बेइज्ज़त होने जाना है या NDTV का बहिष्कार करना है, चुनाव मोदी सरकार का

एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान, जो जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला की मित्र (?) के रूप में कुख्यात भी हैं, ने भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को अपने प्रोग्राम से क्या निकाल दिया कि सब लोग निधि राजदान पर ही टूट पड़े है.

लेकिन मैं इस मामले में पूरी तरह एनडीटीवी और निधि राजदान के साथ खड़ा हूँ और उनका समर्थन करता हूँ.

आखिर निधि की गलती ही क्या थी? उसने तो वही किया जो उस टीवी चैनल और उसकी नीति और एजेंडा है.

गलती तो संबित पात्रा की है. क्या संबित को नही मालूम था कि एनडीटीवी के लिये केरल के कन्नूर में गाय नहीं बैल काटा गया है? क्या संबित को नहीं मालूम था कि निधि राजदान की मानसिकता हिंदुत्व विरोध शक्तियों की हमबिस्तर है?

क्या उसके प्रोग्राम में जाने से पहले संबित पात्रा को नहीं मालूम था कि एनडीटीवी चैनल की पूरी विचारधारा हिन्दू विरोधी है?

क्या पात्रा को यह नहीं मालूम था कि एनडीटीवी का मालिक प्रणव रॉय घोषित रूप से वामपंथी विचारधारा से प्रभावित है और राष्ट्रविरोधी तत्वों को प्रचार का मंच प्रस्तुत करता है?

क्या संबित पात्रा को यह नहीं मालूम था कि एनडीटीवी के एंकरों और पत्रकारों की कोशिश यही होती है कि वह राष्ट्रवादी तत्वों के विरुद्ध अनर्गल प्रलाप करें और राष्ट्रवादी सरकार को बदनाम करने के लिये फ़र्ज़ी तथ्यों और समाचारों का सृजन करे?

यह सब जानते हुये, यदि संबित पात्रा एनडीटीवी पर निधि राजदान के परोसे गये दस्तरख़्वान में गये थे तो इससे बेहतर स्वागत की उन्हें उम्मीद नहीं होनी चाहिये और राष्ट्रवादियों को भी इससे आहत नहीं होना चाहिये.

मोदी जी की सरकार और भाजपा, एनडीटीवी से जूते खा कर भी तमाशा देखना चाहती है तो मुझे उनसे कोई सहानभूति नहीं है.

यह चुनाव उनको करना है कि वह वहां बेइज्जत होने जाना चाहते है या उसका बहिष्कार करना चाहते हैं.

मैंने तो बहुत पहले से ही एनडीटीवी और उनके प्रेशयाओं का बहिष्कार करने का चुनाव कर रक्खा है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY