हैं, कितने राज्य भला रहते हैं हर साल नियम से शिक्षा को लेकर इतनी चर्चा में. सो इस कारण एक ठो थैंक्स त बनता ही बनता है सरकार को.

हम सब को पूरा भरोसा था कि पिछले साल की फ़ज़ीहत से सबक ले इस बार हमारा बिहार साफ़ सुथरा रिजल्ट देगा.

बिहार ने रिजल्ट तो दिया बस सुथरा नहीं दिया, केवल साफ़ दिया. 65 % से ज्यादा बुतरू फेल हो गये, एकदम साफ़. केवल सुपर 30 % छात्र ही साफ़ होने से बच पाये 12वीं में.

और इन्ही सुपर बच्चों के बीच से निकला एक सुपर मैन”गणेशा the टॉपर”……

सुपर मैन इसलिए क्योंकि इनकी उम्र 24-25 के करीब है, अतः इन्हें आदमी माना जा सकता है.

जैसा कि, नया ट्रेंड चला है सारे एग्जाम के बाद आखिरी इम्तेहान के लिए मीडिया ने अपने विश्विद्यालय से माइक कैमरा ताम झाम दे अपने एक काबिल प्रोफ़ेसर को गणेश के आखिरी इम्तेहान के लिए भेजती है.

मीडिया के उस काबिल फ्रोडेफेसर साब के पास प्रश्न का एक पुर्जा होता है जिसे देख देख वो गणेश से इम्तिहान ए हिन्द लेना शुरू करता है. मीडिया के इस काबिल फ्रोडेफेसर साब को भी पुर्जा देख के ही प्रश्न पूछना पड़ रहा होता है क्योंकि इस देश में एक पत्रकार को किस खास विषय का जानकार माना जाय ये खोजना समझना कठिन है इसलिए हिंदी, इंग्लिश, मनोविज्ञान, संगीत के 40 सवाल पूछने के लिए एक पत्रकार का पुर्जा रखना और देखना लाज़मी ही है.

ध्यान दीजियेगा, एक काबिल और पास हो चुके पत्रकार को केवल सवाल पूछने के लिए जब पुर्जा रखना पड़े तो असल में ये एग्जाम मीडिया ने गणेश के साथ साथ जाने अनजाने में अपना भी एग्जाम दे दिया जनता के सामने जिसमें हम उस काबिल पत्रकार को फ़ेल ही मानते हैं क्योंकि कोई अगर वीडियो को देखे तो पाएंगे कि, सवाल पूछते पत्रकार के भी माथे उतना ही पसीना था जितना गणेश के माथे.

अच्छा गणेश ने सर मुड़ाये रखा था और देखने में गैंग्स ऑफ़ वासेपुर का सरदार खान लग रहा था. वो उत्तर भी सरदार खान के ही आत्मविश्वास के साथ दे रहा था, भले गलत दे रहा हो.

खैर, केवल बिहार मोह के कारण भावुक हो के गणेश के पक्ष में लिखने का कोई तर्क मेरे पास नहीं. निश्चय ही बिहार सरकार को अपने पाप का प्रायश्चित करना चाहिए कि आखिर वो कौन सी घुन लगी व्यवस्था है जो वास्तविक प्रतिभा को सड़ा देने और विनाश कर देने को प्रतिज्ञाबद्ध है. क्यों इनकी मक्कारी और बेवकूफ़ी की सजा सारे प्रतिभाशाली बिहारी छात्र भुगते जिन्हें आज चाय की चुस्की लेते लोग दिल्ली और मुम्बई में कोस रहे होंगे कि, बिहार साला नई सुधरने वाला भई”.

इस भ्रष्ट हो चुकी भयानक व्यवस्था का खामियाजा पूरा बिहार और बिहारी भुगत ही रहे हैं और पता नहीं कब ये सड़ी लिजलिजी प्रणाली नष्ट होगी और एक बेहतर शिक्षा तंत्र विकसित हो पायेगा, ये ईश्वर भी कम ही जानता होगा.

