प्रधान और परिधान

पिछले दिनों मोदीजी से मुलाक़ात के दौरान प्रियंका चोपड़ा द्वारा पहने गए कपड़ों पर सोशल मीडिया पर खूब बहस हुई. कुछ पक्ष में कुछ विपक्ष में.

हमारे समाज में यूं तो नारी स्वतंत्रता के नाम पर बहुत कुछ हो रहा है, इसलिए व्यक्तिगत रूप से क्या पहनना क्या नहीं इसका फैसला करने के लिए आप स्वतन्त्र हैं. लेकिन जब हम केवल एक व्यक्ति न होकर किसी पद विशेष पर होते हैं, तो हमारे कपड़ों से भी हमारे व्यक्तित्व को नापा जाता है.

राष्ट्रीय पुरस्कार लेने के लिए जब कंगना रानाउत ने कट शोल्डर का गाउन पहना था और अमिताभ उनके कंधे पर हाथ रखकर चल रहे थे, तब मुझे एक विचार आया था कि अमिताभ की ओर से कंगना के लिए भाव एक पुत्री के लिए उनके चेहरे से ही नज़र आ रहा था. इसलिए उसका परिधान उस समय तक उतना बुरा नहीं लग रहा था.

लेकिन देश के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति से पुरस्कार लेने के पश्चात यदि आप केवल अपने कपड़ों के कारण उनके सामने झुक न सके तो ऐसे कपड़े आपके किस काम के. इस ड्रेस ने आपकी देह की सुन्दरता पर तो चार चाँद लगा दिए लेकिन व्यक्तित्व निर्माण में आप चार कदम पीछे रह गयी.

कोई परिधान बुरा नहीं, होता, इसलिए प्रियंका मोदीजी से मुलाक़ात के समय क्या पहन कर आई इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन फिर उस मुलाक़ात में आपके द्वारा की गयी चर्चा से अधिक आपके द्वारा पहने कपड़ों की चर्चा हो तो समझ लीजिये आपको तुरंत पब्लिसिटी तो मिल जाएगी, लेकिन फिर आप भविष्य में कभी वो प्रसिद्धी नहीं पा सकेंगी जो आप कपड़ों के बजाय अपने विचारों से पा सकती थीं.

चरित्र का अर्थ हमारे यहाँ किन्ही और सन्दर्भों में लिया जाता है, लेकिन चरित्र निर्माण एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे आप चाहे तो एक बार में किसी विशेष अवसर पर दृढ़ साबित कर उसे आगे और मजबूत कर सकते हैं, या इन विशेष मौकों के निकल जाने पर फिर अफ़सोस करते रह जाते हैं..

एक ऐसा ही दृश्य मुझे इस वीडियो में दिखाई दिया, जब रशियन पॉप गायिका Sati Kazanova मोदीजी के सामने वैदिक मन्त्रों का उच्चारण कर रही थीं.

हो सकता है उस समय गायिका उस तरह से ना गा रही हो जिस तरह से हमारे यहाँ गाया जाता है. लेकिन जिस आतंरिक भाव और बाहरी व्यक्तित्व के संगम से उसने प्रभाव उत्पन्न किया, उस मंत्रोच्चार का सीधा असर सुनने वाले के ह्रदय तक पहुंचा.

हो सकता है अपने अन्य पॉप गानों में वो अर्धनग्न होकर गाती हो, लेकिन स्थान विशेष और व्यक्ति विशेष के सामने जब आप प्रस्तुत होते हैं, तो आपके विचार, आपके हाव भाव और यकीनन आपका परिधान बहुत मायने रखता है.

जब यह रशियन गायिका मोदीजी के सामने उनके देश का परिधान पहन उनको सम्मान दे सकती हैं तो हमें अपने ही देश में अपने यहाँ के परिधान पहनने में कैसी शर्म.

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