क्या गज़वा-ए-हिन्द आएगा, हाँ, आएगा, आएगा, आएगा

जब रामपुर में चौदह लड़के दो लड़कियों का दुपट्टा खींचते हैं, उसको पकड़ते हैं, घेरते हैं, फब्तियाँ कसते हैं, और वीडियो बनाकर डालते हैं, लेकिन ये आपको ख़बरों से गायब मिलता है, इस पर चर्चा नहीं होती, तो आपको समझ लेना चाहिए कि मुद्दा क्या है.

रमज़ान के महीने में चौदह मुसलमान लड़कों द्वारा ये करना बताता है कि रमज़ान को ये लोग कितना सीरियसली लेते हैं.

ऊपर से आज़म खान का ये कहना कि इन्हें अपनी औरतों को घर में रखना चाहिए, ये बताता है कि रमज़ान को वो कितना सीरियसली लेते हैं जब कहा जाता है कि रोज़ा सिर्फ भूखा रहना नहीं है, बल्कि हर तरह की भावना को नियंत्रण में रखना है.

वीडियो बनाना ये भी बताता है कि इनको कानून का कितना ख़ौफ़ है. और आज़म खान का बयान ये कहता है कि ख़ौफ़ क्यों नहीं है. फिर आप कहेंगे कि मैं इस्लामोफोबिक हूँ.

ये सिर्फ एक आर्टिकल की हेडलाइन बनकर रह जाती है. इसपर आपको प्राइम टाइम नहीं मिलेगा. क्यों नहीं मिलेगा वो आप सोचते रहिए.

कारण बहुत ही मस्त दिया जाएगा, बिलकुल वैसा ही जो हर बार किसी मुसलमान के द्वारा कुछ भी करने पर दिया जाता है: ऐसी बातों को तूल देने से समाज में घृणा फैलती है.

ये बात और है कि गौरक्षकों वाली पिटाई की बात सप्ताह भर चलेगी, फॉलोअप होगा. किस भाजपा नेता के कारण घोड़े की टाँग टूट गई, वो नेशनल डिबेट बन जाएगा.

ये बात और है कि जब कोई हिन्दू ये काम करेगा तो आपको ये बताया जाएगा कि हिन्दुओं ने मुसलमान को घेर कर मार दिया, हिन्दू लड़कों ने मुस्लिम टेकी के साथ ये कर दिया… यहाँ भी वही हुआ है.

और इसमें बिल्कुल हिन्दू-मुसलमान ही है, वरना ये लोग अपने घरों के आगे वीडियो क्यों नहीं बना लेते? ये ताक़त का प्रदर्शन है कि ‘हाँ हम करेंगे, कर लो जो करना है, हमारे इलाके से मत गुज़रो.’

इस में आपको धर्म ढूँढना चाहिए. मुसलमानों से घृणा करने के लिए नहीं, क्योंकि सब वैसे ना तो हैं, ना होंगे, इसलिए कि ऐसा करके मीडिया और मुसलमानों के तथाकथित नेता क्या जताना चाहते हैं.

क्या गज़वा-ए-हिन्द आएगा
हाँ, गज़वा-ए-हिन्द आएगा

क्या गायों का काटा जाएगा
हाँ, तुम्हारे घरों के आगे काटा जाएगा

क्या गैरमज़हबी लड़कियाँ छेड़ी जाएँगी
हाँ, गैरमज़हबी लड़कियाँ छेड़ी जाएँगी

क्या इस पर बु्द्धिजीवी चुप्पी ओढ़ लेंगे
हाँ, इस पर बु्द्धिजीवी चुप्पी ओढ़ लेंगे

क्या मीडिया की दोगलई जारी रहेगी
हाँ, मीडिया की दोगलई जारी रहेगी

क्या गज़वा-ए-हिन्द आएगा
हाँ, आएगा, आएगा, आएगा

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