माहिष्मती गाथा-1 : ऐश्वर्यशाली और कला सरंक्षक माहिष्मती साम्राज्य के सबूत

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माहिष्मती गाथा प्रस्तुत करने से पहले आपको ये बताना चाहूंगा कि देश के एक चक्रवर्ती सम्राट की प्रतिष्ठा को देश के ही कुछ इतिहासकारों ने कलंकित करने का काम किया है. एक ऐसा महान राजा, जिसकी सेनाएं तीनों समुद्रों पर तैनात रहती थी. जिसका साम्राज्य गंगा तराई के निचले हिस्से को छोड़कर समस्त भारतीय भूभाग श्रीलंका समेत अन्य द्वीपों तक फैला हुआ था. जिसने सनातनी परंपरा को देश में पुनर्स्थापित किया. उस महान शासक की प्रतिष्ठा को कई काल्पनिक कहानियों के जरिये धूमिल करने का प्रयास किया गया है.

हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘बाहुबली’ में जिस अमरेंद्र बाहुबली के किरदार को आपने देखा वो कतई काल्पनिक नहीं है. हमने माहिष्मती(वर्तमान महेश्वर) और उसके समीपस्थ क्षेत्रों में लंबा और थका देने वाला शोध किया है. हमने इसके लिए 46 डिग्री के तापमान में निमाड़ की ख़ाक छानी. कई म्यूजियमों का दौरा किया. महेश्वर के नामी विद्वानों की मदद ली. अंततः जो परिणाम आए वे बहुत सुखद रहे हैं. माहिष्मती की ये गाथा इतनी विस्तृत है कि एक भाग में समेटी नहीं जा सकती. तो कहानी शुरू करते हैं.

गाथा ईसा पूर्व 230 ईस्वी में प्रारंभ होती है. सम्राट अशोक की मृत्यु के बाद सातवाहन वंश के महाराज सिमूक ने मगध संधि को अमान्य करते हुए ईपू 230 में सातवाहन ब्राह्मण वंश शुरू किया. उस समय नर्मदा क्षेत्र को ‘अनूपा’ के नाम से जाना जाता था. उस वास्तविक बाहुबली का नाम गौतमी पुत्र शतकर्णी था. जैसा कि फिल्म में दर्शाया गया है कि नारी इस राजवंश में बहुत शक्तिशाली होती थी, वैसे ही सातवाहन राजवंश एक मातृसत्तात्मक राजवंश था. इसमें नारी पुरुष से कहीं अधिक शक्तिशाली हुआ करती थी.

आज यदि गौतमी पुत्र शतकर्णी का नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने आ गया है तो इसका श्रेय बाहुबली फिल्म के निर्देशक एस.राजामौली को जाता है. हम ये नहीं कहते कि बाहुबली की कथा अक्षरश सत्य है लेकिन उस कथा में आप सातवाहन राजवंश के बारे में, उनकी परंपराओं और प्रथाओं के बारे में जान सकते हैं. सबसे बढ़कर अमरेंद्र बाहुबली का चरित्र हूबहू गौतमी पुत्र शतकर्णी के प्रभावशाली चरित्र से मेल खाता है. गौतमी पुत्र शतकर्णी ने लगभग 25 साल तक एकछत्र राज्य किया. उस दौर में पूरा मध्यभारत उसके अधीन हुआ करता था.

आगे इस कहानी के किरदारों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा और आज मौजूद सातवाहन वंश के अवशेषों की बात भी करेंगे. आगे वाली कड़ियों में ये भी बताया जाएगा कि क्यों हमारे इतिहासकारों ने गौतमी पुत्र की प्रतिष्ठा धूमिल करने की चेष्टा की. सातवाहन वंश की सबसे प्रभावशाली माँ गौतमी बालाश्री की बात भी की जाएगी. बालाश्री के चरित्र की एक झलक आपने बाहुबली की शिवगामी में देख ही ली होगी.

फोटो में दिखाए दे रहे नंदी गौतमी पुत्र के बनाए एक शिव मंदिर में विराजमान है. इनकी बनावट देखकर ही आप समझ जाएंगे कि माहिष्मती साम्राज्य कितना ऐश्वर्यशाली और कला सरंक्षक रहा होगा. ये पहला प्रमाण है जो बताता है कि माहिष्मती कोई काल्पनिक जगह नहीं है.

जारी रहेगा……

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