टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ सबकुछ बदला, नहीं बदला तो प्रेम में धड़कनों का बढ़ना

एक कॉन्फेशन करना है… मेरी मनपसंद फिल्में होती हैं रॉम-कॉम यानि रोमांटिक कॉमेडी.

अब मेरे जैसे घोर राजनीतिक बकैतिबाज के लिए यह एक शर्मनाक कॉन्फेशन है… जो एक कप कॉफी खरीदता है तो कॉफी की उपज और बिक्री की राजनीति के बारे में सोचता है… बाल कटाने जाता है तो यह देखता है कि हज़्ज़ाम श्रीलंकन हिन्दू है या अफगानी पठान…

अगर इंदिरा गांधी ने श्रीलंका में लिट्टे को नहीं उकसाया होता तो यह रामास्वामी रामलिंगम क्रोयडन में हजामत बनाने की बजाय कोलंबो में मैथमेटिक्स पढ़ा रहा होता… टैक्सी पर बैठता है तो सोचता है कि इराक से भागे इस टैक्सी ड्राइवर का बाप कभी लिमोजीन पर चलता होगा… और ऐसे बंदे की फेवरेट फिल्में Scindler’s List या Gladiator नहीं होकर Maid in Manhattan और Sleepless in Seattle जैसी मसाला रॉम-कॉम है… शरम की बात है…

परसों एक ऐसी ही मसाला रॉम-कॉम फिर से देखी You’ve Got Mail. मजे की बात है, फ़िल्म कितनी भी अच्छी हो, में कुछ समय बाद सबकुछ भूल जाता हूँ, तो दुबारा भी फिर से उतनी ही अच्छी लगती है.

यह फ़िल्म तो मेरे लिए ड्रीम कास्टिंग है… टॉम हैंक्स और मेग रयान. दोनों को देखते हुए मन नहीं भरता. दोनों के चेहरे पर भाव ऐसे तैरते हुए आते जाते हैं जैसे समुंदर के ऊपर बादलों की धूप छाँव की लुकाछिपी चल रही हो.

आपने भी देखी ही होगी यह फ़िल्म… नहीं भी देखी हो तो भी इसकी नक़ल पर बनी हुई कोई ना कोई हिंदी फिल्म जरूर देखी होगी. एक प्रेमकहानी है जिसमें दोनों का एक दूसरे से परिचय इंटरनेट पर होता है, इ मेल से एक दूसरे से बतियाते हुए प्यार हो जाता है, बिना शक्ल देखे… और असली जिंदगी में भी एक दूसरे से टकराते रहते हैं और बहुत चिढ़ते हैं.

सोचता हूँ, आज कोई किसी से ईमेल से प्यार करेगा क्या? अरे, ईमेल ऑफीशियल काम काज के लिए होता है… नौकरी अप्लाई करने और रेजिग्नेशन लिखने के लिए होता है. होटल बुकिंग की कन्फर्मेशन और इ-टिकट मंगाने के लिए होता है… ईमेल से भी कोई प्यार करता है क्या?

जैसे कोई अब AOL की डायल अप कनेक्शन से लॉग इन नहीं करता, ना ही वह चार इंच का मोटा वाला लैपटॉप इस्तेमाल करता है जो इस फ़िल्म में मेग रयान और टॉम हैंक्स इस्तेमाल कर रहे थे… और फ़िल्म है कितनी पुरानी? 1998 की, अभी बीस साल भी नहीं हुए…

कितनी जल्दी सबकुछ बदल जाता है… दुनिया 2 अरब सालों में एवोल्यूशन से उतनी नहीं बदली जितनी 40 सालों में टेक्नोलॉजी से बदल गयी. मुझे खुशी है, मैंने यह सब देखा है… आज के 20 मेगापिक्सेल के स्मार्टफोन्स पर स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर चल रहे अनवरत रोमांस से लेकर उस जमाने तक, जब बरामदे में बाल सुखाती हुई लड़की का चाहने वाला पत्थर में लिपटा प्रेमपत्र उसके बागान में फेंक कर चला जाता था और वह उसे उठाने के लिए ठीक तीन मिनट बाद कपड़े पसारने के बहाने से आती थी. जब हर शाम आपकी साईकल की चेन ठीक उसके घर के सामने खराब हो जाती थी, और ठीक उसी समय उसे बहुत गर्मी लगती थी और वह बाल झटकते हुए दुपट्टा हटा कर खिड़की खोलती थी.

बहुत कुछ बदला है, पर बहुत कुछ जरूर वैसा ही होगा. धड़कनें वैसे ही तेज होती होंगी, पसीना वैसे ही आता होगा… आज भी शायद इंस्टाग्राम पर किसी किशोरवय बालक के लिए किसी लड़की को You are gorgeous कहना उतना ही मुश्किल और रोमांचक होता होगा जितना हमारे समय में किसी लड़की के बैग में चुपके से अपना पहला वाला आर्चीज़ कार्ड खिसका देना होता था.

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