पुरुलिया हथियार काण्ड : NGO ने पांच साल तक किम डेवी को बंगाल में क्यों रखा!

Kim Davy (left) and Peter Bleach (right)

मुख्य अभियुक्त किम डेवी कौन था? लोग सिर्फ हथियार गिराने वाला जानते हैं. लेकिन उसका एक अनोखा पर अनजाना सा पहलू भी है.

डेवी मुख्य रूप से हॉन्ग कॉन्ग के सोने और नशे का तस्करी करने वाले गैंग का पार्टनर था. वो 19 वर्ष की उम्र से ही ये गैंग चला रहा था… फिर अचानक उसका दिल बदल गया (पचा सकते हैं तो पचा लीजिये) और वो सुधर गया.

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उसके मन में गरीबों-पिछड़ों के लिए काम करने की सदइच्छा जाग उठी. उसने एटलस उठाया और संयोग से भारत के सबसे गरीब इलाके पश्चिमी बंगाल पर नज़र पड़ी…

उसने तस्करी छोड़ दी और एक NGO को ज्वाइन कर लिया… कहते हैं कि इस NGO ने ही उसको सुधारा था (पचा नहीं तो हाजमोला लीजिये)… और ये NGO उसको भूखे-नंगों की सेवा कराने भारत ले आयी.

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इस NGO ने उसको पश्चिमी बंगाल के पुरुलिया में काम पर लगाया – जहाँ उसने बहुत अच्छा काम किया जिससे खुश होकर NGO ने उसको पूरे बंगाल में काम दे दिया…

तो जनाब सुनिए वो प्यारी NGO है… GREENPEACE… बढ़िया स्टोरी पकाई गई थी एक तस्कर को भारत में रेकी कराने के लिए…

बाद में NGO आराम से कह सकती थी कि हमने तो सुधार दिया था बन्दा… हमको उसके बैकग्राउंड से क्या… पाँच साल भारत में रहकर उसने काम किया.

एक अंतर्राष्ट्रीय तस्कर भारत में रह रहा है ये अपने ख़ुफ़िया विभाग को पता ही नहीं चला… वो इतना ताकतवर हो गया कि जहाज लेकर आराम से देश में आ जाता था और उसके लिए राडार बंद कर दिए जाते थे…

हमारी सरकार और अन्य विभाग का इस सब में कोई हाथ नहीं, वो मासूम हैं – निर्दोष, निष्पाप और निष्कलंक… गोमुख से भरे गंगा जल जैसे … और ये जनता कितनी बड़ी मूर्ख है ये भी सबको मालूम है…

खैर आगे बढ़ते हैं – हथियार गिराने के बाद वो कलकत्ता आये, तेल भराया व सकुशल भारत से निकल गए उसी जहाज़ से थाईलैण्ड. वहाँ दो दिन शराबखोरी की, मसाज वगैरह कराया और लौटने लगे उसी जहाज़ से.

आराम से चेन्नई आये, जहाज़ refuel कराया. उसके बाद मुम्बई की तरफ चल पड़े और बस उधर ही गलती कर दी. उन्होंने हवा में रास्ता बदल दिया जो भारतीय वायु सेना के राडार पर आ गया और वायुसेना ने जबरदस्ती मुंबई में उतार दिया.

चूँकि असल काम हो चुका था और इस बार राडार बंद नहीं कराया गया था, जैसा कि हथियार लाते समय कराची से उड़ने के बाद राडार बंद करा दिए गए थे तो गलती से धरा गए.

अब आगे कुछ और हाजमे की दवाई की जरूरत पड़ सकती है आप को… वो जहाज़ वायुसेना ने उतारा और तुरंत उससे किम डेवी भाग गया. वो बोलता है कि दीवार फांद के भाग गया…

वो वहां से पूना गया, दिल्ली फिर दरभंगा – नेपाल होते हुए डेनमार्क आ गया. मतलब वायुसेना के चंगुल से, AAI (एअरपोर्ट अथॉरिटी) के लोगों के बीच से हवाई अड्डे की दीवार कूद के भाग गया… अगर पच रहा है तो ठीक, वरना समझ लीजिये कि भगा दिया गया…

डेवी का कहना है कि उसने आनंदमार्गी लोगों को वामपन्थियों से लड़ने के लिए हथियार गिराए थे और केंद्र सरकार ये करना चाह रही थी. सांसद पप्पू यादव के पिताजी बड़े आनंदमार्गी हैं.

