उमर अब्दुल्ला को क्यों याद आई वियना संधि!

एक ठो हैं उमर उब्दुल्ला. फारुख अब्दुल्ला के वंशज जो ब्रिटेन में पैदाईश लेकर भारत में राजनीति करते हैं.

कल जब सेना की जीप के आगे एक पत्थरबाज को बांधकर बारह जवानों की जान बचाने के लिये मेजर गोगोई को सम्मानित किया गया तो यह अब्दुल्ला साहब को नागवार गुजर गया.

वैसे तो पत्थरबाज को जीप पर बांधकर घुमाना भी नागवार गुजरा था जिसे इन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से दर्शाया भी था. लेकिन कल जब बांधने वाले मेजर साहब को सम्मान दिया गया तो इ झटपटाने लगे.

झटपटाहट में इधर उधर मुंह मार रहे थे तभी इन्हें एक किताब दिख गयी. सरसरी निगाह से बांचा तो उसमें वियना संधि का उल्लेख पढ़ने को मिल गया. वियना संधि पढ़कर अब्दुल्ला साहब इतने उत्तेजित हुये कि सीधे ट्वीटर पर स्खलन हो गया.

ट्वीट दिये कि सेना के मेजर ने वियना संधि का उल्लंघन किया था. लिहाजा वह सम्मान नहीं बल्कि दंड का भागी होना चाहिये. वैसे यही बात अलगाववादी भी बांच रहे हैं तो अब्दुल्ला साहब भी उनकी ही कतार के गिने जा सकते हैं.

बहरहाल वियना संधि की जिस शर्त का उन्होंने उल्लेख किया है उसके अनुसार कोई सैन्य समूह आम नागरिकों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकता. अगर वह ऐसा करता है तो यह उस संधि की शर्तों के अनुसार गलत माना जायेगा.

अब आते हैं घटना पर. सेना के मेजर ने अपने बारह मातहतों की पत्थरबाजों से जान बचाने के लिये उन्हीं के बीच से एक पत्थरबाज को पकड़ा और अपनी जीप के बोनट पर बांधकर पत्थरबाजों की भीड़ के बीच से अपने लिये सुरक्षित रास्ता बना लिया.

ध्यान रहे, पत्थरबाज को भीड़ के बीच से पकड़ा और उसे जीप के आगे बांधा, न कि किसी आम शहरी को.

वियना संधि में यह कहीं नहीं लिखा है कि कोई सैन्य समूह अपने ऊपर हो रहे हमलों के समय किसी हमलावर को नहीं पकड़ेगा. साथ ही यह भी नहीं लिखा गया है कि उस हमलावर के माध्यम से अन्य हमलावरों को रोकने के लिये मजबूर नहीं करेगा.

वास्तव में अब्दुल्ला उन्हीं अलगाववादियों के नक्शे कदम पर कदमताल कर रहे हैं. ये अलगाववादी बार-बार पत्थरबाजों और आतंकवादियों को भटके हुये मासूम बच्चे करार देते रहते हैं.

इसीलिये अब्दुल्ला साहब को भी यह पत्थरबाज एक आम शहरी दिखाई पड़ रहा है. जबकि वह पत्थरबाजों की भीड़ के बीच से पकड़ा गया एक पेशेवर पत्थरबाज था.

अब्दुल्ला को आम शहरी और पत्थरबाज में अंतर ही नहीं दिख रहा है. इसीलिये उन्हें वियना संधि याद आ रही है. जबकि वियना संधि पत्थरबाजों पर लागू नहीं की जा सकती.

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