आर्यपुत्रों, तैयार हो जाओ भविष्य का इतिहास रचने के लिए

कुछ ऐतिहासिक तथ्य!

1857 की क्रांति कारतूस में गौ मांस के होने के कारण हुई थी जिसे हिन्दू सैनिकों को दाँतों से काटना पड़ता था.

1951 से लेकर 1971 के चुनाव तक कांग्रेस का चुनाव चिह्न दो बैल थे. इस दौरान कांग्रेस सत्ता के केंद्र में रही.

1971 से लेकर 1977 तक इंदिरा कांग्रेस का चुनाव चिह्न गाय बछड़ा था. कांग्रेस (आई) ने 1971 में जबरदस्त जीत दर्ज की और 1977 में भी इमर्जेन्सी के बावजूद उतनी करारी हार नहीं हुए थी.

ये तीन घटनाक्रम, अपने आप में बहुत कुछ कहते हैं. इनसे पता चलता है कि भारत का जनमानस खुद को किन प्रतीकों से सहजता से जोड़ लेता था.और उन दिनों के राजनेता इस बात को कितनी आसानी से समझते थे.

आज उसी गौवंश की उसी पार्टी के कुछ लोगों द्वारा सड़कों पर हत्या की गई. यहां इन नेताओं की मानसिकता को समझिये, जो अधिक ध्यान देने योग्य है अति महत्वपूर्ण है, कि इस घटना क्रम की बाकायदा रिकॉर्डिंग की गई.

ऐसी सोच भयावह है. इसके बाद सिर्फ यही कहा जा सकता है कि विनाशकाले विपरीत बुद्धि.

इस देवभूमि में गाय के सामने आने मात्र से अगर हमने कई युद्ध हारे हैं तो गौ माता की प्राण की रक्षा के लिए कई युद्ध जीते भी हैं.

यूं ही नहीं कहा गया है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है. आर्यपुत्रों, भविष्य का इतिहास लिखने के लिए तैयार हो जाओ.

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