डेवी कहता है कि उसको भागने में पप्पू यादव ने ही मदद की. उधर दूसरे आरोपी Peter Bleach का कहना है कि मुंबई में लैंड होने के चंद मिनट में ही बड़े CBI अधिकारी वहां पहुँच गए और फिर कलकत्ता भी जा कर केस संभाला जबकि केस किसी और अधिकारी को देखना था क्योंकि वो इंचार्ज थे. लेकिन इसको सुपरसीड करके बड़े अधिकारी ने केस संभाला.

ये बड़े अधिकारी उस समय NSG के भी निदेशक थे. जबकि इन बड़े अधिकारी का कहना है कि न वो मुंबई गए और न वो कलकत्ता गए. अन्य क्रू मेंबर भी कहते हैं कि वो उधर आये थे… चलो पचा लेते हैं… चूँकि वो सब चोर थे तो झूठ बोल रहे हैं और बड़े अधिकारी साहब कोतवाल थे तो सच बोल रहे हैं.

हथियार किस देश से आये? सोचिये… इस घटना में जो हथियार गिराए गए वो दूसरे कांड के एवज में एक सौदा था?…

AK 47 जो भी भारत आधिकारिक तौर पर लेता था उस समय वो चेक गणराज्य (Czech Republic) में बनी होती थी. जो हथियार पुरुलिया में गिराए गए वो Czech Republic में बनी AK 47 से ज्यादा सटीक थी और इसके कुंडे ज्यादा मजबूत थे और वजन ज्यादा था.

पुरुलिया में गिराई गई रायफल में से कुछ बंगाल पुलिस के कमाण्डो को दी गईं थीं और इसका उपयोग वो जंगलमहल में माओवादियों के खिलाफ इस्तेमाल करती थी.

एक इंटरव्यू में पुलिस के एक अफसर ने कह दिया कि ये हथियार ओरिजिनल रूसी हैं. इसी अफसर ने माओवादी नेता मलाउजुला कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी को ठिकाने लगाया था… वही हथियार उसके पास भी मिले थे… मतलब ठीक वैसे ही…

इस मामले में जितना रिसर्च करो उतना ही दिमाग चकरघिन्नी बन जाता है… डॉक्यूमेंट डाउनलोड करना, पढ़ना… उफ़… जाने देते हैं… इसपर दुनिया चुप है… अब हम भी चुप हो जाते हैं… यही ठीक रहेगा…

वैसे इस पर Chandan Nandy की किताब है ‘The night it rained guns’… पढ़ने का मन हो पढ़ लीजिये… कुछ ख़ास नहीं पता चलेगा… दिमाग का कीमा बन जाएगा कई प्रश्न और उठ खड़े होंगे…

इस पर जर्मन फिल्म मेकर Andreas Koefoed ने एक फिल्म बनाई ‘The Arms Drop’. ये भारत में रिलीज़ नही हुई… ये भारत में बैन है… इसमें भी मेरे ख़याल से कुछ नहीं मिलेगा, खामख्वाह भारत सरकार ने बैन किया है कहीं से डाउनलोड करने पर भी…

किम डेवी छँटा हुआ बदमाश है… भारत आने पर भी कुछ नहीं पता चलने वाला… लेकिन उसको मालूम सब है… वो राज़ अपने सीने में लेके मरेगा… और अनंत काल तक जनमानस सस्पेंस लेकर मरेगा…

जय हो… मेरा भारत महान… सचमुच कांग्रेस और वामपंथी महान पार्टी है… आप ये भी सोचिये उन आर्म्स ड्रॉप के बारे में जो पकड़े नहीं जा सके हैं… सोचते रहिये या काम पर चलिए…

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