क्योंकि मनोहर कहानियां अब नहीं छपती

समाजवादी पार्टी वाले अमर सिंह कमजोर तो खैर अभी भी नहीं ही हैं, लेकिन 15-20 साल पहले वो दौर था जब उनकी चलती थी. बड़े राजनैतिक-व्यापारिक घरानों की दावतों में उन्हें आज भी देखा जा सकता है, उस दौर में भी ख़ास तौर पर बुलाये जाते थे.

ऐसा ही एक मौका था जब नवम्बर 2000 के आखरी दिनों में एच.के.दुआ (प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार) की शादी का रिसेप्शन जैसा कुछ था. कई नामी गिरामी नेता उस दावत में मौजूद थे. ये वो वक्त था जब हाल में ही मुलायम सिंह यादव ने सोनिया गाँधी के 248 सांसदों वाली सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था.

मुलायम सिंह को विदेशी सोनिया के प्रधानमंत्री होने पर आपत्ति थी. आपत्ति तो खैर उस दौर में सुषमा स्वराज को भी थी, वो भी सोनिया के प्रधानमंत्री बनने पर सर मुंडवाने को तैयार थी. लेकिन सांप्रदायिक भाजपा से कोई लेना देना तो मणिशंकर अय्यर को था नहीं. उन्हें दिक्कत थी कि समाजवादी मुलायम ने कैसे सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ एकजुट होने से मना कर दिया?

वफ़ादार जन्तु अपनी मालकिन को विदेशी घोषित किये जाने से नाराज था. शराब के नशे में धुत्त मणिशंकर अय्यर की नजर इसी एच.के.दुआ की पार्टी में किसी और से बात करते अमर सिंह पर पड़ी.

कुछ शराब का जोश, कुछ मालकिन के प्रति वफ़ादारी का कॉकटेल बना और वो जा पहुंचे अमर सिंह के पास. पहले तो मणिशंकर अय्यर ने विदेशी को प्रधानमंत्री ना बनने देने के लिए अमर सिंह को रेसिस्ट (racist) कहा. नशे में डोलते मणिशंकर पर लोगों ने ध्यान नहीं दिया.

अमर सिंह ने समझाया कि ये समाजवादी पार्टी के सांसदों का सम्मिलित निर्णय था, उनका फैसला नहीं था. अब मणिशंकर ने अमर सिंह को मौकापरस्त कहा, तो अमर सिंह ने याद दिलाया कि वो तो मुलायम के ही साथ रहे, जबकि मणिशंकर अय्यर पहले तो कांग्रेस से ममता के पास गए और वहां फायदा ना होने पर वापिस इधर आ गए हैं, अब ममता को खरी-खोटी सुनाते हैं.

जब इनसे दाल ना गली तो मणिशंकर बोले अमर सिंह पूंजीपतियों के दलाल हैं, अम्बानी का कुत्ता है, इस पर भी भड़कने के बदले अमर सिंह ने कहा पूंजीपतियों से ज्यादा ताल्लुक तो कांग्रेसियों के रहे हैं. ये इल्जाम वो नहीं बल्कि शराब बोल रही है.

अमर सिंह को भड़काने की कोशिश कर रहे मणिशंकर अब तक गुस्से में आ गए थे तो वो चीखे, ये मेरा दिल और दिमाग कहता है. वो अमर सिंह के ठाकुर होने पर सवाल उठाने लगे, फिर लगे गाली गलौच करने. अपने सोनिया और राजीव के लिए भाषण लिखने का दावा ठोका, तो अमर सिंह ने राजीव का “वी.पी.सिंह की नानी याद करा दूंगा” वाला भाषण याद दिला दिया.

अब तक मणिशंकर का गुस्सा आसमान छू चुका था, उन्होंने माँ-बहन की गालियाँ देनी शुरू कर दी. शराबी मणिशंकर की इस हरकत पर भी अमर सिंह ने बर्दाश्त किया, समझा बुझा के उन्हें विदा करने की कोशिश की. मगर नशे में मणिशंकर अय्यर खुद के कैंब्रिज और ऑक्सफ़ोर्ड से होने का दावा करते बोले कि मुलायम की शक्ल मुझसे मिलती है. मेरा बाप यू.पी. भी जाता था, तो तुम एक बार मुलायम की माँ से क्यों नहीं पूछ लेते कि वो किसकी औलाद हैं ?

अब लोगों के सब्र का बाँध टूट गया. मणिशंकर अय्यर कालर से पकड़ कर पटके गए और अमर सिंह ने लात-घूंसों से जमकर धुलाई कर डाली. ना ना धक्का मुक्की नहीं, बाकायदा पटक कर धोया गया था. अगले पूरे हफ्ते ये दिल्ली की राजनैतिक पार्टियों का चुटकुला रहा और मणिशंकर कई रोज़ नहीं दिखे थे.

बाद में ये खबर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में भी आई जब पत्रकारों ने अमर सिंह से पूछा कि क्यों पीटा था? सांप्रदायिक मनोहर कहानी मानने के बदले आप इसे वेरीफाई भी कर सकते हैं. अमर सिंह का बयान था कि मणिशंकर अय्यर जैसों को दो पेग से ज्यादा दारू नहीं देनी चाहिए.

बाकी ये जो ताजा विवाद है इसमें मणिशंकर अय्यर ने अपना लाहौर में पैदा होना साबित किया है बस, ये शराब भी नहीं खून की खराबी बोल रही है. सौ पचास लात-जूते फिर पड़ने चाहिए, पांच सात साल और सुधरा रहेगा.

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