सीधे प्रधानमंत्री को लिखिए, यूं कब तक सुशासन बाबू की पुलिस से पिटते रहेंगे

लिखिए और प्रधानमंत्री को भेजिए. लोग अपने गाँव का नाम बदलवाने के लिए प्रधानमंत्री को लिखते हैं, अपने इलाज के लिए लिखते हैं. अरे यहाँ तो लोगों ने अपने बच्चे का डायपर तक मंगाने के लिए रेल मंत्री को चिट्ठी डाली है.

आप कब तक मूर्खता करेंगे और सुशासन पुलिस की लाठी खायेंगे? एक मामूली सी, दो लाइन की चिट्ठी लिखनी आती है? नहीं आती तो नकल कर के तो लिख लेते होंगे ना?

लिखिए :-

आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय,

जैसा कि ज्ञात होगा, बिहार इंटरमीडिएट की परीक्षा में 65% छात्र अनुत्तीर्ण हो गए हैं. कृपया बताएं कि जिन विद्यालयों-कॉलेजों में 35% छात्र ही उत्तीर्ण हो पाते हों, क्या उसके शिक्षकों पर कार्यवाही नहीं होनी चाहिए?

आखिर हमारे राज्य बिहार में ऐसे शिक्षक, शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षा मंत्री कैसे हैं, जो सौ में से केवल पैंतीस छात्रों को ही दो साल में पास करने लायक बना पाते हैं? इतने छात्रों के फेल करने के लिए जवाबदेही आखिर कब तय की जायेगी? किसकी जिम्मेदारी थी ये?

आपका,

(अपना नाम और विद्यालय का पता)

इतना सा एक मामूली से पोस्टकार्ड पर आ जाएगा जिसे खरीदने का एक-दो रुपया और लिखने के लिए कलम आपकी जेब में है.

शरीर को कष्ट तो लाठी पड़ने पर भी हुआ ही होगा ना? उस से कम मेहनत में चिट्ठी लिखी जा सकती है.

स्कूल-कॉलेज में भी ये कई बार आपको कहा जा चुका है, लिखो बेटा लिखो. हम फिर दोहरा देते हैं, लिखो, प्रधानमंत्री को लिख दो.

वरना सुशासन बाबू के राज की पुलिस भी है, आपका अंग विशेष भी है. और दुःखहरण चाचा तो जो हैं, सो हैइये हैं…

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