लेखकों की दुनिया और उनके लेखन की अजीब आदतें

लेखन अय्याशी करना नहीं होता. कई लेखक तरह तरह की तकलीफों से गुज़र कर अपने मुकाम तक पहुंच सके. लेकिन कुछ ऐसे लेखक भी रहे जिन्‍होंने अपने लेखन से तो जगह बनायी ही, लेखन करने के तरीकों से भी चर्चा में रहे.

• लियो टॉलस्टाय को न जाने कैसे वहम हो गया था कि वे पक्षियों की तरह हवा में उड़ सकते हैं. उनकी इस अजीब सनक का यह हाल था कि एक दिन उन्होंने अपने दुमंजिले मकान की खिड़की से पक्षियों की तरह हाथ फड़फड़ाते हुए छलांग लगा दी. हाथ पैर टूटने ही थे.

• अमरीकी लेखक जॉन शीवर ने बहुत सी कहानियाँ केवल अंडरवियर पहने हुए लिखी थीं. उन दिनों उनके पास एक ही सूट हुआ करता था इसलिए उसे बार बार पहन कर उस पर सलवटें और शिकन ला कर उसे खराब करने में वे विश्‍वास नहीं रखते थे.

• विलियम फॅाकनर जब लिखते थे तो खूब व्हिस्की पीते थे. जितनी शराब अंदर, उतना लेखन बाहर. मजे की बात वे खुद दारू बनाने वाली कंपनी में काम करते थे.

• दी वॉर ऑफ़ आर्ट जैसी अनेकों प्रेरणादायी किताबों के लेखक कुछ भी टाइप करने से पहले महान यूनानी कवि होमर द्वारा रचित देवी के आह्वान का पाठ करते थे.

• बेन फ्रेंकलिन पहले अमरीकी थे जिन्‍होंने बाथ टब खरीदा था. वे उसी में लेट कर लिखते थे.

• लोलिता के लेखक व्लादिमिर नबोकोव भी बाथ टब में लेटे हुए लिखने का आनंद उठाते थे. उन्‍होंने अपने अधिकतर नॉवेल 3X5 इंच के कार्डों पर लिख कर ही तैयार किये जिन्हें वह पेपर क्लिप लगा कर छोटे छोटे बक्सों में तरतीब से लगा कर रखते थे.

• मार्क ट्वेन और राबर्ट लुई स्‍टीवेन्‍सन लेट कर लिखते थे जबकि लेविस कैरोल, थॉमस वुल्‍फ और अर्नेस्‍ट हेमिंग्‍वे खड़े हो कर लिखते थे.

• ट्र्युमैन केपोटे पीठ के बल लेट कर लिखते थे. एक हाथ में शेरी और दूसरे हाथ में पेंसिल. लगातार सिगरेट के कश लगाते और कॉफ़ी पीते. जब शाम ढलने लगती तो कॉफ़ी की जगह मिंट चाय आ जाती. फिर शेरी और अंत में मार्टिनी.

• तालस्‍ताय सुबह लिखते थे जबकि दोस्‍तोवस्‍की रात को लिखते थे.

• अमेरिकी लेखक जॉन ओ हरा आधी रात को शुरू करके सुबह सात बजे तक लिखते थे.

• बालजाक भी रात को लिखते थे. रात को जागने के लिए वे गाढ़ी, काली कॉफी पीते थे. वे 50 बरस की उम्र में कॉफी कोकीन की वजह से मरे थे.

• विख्यात अमरीकी कथा लेखिका यूडोरा एलिस वेल्टी की लेखन शैली बड़ी विचित्र थी. वह लिखती जातीं और पन्‍ने एक के नीचे एक चिपकाती जातीं. इस तरह से एक लम्बी स्ट्रिप बन जाती. तब वे पूरी कथा को एक साथ एक नज़र में देख सकती थीं.

• नाजिम हिकमत ने अपनी कविताएं जेल में रहते हुए सिगरेट की डिब्बियों पर लिखी थीं.

• कुर्ट वोनेगट लिखने से पहले दंड बैठक लगाते थे.

• और अंत में, सुप्रसिद्ध जेम्स बॉंड सीरीज़ के लेखक इयान फ्लेमिंग सोने के टाइप राइटर पर अपने उपन्‍यास टाइप करते थे.

सुबह वाले लेखक, रात वाले लेखक

• अमृत लाल नागर सुबह के वक्‍त लखनऊ में अपने घर के अन्दर तख़्त पर बैठ कर लेखन कार्य करते थे. इस तख्‍त का नाम कानपुर था.

