मार्क्सवादियों की निजी और हत्यारी सेना ‘हर्मद बाहिनी’

जगह : पश्चिमी मिदनापुर, लालगढ़ ब्लॉक, नेताई गाँव… CPI का नेता Mr. Rathin Dandapat अपने पाली हुए सशस्त्र फ़ौज ‘हर्मद बाहिनी’ के 25 लोगों साथ गाँव में आता है…

‘हर्मद बाहिनी’ के पास AK-47 के साथ ही बिहार के हथियारों की मंडी जिला मुंगेर के बने हथियारों का जखीरा होता है… गाँव में कैंप बनाता है और गाँव वालों को फरमान देता है कि उनके रहने, खाने और कपड़े धोने का इंतज़ाम करें.

गाँव भर से बंधुवा मज़दूरों की तरह काम कराया जाता है… गाँव के लोगों को, खाने में नमक की कमी या ज्यादा होने पर, मार के हड्डियां तोड़ी जाती हैं…

चार किलोमीटर के घेरे में पड़ने वाले गाँवों बेलटिकारी, सिजुआ और बीरकाड में भी कैंप बनाता है… पूरे इलाके में खेती का काम बंद करा दिया जाता हैं… फरमान जारी होता है कि हमारी सेवा करो या मरो…

एक महीने तक इनका तांडव होता है… तभी इनको पता चलता है कि CRPF अब जल्द ही पूरे इलाके को घेर के इन पर हमला करके इनका खेल ख़त्म करने वाली है…

फिर आता है दिन : 7 जनवरी 2011… ‘हर्मद बाहिनी’ के लोग गाँव के लोगों पर गोलियां चलाते हैं और कैंप छोड़ कर भाग जाते हैं…

इस गोलीबारी काण्ड में 7 लोग मौके पर मारे जाते हैं, 9 बुरी तरह जख्मी होते हैं और बाद में दम तोड़ देते हैं… 8 जख्मी बचा लिए जाते हैं जबकि 6 अपंग हो गए थे…

‘हर्मद बाहिनी’ अपने विरोधी पर कहर बन के टूट पड़ती थी… 27 जुलाई 2000 को पश्चिमी बंगाल के बीरभूम जिले के ननूर गाँव में इसी ‘हर्मद बाहिनी’ के 79 लोग आये और 11 मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया क्योंकि वो CPI-M के समर्थक नहीं थे.

जाहिर है कि न कोई गिरफ्तारी, न अभियुक्त. लेकिन जब केस आगे बढ़ा तो इन लोगों ने चश्मदीदों को भी गायब कर दिया… और इस तरह न कोई मुकदमा, न तारीख… केस का चट-पट और झट-पट फैसला…

ये रिपोर्ट है APDR (Association for Protection of Democratic Rights) की जिसने गोलीबारी के बाद इलाके का दौरा किया और रिपोर्ट सौंपी…

‘हर्मद बाहिनी’ ने बंगाल में कम से कम एक लाख लोगों को मारा और गायब किया है… जब आप नदिया, पुरुलिया, मालदा, बीरभूम या 24 उत्तर परगना जाएं और वहां लोगों से ‘हर्मद बाहिनी’ का नाम पूछें…

वहां के लोग आपको इनके खून के प्यास की सच्चाई बखूबी बताते हैं… “Bloody” Laal Salaam Comrade…

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