केरल में गाय को काटना, हिंदुत्व की सोच को काटने की योजना का सार्वजनिक उद्घोष

आज गाय काटने पर इतना दुख और आक्रोश हो रहा है जितना पाकिस्तान पर भी नहीं हुआ है. 3/4 बार पोस्ट लिख कर हटा चुका हूँ क्योंकि मैं भाषा की मर्यादा को बनाये रखने में असमर्थ रहा हूँ.

केरल में कांग्रेस द्वारा गाय काटने और उसको खाने का सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ है. इस पर हिंदुओं के एक वर्ग ने इसका समर्थन किया है. वह चाहे कांग्रेसी के नाम पर हुआ है या वामपंथी के नाम पर हुआ है और चाहे यह धर्मनिर्पेक्षिता के नाम पर हुआ है लेकिन यह सत्य है कि हिंदुओं की इसमें पूरी सहभागिता है.

मुझे न मुसलमान से मतलब है और न ईसाई से क्योंकि उनको गाय से कोई मतलब नहीं है. इनको हिंदुओं की संवेदनाओं से कोई मतलब है क्योंकि यह भारत के मुस्लिम और ईसाई, हिन्दू से ही बने मुसलमान और ईसाई है. वह तो अपने धर्मपरिवर्तन की हीन भावना को हिंदुओं की संवेदनाओं का तिरस्कार कर के छुपाते हैं. वे तो अरबों व वेटिकन के सामने अपने को सच्चा मुसलमान ईसाई साबित करने के लिये, हिंदुओं की संवेदनाओं का तिरस्कार कर के, उसका प्रमाणपत्र देते हैं.

मुझे तो उन हिंदुओ से नफरत है जो इस सबके साथ है और समर्थन कर रहे हैं. मुझे तो शंकराचार्यों से प्रश्न है जो अपने राजशाही मठों में बैठे मौन है. मुझे उस वोट करने वाले हिन्दू से पूछना है कि जिन्होंने उन दलों के प्रतिनिधि को वोट दे कर जिताया है जो गाय काटे जाने और खाने का या तो समर्थन कर रहे हैं या चुप हैं. मेरा तो यह भी प्रश्न है कि क्या तुम हिन्दू हो भी?

आज गाय को काटने और खाये जाने का लाइव प्रसारण कर के जो नँगा नाच हुआ है वह न कांग्रेस ने किया है न वामपंथियों ने किया है, बल्कि यह आगे मुस्लिम और ईसाई बनने वाले हिंदुओं ने किया है. यह तैयारी है उन लोगों की जो आगे के दो दशकों के बाद का अपना भविष्य देख रहे हैं.

यह वह लोग हैं जो यह आंकलन कर रहे हैं कि अगले एक दशक तक वे सत्ता में तो आ नहीं सकते हैं लेकिन दो दशकों बाद, 2030 के आगे, गाय काटने और खाने वालों के वोटर, गाय से संवेदनशील हिंदुओं से ज्यादा हो जायेंगे.

उनके ही बढ़े हुये वोट उन्हें सत्ता में या तो पहुंचायेंगे या फिर उसमें उनकी प्रभावी भागीदारी करवायेंगे. यही वह वोटर होगा, जिससे या तो कट्टर इस्लामिक स्वप्न गज़वा ऐ हिन्द का रास्ता साफ होगा या फिर मार्क्स और मैकाले की विचारधाराओं के अनरूप, भारत को टुकड़े टुकड़े में तोड़ कर, पूरी भारतीयता और सनातनी हिंदुत्व के कथानक के ध्वस्त करने की अभिलाषा को चरितार्थ करेगा.

आज सार्वजनिक रूप से राजनैतिक सन्देश देने के लिए गाय जरूर काटी गयी है लेकिन सत्य यह है कि यह 2030 के बाद भारतीयता और हिंदुत्व की ही सोच को काटने की योजना का सार्वजनिक उद्घोष है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY