लाल प्रेतबाधा!

डॉ पॉल केंगर (Dr Paul Kengor) नाम के एक अमेरिकन विद्वान हैं. 2012 में उनकी किताब आई थी The Communist जिसमें ओबामा के गुरु फ्रैंक मार्शल डेविस पर लिखा गया था.

डेविस बाकायदा कम्युनिस्ट थे और उनके कई साथी भी थे जिनमें से कुछ तो सोवियत रशिया में भी समय बिताकर आए थे.

डॉ केंगर ने एक इंटरव्यू में एक और बात बताई कि शीतयुद्ध के दिनों में डेमोक्रेट पार्टी के लोग कम्युनिस्ट विरोधी कमिटियों के पुरोधा होते थे और बड़ी ही ईमानदारी और देशभक्ति से अपना काम करते थे. इन कम्युनिस्टों का काम यही होता था कि मीडिया में डेमोक्रेट्स को बदनाम करें.

When Davis was called to Washington to testify in December 1956, it was by the Democrat-run Senate Judiciary Committee. These were the old Cold War anti-communist Democrats.

Back then, the Democratic Party was still the party of Harry Truman and John F. Kennedy and other great anti-communists like Pat McCarran and Thomas Dodd.

Frank Marshall Davis and his comrades tarred and feathered Democrats. It was Harry Truman and the Democrats who ran the White House at the start of the Cold War; in other words, they stood in the way of Stalin.

And so, guys like Frank Marshall Davis, who were literal Communist Party USA members–meaning they swore a loyalty oath to the Soviet Union, to a ‘Soviet America’, and to the ‘triumph of Soviet power in the United States’ –trashed the Democrats.

लेकिन इनके समझ में आ गया कि अमेरिकन जनता कम्युनिस्ट विचारधारा को स्वीकार नहीं करने वाली. याने ‘सोवियत अमेरिका’ जो डेविस जैसे लोगों की शपथ थी वो अमेरिकन जनता को कभी हजम नहीं हो सकती थी.

मजदूर हड़ताल तो करते लेकिन लाल झंडे तले या लाल सत्ता के लिए करने की सोच भी गवारा नहीं थी. अपनी हड़ताल अपने फायदे के लिए, अमेरिका को खोखला करके उसे सोवियत अमेरिका बनाना कदापि मंजूर न था.

इसलिए डेविस और गैंग ने लाल चोला चुपचाप उतार लिया और डेमोक्रेट्स में शामिल हो लिए. कोई बड़े इलेक्शन नहीं, Precinct Clubs जैसे छोटे इकाइयों को धीरे-धीरे काबिज करना शुरू किया.

ट्रूमन चले गए, केनेडी मारे गए और ये लोग अपना काम चुपचाप करते रहे. उनके बाद जॉन्सन आए, वो वियतनाम युद्ध में ही उलझे रहे, उनके बाद निक्सन और फोर्ड सत्ता में आये, डेमोक्रेट्स न आ पाये. इनको अपना दीमक दिमागी काम करते रहने की आजादी मिल गई.

उनके बाद कार्टर आए, वे डेमोक्रेट थे और अपने डेमोक्रेट पूर्ववर्तियों से अधिक वेल्फेयर विचारधारा के थे. फिर रिपब्लिकन रेगन आए, उनके बाद जॉर्ज बुश सीनियर.

बारह साल इन वामियों को, डेमोक्रेट्स को खोखला करके अधिकाधिक वामी झुकाव की बनाने में सफलता मिली.

उनके बाद आए बिल क्लिंटन, उन्होंने आठ साल डेमोक्रेट्स की सत्ता चलायी. उनके बाद रिपब्लिकन बुश जूनियर आए वे आठ साल रहे, अफगान और इराक में लड़ते रहे.

फिर आए डेमोक्रेट ओबामा जिनके वामी बदलावों का इतना असर पड़ा कि त्राहि-त्राहि कर के अमेरिकनो ने ट्रम्प को चुना.

अमेरिका में अलग-अलग जगहों पर बाहर से आए मुसलमानों की दबंगई आदि बातें पहली बार अमेरिकनों को अनुभव हुई.

जिस तरह से इमिग्रंट्स की संख्या बढ़ाकर, उन्हें सोशल सेक्यूरिटी में शामिल कर के अर्थतन्त्र पर बोझ डाला गया था, अमेरिकन प्रजा ने डेमोक्रेट्स से तौबा कर ली.

और अब ट्रम्प के नाम से अमेरिकन मीडिया में उधम मचाने वाले देखे जाएं तो वामी ही निकलेंगे, हालांकि उनकी रशिया से कोई निष्ठा नहीं लेकिन उनके Cloward Piven थ्योरी के तहत सत्ता को चरमरा कर ही वे सत्ता में आना चाहते हैं. ये घिनौनी थ्योरी उनके लिए प्रतिष्ठित है.

मूल रूप से अमेरिका की इस बात को आप के सामने इसलिए रख रहा हूँ कि वामपंथी किस कदर के इच्छाधारी विषधर हैं. अगली लेख में इनके भारतीय रूप की चर्चा करेंगे. यहाँ वे ऐसे प्रेत हैं जो एक देह की उपयुक्तता समाप्त होने पर दूसरी देह ढूंढते हैं.

क्रमश: …

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