• अमृता प्रीतम रात के समय लिखती थीं. जब न कोई आवाज़ होती हो न टेलीफ़ोन की घंटी बजती हो और न कोई आता-जाता हो. अलबत्‍ता बीच बीच में चाय की तलब लगती. इमरोज लगातार पैातालिस बरस तक देर रात उनके लिए चाय तैयार करते रहे.

• चेखव लिखने का काम आधी रात को या अल सुबह करते. उनकी मेज पर स्‍टैथस्‍कोप रखा रहता. पता नहीं कब डाक्‍टर के रूप में बुलावा आ जाये.

• जॉन ओ हरा आधी रात को शुरू करके सुबह सात बजे तक लिखते थे.

• फ्योदोर दोस्‍तोवस्‍की रात के समय लिखा करते थे.

• मार्सेल प्राउस्‍ट भी रात को लिखते थे क्‍योंकि उस वक्‍त उन्‍हें दमे के कारण कम तकलीफ होती थी.

• अर्नेस्‍ट हेमिंग्‍वे अल सुबह खड़े हो कर टाइप करते थे. वे बेशक बहुत पीते थे लेकिन टाइप एंड ड्रिंक को कभी मिक्‍स नहीं किया. पीने का काम रात को ही करते थे.

वहमी लेखक

• चार्ल्स डिकेंस अपने साथ हमेशा एक कम्पास रखते थे. उनका यह दृढ़ विश्वास था कि यदि वह उत्तर दिशा में सिर रखकर नहीं सोएंगे तो उन्हें मौत उठा ले जाएगी. वह जहां कहीं भी गए हमेशा उस कम्पास की सहायता से उत्तर की ओर सिर करके सोते रहे.

• फ्रेडरिक शिल्‍लर अपनी मेज की दराज में सड़े हुए सेब रखते थे. सड़े हुए सेबों की तीखी गंध ही उनके जीवन और लेखन की प्रेरणा स्रोत थी. इसके बिना वे काम नहीं कर पाते थे.

• फ्लैनेरी ओ’कोनोर महोदया ने अपने घर में ही मुर्गी खाना बना रखा था जिसमें मुर्गे, बत्‍तखें, चूजे वगैरह भरे रहते. उनका एक मुर्गा तो उलटे चलने में माहिर था. ये सारे पक्षी उनकी रचनाओं में भी आते थे. फ्लैनेरी ओ’कोनोर सोचते समय वनीला वेफर्स कुतरती रहती थीं.

• सामरसेट अपने को अंधविश्वासी तो नहीं मानते थे लेकिन फिर भी वे अपने लिखने के कागजों, पुस्तकों की जिल्दों, घर के प्रवेश द्वारों, यहां तक कि ताश की अपनी गड्डियों के सारे पत्तों पर भी दुष्ट नेत्र का चिन्ह अंकित करवाते थे. लिखते समय वे सदैव अपने पास एक ताबीज रखते थे ताकि दुष्ट प्रकृति वाली वस्तुओं का उनके मस्तिष्क पर प्रभाव न पड़े.

• अमरीकी उपन्यासकार जोनाथन फ्रेंजेन एक लंबे राइटर्स ब्लॉक के दौरान जब कुछ नहीं लिख पा रहे थे, तो उन्होंने तंबाकू खाना शुरू कर दिया. यह आदत उनके लेखक मित्र डेविड फ़ॉस्टर वैलेस में थी. वैलेस की आत्महत्या के बाद वह आदत उनमें आ गई. जब वे लिखते हैं, तो अपने पुराने डेल के लैपटॉप के आगे ज़ोर-ज़ोर से अपने डायलॉग्स बोलते हैं. छह घंटे के लेखन-सेशन के बाद उनका गला बैठ जाता है और यह लगभग रोज़ की बात है.

• गैब्रियल गार्सिया मार्केज के लिखने की आदतें बेहद दिलचस्प थीं. उन्होंने हमेशा टाइपराइटर पर लिखा. वे सिर्फ दो उंगलियों से टाइप करते थे. दोनों हाथों की तर्जनी से. अगर उनकी मेज पर पीला गुलाब न हो, तो वे लिख नहीं पाते थे. वह अपने लिखे हुए को शब्दों में नहीं मापते थे, बल्कि मीटर में मापते थे, क्योंकि शुरुआती दिनों में वह कागज की लंबी रिम पर लिखा करते थे.

• ज्यां पॉल सार्त्र की लिखने की बड़ी विचित्र शैली थी. औरों की तरह वे भी हाथ से लिखते थे लेकिन जब लिखते लिखते थक जाते तो पैरों से लिखना शुरू कर देते.

– सूरज प्रकाश (कथाकार)

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