पेट और पेट के नीचे की भूख!

पेट की आग बुझाने के लिए भोजन का इंतजाम बचपन में माँ-बाप और बाद में व्यक्ति खुद अपना करता है. उसके लिए दो पैसे कमाता है और फिर घर में या होटल में अपने पेट की भूख मिटाता है.

मगर पेट के नीचे की आग.! उसका क्या? यह भी तो पंद्रह सोलह की उम्र से लगने लगती है. उसके लिए माता पिता परिवार समाज ने क्या इंतजाम किया है? कुछ नहीं. उलटा इस प्यास को बुझाने के सारे इंतजाम पर हर संभव कड़ा पहरा बिठा दिया जाता है. संस्कृति के नाम पर. धर्म के नाम पर. समाज-परिवार के नाम पर. और कहा जाता है, जब तक अपने पैर पर खड़ा नहीं हो जाता तब तक परिवार नहीं बसा सकता.

अरे भाई, भूख उसे आज लगी है और आप कहते हो पहले पढ़ लिख लो नौकरी ढूढं लो, फिर इंतजाम किया जाएगा. यह कैसी सोच है? यह क्या है? क्यों है? कैसे है? इस विषय पर पक्ष-विपक्ष और भारी-भरकम तर्क कुतर्क करने वालो से सिर्फ एक सवाल की क्या यह प्रकृति के विरुद्ध नहीं? और तो और जेब में पैसे होने पर भी वो अपनी नैसर्गिक भूख, किसी के साथ सहमति होने पर भी नहीं मिटा सकता, इसके बदले उसे नैतिक-अनैतिकता की घुट्टी पीला दी जाती है.

एक व्यक्ति जो भूखा प्यासा है, और अगर उसे किसी भी तरह बिना किसी हिंसा या जोरजबरदस्ती के भी भूख मिटाने की इजाजत नहीं, तो क्या वो सामान्य हो सकता है? क्या वो समाज सामान्य हो सकता है?

नहीं. यही कारण है कि हमारे चारों ओर बहुत कुछ असामान्य है. और अप्राकृतिक घट रहा है. और जो असामाजिक घटनाएं भी घट रही हैं उसके मूल में कही ना कही समाज की यही व्यवस्था है.

अब भी समझ नहीं आ रहा तो घर की रसोई बंद कर दीजिये और साथ ही शहर के होटल भी , फिर देखिये एक दिन में ही हर गली हर मोड़ पर, क्या बच्चा बूढ़ा जवान आदमी औरत गरीब अमीर संस्कारी , सभी अपने सारे मुखौटे उतार कर खुले में तांडव करते नजर आएंगे.

(नोट-यह पोस्ट दोनों लिंग वालो के लिए समान रूप से है और उनमे कोई भेद नहीं करती.)

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  1. इस वेबसाईट के आदरनीय प्रबंधक लोग,
    ऐसे बेहूदे का लेख आपलोग क्यों क्यों प्रकाशित करते हैं? क्या पहले से ऐसे बकवास पोस्ट को पढने की छुट्टी आपको नहीं है?
    साहब कहते हैं कि बहुत भूख लगती है, उनके माँ बहनों को भी लगती होगी. साहब बाहर से घूम के जब घर आयें तो पता चले कि लेखक महोदय के घर की महिलाएं किसी भले से भूखा-प्यासा आदमी की भूख मिटा रही है, तो कैसा लगेगा ? वे कैसे पूरी गारंटी से अपने बाप का नाम बता सकेगे??
    मनुष्य पशु से परिवर्तित होकर ही मनुष्य बना है और उसका हथियार है : संस्कार.

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