शिक्षा और स्वास्थ्य पर कोई रोडमैप नहीं, कोई दिशा नहीं

सरकारें जादू टोना नहीं करतीं, आपके एकाउंट में पैसा नहीं डालतीं, आपके शौचालय में हार्पिक भी नहीं डालतीं.

सरकारें दिशा निर्धारित करती हैं. और उस दिशा में प्रगति के लिए कार्यान्वयन के कल कारख़ाने मज़बूत करती हैं.

यदि आप उनमें से हैं जो, पाकिस्तान अब तक हमारे क़ब्ज़े में क्यों नहीं आया, हमारे एकाउंट में पंद्रह लाख क्यों नहीं आया, बगल के गुंडे को फाँसी क्यों नहीं हुई, पेट्रोल मुफ़्त क्यों नहीं हुआ जैसी बातों से क्षुब्ध हैं, तो फिर इस लेख में आपके लिए कुछ भी नहीं है. आप इस को पढ़ कर अपना समय न बर्बाद करें.

आपके लिए एक ही रास्ता है – किसी मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर में देवदूत के धरती पर उतरने के लिए प्रार्थना में लग जाइए. या महारुदन में लग लीजिए.

आर्थिक नीति, गृह नीति, रक्षा नीति, सड़क और ऊर्जा जैसे ढाँचागत बदलाव के कुछ क्षेत्र हैं, जिनमें इस सरकार ने बहुत मेहनत की है तमाम कठिनाइयों के बावजूद, और बधाई की पात्र है.

सत्तर वर्षों की सड़ांध मिटाने में आपका ईश्वर भी काँख-कराह देगा.

पर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में इस सरकार ने कुछ भी नहीं किया है. दस में से शून्य. मैं परिणामों की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं रोडमैप की बात कर रहा हूँ. कोई रोडमैप नहीं है, कोई दिशा नहीं है.

गांव-गांव में AIIMS खोलना, गली गली में IIT खोलना – यह अच्छा प्रहसन है, कोई दिशा नहीं है.

दुनिया भर की फर्जी दवाइयों के combinations, जो बंगलादेश में तीस वर्ष पहले बंद हो गए, भारत में धड़ल्ले से चल रहे हैं.

आप पैरासिटॉमाल ख़रीदना चाहें तो वह आपको कैफीन, विटामिन सी, फ़लाना ढंकाना के बिना नहीं मिलेगा.

दवा कम्पनियों और डॉक्टरों के नेताओं की मिली भगत की कमर तोड़ने के लिए इस सरकार ने क्या किया? मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता की दिशा में क्या काम हुआ? Audit की क्या दशा है?

शिक्षा के क्षेत्र में बंदरबाँट और व्यवसायिकता पर हल्ला बोलने, गुणवत्ता पर ज़ोर देने, शिक्षा को रोज़गार के लिए प्रासंगिक बनाने जैसी बातों पर क्या काम हुआ?

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