एक स्कूल प्रिंसिपल की आपबीती

एडमिन : बच्चों को प्रतिदिन कम से कम एक पीरियड गेम्स का दीजिये.

अभिभावक : जनाब आपके स्कूल में ये क्या हो रहा है? बच्चे क्या यहां सिर्फ खेलने आते हैं? मैं जब भी स्कूल आता हूँ बच्चे खेलते हुए ही मिलते हैं.

एडमिन : नही सर,, सिर्फ एक पीरियड ही खेलते हैं. जब भी आप आये होंगे तो कोई नई क्लास ग्राउंड में होगी.

अभिभावक : अजी बच्चे घर पे खेलते ही हैं. आप सिर्फ पढ़ाई कराइये.

गेम्स बंद.

एडमिन : बच्चों, लाइब्रेरी में जाओ. खूब किताबें-पत्रिकाएँ पढ़ो. रोज़ाना एक नई किताब घर ले जाओ.

अभिभावक : ये कहानी किस्से पढ़ना बंद करो. कोर्स की किताब पढ़ो. परीक्षा में सवाल इस कहानी की किताब से नही आएंगे.
प्रिंसिपल साहब आपने ये क्या मुसीबत हमारे गले बांध दी. बच्चे जब देखो सिर्फ कहानी की किताबें पढ़ते रहते हैं. इनका लाइब्रेरी में जाना बंद कीजिए. इनसे कहिये कि सिर्फ कोर्स की किताबें पढ़ें. होम वर्क ज़्यादा दीजिये.

लाइब्रेरी बंद.

अभिभावक : मेरा बच्चा पिछले साल फर्स्ट आया था क्लास में. इस साल इसका सेकंड रैंक आया है. आजकल आप लोग बच्चों पे ध्यान नही देते. आजकल मेरे बच्चे का पढ़ने में मन नही लगता. आपका स्कूल बेकार है.

एडमिन : जनाब आपका बच्चा अब बड़ा हो रहा है. अब वो किशोरावस्था में आ गया है. उसमें शारीरिक मानसिक परिवर्तन…

अभिभावक : बहाने मत बनाइये. आप ध्यान नहीं दे रहे. यही हाल रहा तो मैं अगले साल अपने बच्चे को हटा लूंगा.

एडमिन : बच्चों को Life Skills कराओ. इनको छोटे-छोटे काम करने की आदत डालो. इनकी उंगलियां चलें. इनको हाथ चलाना सिखाओ… इन बच्चों को आटा गूंथना और प्याज काटना सिखाओ…

अभिभावक : ये क्या बकवास लगा रखी है? आटा गूंथना और प्याज काटना सीखने के लिए मैं इतनी फीस देता हूँ? आप सिर्फ और सिर्फ परीक्षा में 100 में 100 अंक लेना सिखाइये.

एडमिन : बच्चे पे प्राइवेट ट्यूशन का अनावश्यक बोझ मत डालिये. यूँ भी आपका प्राइवेट ट्यूटर निकम्मा आदमी है.

अभिभावक : एक ट्यूटर और लगा दो. अभी अंक कम आते हैं. 94% से काम नहीं चलेगा. 100% मार्क्स चाहिए.

एडमिन : बच्चे का सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास होना चाहिए. इसको गतिविधियों में भाग लेने दीजिए. प्रतियोगी खेलों में हिस्सा लेने दीजिए. इसको ग्रीष्मावकाश में एडवेंचर टूर पे भेजिए. इसको यात्रा करना सिखाइये. नए मित्र बनाने दीजिये. दुनिया घूमने दीजिये. इस से इसमें नेतृत्व क्षमता आएगी. आत्मविश्वास आएगा.

अभिभावक : आप मेरे बच्चे को बिगाड़िये मत. इसको सिर्फ और सिर्फ पढ़ने दीजिये. इसको टॉपर बनाइये. इसके मार्क्स कम नहीं होने चाहिए.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY