मालूम सब कुछ होता है लेकिन भूलने की बीमारी है हिन्दुओं को

लोग कसमें खा रहे हैं कि आजीवन कांग्रेस को वोट नहीं देंगे. यानी कि पहले देते थे या गाय न कटती तो पिछले 60 सालों के कुकृत्य भूल सकते थे.
आप विभाजन की विभीषिका भूल सकते थे. आप यू एन ओ की सीट का छोड़ना भूल सकते थे. 1948 में नेहरू ने राम मंदिर का ताला नहीं खुलने दिया आप भूल सकते थे.

हिन्दी राजभाषा नहीं बनने दिया आप भूल सकते थे. धर्म के नाम पर बंटे देश के संविधान को धर्म निरपेक्ष बनाना आप भूल सकते थे. कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय न होने देना आप भूल सकते थे.

चीन के हाथों 64000 sq. Km जमीन खोना भूल सकते थे. सरकार बनाने के लिए जानवरों की तरह विधायक और सांसद खरीदना भूल सकते थे. बच्चों के पाठ्यक्रम का वामपंथियों द्वारा विद्रूप करना आप भूल सकते थे. 1948 के जीप घोटाले से लेकर नेशनल हेराल्ड घोटाला आप भूल सकते थे. कश्मीर से हिन्दुओं का पलायन आप भूल सकते थे.

जिस गाय के कटने पर इतनी चीत्कार कर रहे हैं, वो कल भी न कटती अगर नेहरू ने दातार सिंह कमेटी की रिपोर्ट 1948 में मान ली होती. बोलो मालूम ही नहीं तो भूलेंगे कहाँ से. इन्दिरा गांधी ने गौहत्या के विरोध में 1966 में सन्तों पर लाठीचार्ज करवाया था, बोलो मालूम ही नहीं तो भूलेंगे कैसे. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन इन्दिरा गांधी ने मुसलमानों के वोट साधने के लिए करवाया था बोलो मालूम ही नहीं तो भूलते कैसे.

मालूम सब कुछ होता है लेकिन भूलने की बीमारी है हिन्दुओं को वर्ना 60 साल तक कांग्रेस ने राज न किया होता.

हो सकता है आज जो कसमें खा रहे हैं उन्हें अपनी कसम याद रहे लेकिन हिन्दू कौम को भूलने की बहुत बड़ी बीमारी है जो सदियों से इस्लाम के हाथों कटने के बाद भी आजकल इफ्तार पार्टियों में शामिल हो रहे हैं फिर कांग्रेस ने तो सिर्फ 60 साल ही बजाई थी वो कहाँ याद रहेगा.

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