बिहार-यूपी में डिग्री चाहिए, तो बस कॉपी अंग्रेजी में लिखिए

सुनने में आया है कि बिहार टॉपर गणेश 42 साल का है पर उसने 24 साल उम्र दिखा के नई डिग्रियां लेनी शुरू की हैं.

सरकारी नौकरी के मोह जाल में फंसे लोगों का ये पुराना फंडा है. हरियाणा में तो ये आम बात है.

अक्सर वो लोग, जो सरकारी नौकरी की आस में, डाल पे लटके-लटके पकने लगते हैं, टपकने से पहले, उम्र घटा के एक नयी दसवीं, बारहवीं, BA कर लेते हैं.

मैं ऐसे एक आदमी को जानता भी हूँ जो इस कोशिश में सफल हुआ और आज अपनी असली उम्र से 15 साल छोटा हो के सरकारी नौकरी कर रहा है.

गणेश जी इस उपक्रम में पकड़े गए… अफसोस. पर जहां तक उनका बिहार बोर्ड का टॉपर हो जाना है, इसमें उनका कोई दोष नही.

ये मेरा निजी अनुभव है कि यूपी और बिहार में न सिर्फ हाई स्कूल, इंटरमीडिएट बल्कि BA और MA में भी आप अंग्रेज़ी में कुछ भी लिख दीजिये कॉपी पे… कुछ भी… कुछ भी माने कुछ भी…

अगर आपने कॉपी काली कर दी तो आप 55% नम्बर ले के पास हो जाएंगे. बस आपको अपना माध्यम अंग्रेजी रखना होगा.

मैंने कई शिक्षाविदों से इसका कारण पूछा. मुझे बताया गया कि 99% लेक्चरार लोग खुद ‘लिख लोढ़ा, पढ़ पत्थर‘ हैं.

ऊ खुद्दे अंग्रेजी इक्को अच्छर नहीं जानते तो कॉपी क्या जांचेंगे? ऊपर से बोर्ड और यूनिवर्सिटियां किलो के भाव से कॉपी जंचवाती हैं.

मने प्रति कॉपी जांचने का पैसा मिलता है. एक-एक परीक्षक एक दिन में 150 कॉपी तक जांच देता है. अब सोच लीजिये क्या जांचता पढ़ता होगा कॉपी में?

इसलिए कॉपी जांचने के कुछ अघोषित नियम हैं. मसलन अगर हैण्डराइटिंग अच्छी है तो 60% दे दो. पूरी कॉपी भर दिया तो 55% दे दो.

अगर लइका अंग्रेजी में लिखले हौ त भेरी इंटेलीजेंट त होबे करी… ओकरा के फ्रस्ट डिभीजन में पास कय दा…

इसके अलावा पास होने का एक और तरीका है… Copy में 100 रूपए का नोट रख दो. और एक मार्मिक सी चिट्ठी… गुरु जी बियाह होखे वाला हौ… पास कय देईं…

मैंने एक मास्टर जी से पूछा, जब कॉपी में नोट मिलते हैं तो आप लोग क्या करते हैं? जवाब मिला – 99% मास्टर पैसा रख लेते हैं और पास कर देते हैं…

अगर आपको BA या MA करना है तो ऊपी-बिहार की किसी भी इनभरसीटी से कर सकते हैं… बस इतना ध्यान रखिये, कॉपी अंग्रेजी में लिखिए.

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