खैर, एक बात लेकिन इस मीडिया विश्वविद्यालय की भी जरूर हो लेनी चाहिए की ये मीडिया क्या केवल बिहार के टॉपर्स का ही कल्याण करेगी. क्या मछली बाजार बना रखा है क्या? जब मन हुआ झोला ले घुस आते हो. टॉपर तो टॉपर है भैया, जैसे मेरा टॉपर तुम्हे अचंभित करता है वैसे ही आर्ट्स में 99 % से भी ज्यादा नंबर ला के सीबीएसई का टॉपर हमें भी पगलवा देता है.

इस मीडिया को ये कूवत क्यों नहीं कि मानविकी के विषय में 100 फीसदी no लाने के असंभव कार्य को अंजाम देने वाले सपूतों का एग्जाम ले. अगर आपको हमारा गोबर गणेश महकता हैं न तो हमको भी ये दिल्ली मुम्बई वाला जीनियस गढ़ता है. हमको ये पॉलिस बकलोल लगता है. हम भी चाहते हैं कि इनका जाँच हो. भाई हमारा इतना चिंता करते हैं सब, हम भी क्यों न करें.

मेरा दावा है कि सीबीएसई छोड़िये, दुनिया के किसी बोर्ड के द्वारा बनाया मानविकी विषय के लिखित प्रश्न पत्र का लिखित उत्तर इतना वस्तुनिष्ठ हो ही नहीं सकता कि उसमें 99 या 100 % no आ सके.

खुद प्रश्न लिखने वाला और उसका मॉडल उत्तर तैयार करने वाला भी दावा नहीं कर सकता कि ये उत्तर 100% पूर्ण है या इतना ही 100% के लायक है. क्या 100 में 100 या 99 देने वाले टीचर बता सकते हैं क्या कि आपने ये बात नहीं लिखी होती तो no 98 % आता.

एकदम नौटंकी है और तमाशा है ये अंक का मायाजाल.

आये कोई मीडिया का काबिल दोस्त और कैमरा लगा कि पूछ दे हिंदी में 100 no लाने वाले सीबीएसई टॉपर से कि रेणु या प्रेमचंद या अमृता प्रीतम या महादेवी का जन्म किस तिथि को हुआ.

पूछ के चेक करो न पॉलिटी की टॉपर से मैक्स बेबर का राजनीती शास्त्र में योगदान और अर्थशास्त्र में केन्स का नियम . पूछो न on camra बक्सर की लड़ाई के परिणाम और दे के दिखा दो तो 100 में 100 no….

मामला साफ है, आप सलेक्टिव एग्जाम प्रोग्राम कोर्स चला रहे हैं. यूपी से लेकर बिहार झारखण्ड या मध्यप्रदेश का हिंदी बेल्ट आपके शक़ के दायरे में सदा रहता है पर अंग्रेजी में ya ya yo yo guyz guyz o ya o ya कर के no चूस लेने वाली व्यवस्था आपको एकदम परफ़ेक्ट लगती है.

हम आपकी ही भाषा हिंदी बोलते हैं तो आप हमें कमतर मान के चलते हैं.

हमारी योग्यता को कभी भी कहीं भी जांचघर में बिठा दीजियेगा आप? लेकिन अंग्रेजी में सड़ा टमाटर भी आपको अंगूर नजर आता है.

असल में हिंदी मीडिया को वो आत्मविश्वास ही नहीं कि वो स्कूल के टाइम से डिस्को जाती, ड्रिंकाभिषेक करती और बियरापेयन करती मॉड ड्यूड से कोई सवाल पूछ सके.

वो आपका प्रेंक बना के यू ट्यूब पे चढ़ा देंगे.

इसलिए आपके लिये, रूबी या गणेश ही कटने वाले मुर्गी मुर्गे हैं, जब मन हो हलाल करने आ जाईये.  जय हो.

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