लिखिए, क्योंकि कोई और नहीं सुनाएगा आपका किस्सा

काफी वक्त पहले मैंने एक लेख में कहा था कि बस लिखिए. कुछ भी, छोटा-बड़ा, बाद में आप अपने आप समझ जाएंगे कि और क्या लिखना है.

धीरे-धीरे समझ में आने लगता है कि कौन सा विषय आपका प्रिय है. किस पर आपकी जानकारी बहुत ज्यादा है, क्या लिखने में मज़ा आता है. ये एक आसान तरीका होता है लिखना सीखने का.

जैसे क्रिकेट की टीम में एक तेंदुलकर ने ही नहीं, बाकी के ग्यारह लोगों ने सालों मेहनत करके सीखा होता है, वैसे ही बाकी सारी चीज़ों में भी होता है.

कोई एक-दो जन्मजात गुणी होते हैं, लेकिन उनकी कला भी अभ्यास से ही सुधरती है. एक मित्र ने बताया कि उन्होंने मेरा वो लेख पढ़ा था, और उस से प्रेरित होकर उन्होंने अपने प्रिय बुंदेलखंड और झाँसी के इलाकों पर लिखना शुरू कर दिया.

कुछ ही दिनों में उन्होंने पूरी किताब लिख डाली है, और वो प्रकाशित भी हो गई है! अब आपको तो पता है कि हम खुद को महान तो पहले से ही मानते हैं, इस घटना ने हमें और इतराने का मौका दे दिया है.

लिखने की प्रैक्टिस करने का एक आसान सा तरीका भी फेसबुक पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे हम संगीत सीखने वाला तरीका, या कॉपी पेस्ट ट्रिक कहते हैं.

ये बिलकुल आसान है, जैसे बच्चों को शास्त्रीय संगीत सिखाने के लिए उन्हें कई मशहूर गायकों के गाये हुए, किसी महान विभूति का बनाया हुआ कोई राग दे दिया जाता है वैसा ही करना है.

फेसबुक पोस्ट में से किसी अच्छे लेखक का पोस्ट चुरा लीजिये. जी हाँ, बिलकुल सही पढ़ा, जो पसंद आया हो उसे कॉपी कीजिये और अपने पास किसी वर्ड फाइल में पेस्ट कीजिये.

जिस मुद्दे पर वो पोस्ट लिखी गई है उस पर सब कुछ एक ही पोस्ट में लिखा हुआ नहीं होगा. उस से सम्बंधित जानकारी आप गूगल सर्च करके जुटाइये, पढ़िए और पोस्ट को अब दोबारा पढ़िए.

अब आपको पता चल रहा होगा कि क्या-क्या और कहा जा सकता था जो कि नहीं कहा गया है. कुछ चीज़ें आपको पहले से भी मालूम होगी, पहले से उस विषय में रूचि नहीं होती तो पोस्ट पसंद थोड़ी आती?

अब उसी पोस्ट को अपने हिसाब से दोबारा लिख डालिए. आपकी अपनी भाषा शैली की वजह से पोस्ट बदलेगी, कुछ नयी जानकारी जुड़ने, कुछ कम होने की वजह से भी पोस्ट बदल जायेगी.

अब पोस्ट के आखिर में लिखिए… फलां लेखक के पोस्ट / लेख से प्रेरित और उसे पोस्ट कर डालिए.

दो-चार बार ऐसा करने पर आपको ये भी समझ आ जाएगा कि कौन सा लेखक पोस्ट से प्रेरणा लेने पर और सुधार की सलाह देता है और कौन पोस्ट चोरी पर भड़क जाता है.

ध्यान रखिये कि सीधा कॉपी-पेस्ट करने पर ज्यादातर लोग आपको टुच्चा, कॉपी पेस्टिया, भिखारी ही मानेंगे, अपने हिसाब से दोबारा लिखा है तो एक-दो लोग पढने की मेहनत करेंगे.

भले ही दो लाइन सुधारिए, चार शब्दों की वर्तनी सही कीजिये लेकिन अपनी कुछ तो योग्यता दिखाइये!

इस पोस्ट को लिखने की एक वजह ये भी है कि कुछ लोगों का नेचुरल टैलेंट होता है, जैसे तेंदुलकर या गावस्कर, डॉन ब्रैडमैन सभी नहीं होंगे, एक-दो ही होगे. मगर सिर्फ अभ्यास से बाकी के ग्यारह में तो शामिल हुआ ही जा सकता है.

फिर हिंदी साहित्य को देखिएगा तो नजर आएगा कि हर थोड़े दिन में कोई जबरदस्त सी कृति देने वाला, तेंदुलकर टाइप तो कोई हिंदी साहित्य में बरसों से दिखा ही नहीं!

क्या ऐसा कोई पैदा ही नहीं हुआ होगा? हुआ होगा, लेकिन या तो उन्हें खुद ही अपने टैलेंट का पता नहीं है, या संकोच की वजह से अपना गुण दबाये बैठे हैं.

ये लेख दो-चार वैसे लोगों के लिए भी थी, जिनका टैलेंट बाहर आना चाहिए. शुरू में कोई ध्यान देगा इसकी उम्मीद मत पालिएगा, लोगों का ध्यान जाने में कुछ महीने लगते हैं.

लिखिए, लिखना जरूरी इसलिए भी है क्योंकि आपका किस्सा कोई और नहीं सुनाएगा. कोई और जब आपकी कहानी बतायेगा तो वो खुद को महान और आपको कहानी का विलन बनाएगा. कोशिश कर के देखिये, ये उतना मुश्किल भी नहीं है.

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