Mission Modi 2019 : इस ब्रह्मचारी के लिए अपनाना ही होगा ब्रह्म आचरण

Shri_Narendra_Modi_sworn_in_as_Prime_Minister

जब भी हम ब्रह्मचारी शब्द का उपयोग करते हैं तो उसे हमेशा विवाह से जोड़कर देखते हैं. या फिर ऐसा व्यक्ति जो स्त्री से किसी तरह के सम्बन्ध में ना हो.

लेकिन ब्रह्मचारी का वास्तविक अर्थ होता है जिसकी चर्या ब्रह्मा जैसी हो, या ब्रह्म को उपलब्ध होने के मार्ग पर जो चल पड़ा हो.

तो जब मैं मोदीजी को ब्रह्मचारी कहती हूँ, तो इसका आशय कहीं भी उनके वैवाहिक जीवन के त्याग या हिमालय में उनके अज्ञातवास या साधना से नहीं है. वो तो बस उस तपस्या का हिस्सा है, जिस पर सर्वोच्च सत्ता की जब विशेष दृष्टि पड़ी तो उन्हें उन अनुभवों से गुजरना पड़ा जहां सोने को आग में तपकर कुंदन बनना था.

मोदीजी की सत्ता और सर्वोच्च सत्ता के बीच के तारतम्य पर कुछ कहने से पहले ब्रह्मा का अर्थ स्पष्ट कर दूं. हमारे सनातन धर्म के अनुसार ब्रह्मा सृजन के देव हैं. व्यास लिखित पुराणों में ब्रह्मा का वर्णन किया गया है कि उनके चार मुख हैं, जो चार दिशाओं में देखते हैं.

तो जब हम मोदीजी की आलोचनाओं के बीच उनको किसी दिशा विशेष की ओर निष्क्रिय पाते हैं, तो इस बात को हमेशा याद रखिये कि ब्रह्मा के आचरण को पालन करनेवाला ब्रह्मचारी कभी किसी एक दिशा की ओर देखकर निर्णय नहीं लेता. उसे सभी दिशाओं में देखना होता है, और उन दिशाओं से प्रेषित हो रहे संकेतों को समझकर किसी दिशा विशेष के लिए निर्णय लेना होता है.

एक और बात, भागवत पुराण में यह भी कहा गया है कि ब्रह्मा वह है जो “कारणों के सागर” से उभरता है. पुराण कहता है कि जिस क्षण समय और ब्रह्माण्ड का जन्म हुआ था, उसी क्षण ब्रह्मा विष्णु की नाभि से निकले एक कमल के पुष्प से उभरे थे.

और जैसा मैं हमेशा कहती हूँ भाजपा का प्रतीक चिन्ह कमल होना कोई संयोग नहीं, यह उसी अस्तित्व की योजना का हिस्सा है, जिस पर बैठकर इस ब्रह्मचारी को कारणों के सागर पर विराजमान विष्णु सदृश्य राष्ट्र पुरुष की नाभि से उभरना था.

तो ब्रह्मा से कोई तुलना न करते हुए बस यही कहना है कि जब जब कारणों के सागर से कोई उभरता है तो वो उस ब्रह्मा के सदृश्य ही है जिसे इस माया जगत को रचना पड़ता है. इसलिए यदि किसी कार्य विशेष के लिए मोदीजी अपने ऊपर कोई दोष ले भी रहे हैं तो वह उसी योजना का हिस्सा है जिसे ऋषियों ने माया कहा है.

ब्रह्माण्ड के माया जगत को समझना हम आम इंसानों के बस की बात नहीं, महामाया की शक्ति की नज़र में कोई अच्छा या बुरा नहीं, उसकी नज़र में जो भी कार्य राष्ट्र चेतना के विरुद्ध षडयंत्र है, वो उसको ध्वस्त करती है, चाहे वो कार्य सामाजिक नज़र में कितना भी अच्छा हो. और जिस कार्य का राष्ट्र चेतना के उन्नयन के लिए असफल होना आवश्यक है तो वो शक्ति उसे निर्ममता से ध्वस्त करती है, फिर वो सामाजिक दृष्टि से कितना भी अच्छा हो.

तो जनता ने मोदीजी से बहुत अपेक्षाएं पाल रखी हैं, जो वाजिब भी है, जिसे अस्तित्व ने खुद चुना हो राष्ट्र के उन्नयन के लिए, उसके प्रति आम जनता की अपेक्षा का जुड़ जाना स्वाभाविक भी है. लेकिन मोदीजी है तो आखिर मनुष्य देह में ही!

तो मनुष्य होने की अपनी सीमा और सारे गुण अवगुणों के साथ जो व्यक्ति मात्र और मात्र भारत माँ की सेवा के लिए समर्पित है, उसके लिए उसकी तरह पूर्ण ब्रह्मचारी होना हमारे लिए संभव नहीं क्योंकि ब्रह्म आचरण के लिए बहुत कठिन परीक्षा से गुज़रना होता है, जो हर किसी के वश की बात नहीं. तो कम से कम हम इतना तो कर ही सकते हैं कि उसे वो परिस्थितियाँ प्रदान करते जाएं जिससे वो अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहें, उसमें अड़चनें न आने दें.

इसलिए मोदीजी से तीन वर्षों का हिसाब किताब मांगने से पहले इतना याद रखना कि अभी तो सिर्फ तीन साल ही हुए हैं, अभी तो हज़ार साल से सोई राष्ट्र की चेतना ने तीन बार पलकें झपकाकर सिर्फ अंगडाई ली है…

ये तीन साल तो उन तीन शब्दों के नाम का कम्पन्न मात्र है जो 26 मई 2014 को मोदी जी ने शपथ लेते हुए कहा था – “मैं…. नरेन्द्र दामोदरदास मोदी…..”, अभी तो शपथ पूरी होने में बहुत समय है…

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY