अरब का इतिहास : भाग-9

सामी मजहबों के आदि पुरुष इब्राहीम द्वारा अपनी बीबी/ लौंडी हाजरा को घर से निकालने को लेकर तौरात और इस्लामी ग्रंथों में बड़ा मतभेद है.

[अरब का इतिहास : भाग-8]

यहूदी मान्यता कहती है कि जब इब्राहीम के बड़े बेटे इस्माइल तेरह साल के थे तब उन्हें माँ समेत घर-निकाला दिया गया था पर इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार जिस समय इब्राहीम ने अपनी बीबी/ लौंडी हाजरा को घर से निकाला था उस समय उनके बेटे दूध पीते बच्चे थे.

[अरब का इतिहास : भाग-7]

कुरान के सूरह इब्राहीम और बुखारी शरीफ के किताबुल-अंबिया में इसका वर्णन विस्तार से आया है.

[अरब का इतिहास : भाग-6]

जब इब्राहीम, हाजरा और इस्माइल को छोड़ कर जा रहे थे वो हाजरा उनके पीछे दौड़ती हुई आई और बड़े कातर स्वर में अपने पति से कहा, मेरे पास बस थोड़ी सी रोटी है, पानी खत्म होने वाला है, साथ में दूध पीता बच्चा है और सामने ये चटियल मैदान और पहाड़ों से घिरी हुई वादी है, जंगली जानवर चारों ओर घूम रहे हैं और आप हमें छोड़कर वापस जा रहे हैं?

[अरब का इतिहास : भाग-5]

इब्राहीम ऊंटनी पर सवाल होकर लौट रहे थे, उन्होंने पत्नी के सवाल पर मौन धारण कर लिया. निराश हाजरा वापस लौट आयीं और इब्राहीम उन्हें छोड़कर वहां से चले गये.

[अरब का इतिहास : भाग-4]

इब्राहीम ने अपनी बीबी/ लौंडी हाजरा तथा अपने दूध पीते बच्चे इस्माइल को जिस जगह पर छोड़ा था उसको लेकर भी यहूदी और इस्लामिक मान्यता में बड़ा मतभेद है.

[अरब का इतिहास : भाग-3]

तौरात कहती है कि हाजरा और इस्माइल को फारान के पहाड़ों में छोड़ा गया था. यहूदी और ईसाई विद्वानों के अनुसार फारान का इलाका सीना के रेगिस्तान के पास है.

[अरब का इतिहास : भाग-2]

इधर कुरान कहता है कि इब्राहीम ने अपनी बीबी/ लौंडी हाजरा और इस्माइल को काबे के पास यानि मक्के में बसाया था.

[अरब का इतिहास : भाग-1]

चूँकि मुस्लिम जगत ये मानता हैं कि हाजरा और इस्माइल को इब्राहीम ने मक्के में छोड़ा था इसलिये हम आलेख माला को इसी मान्यता पर आगे बढायेंगे.

[अरब का वो इतिहास जिसे हम सबको जानना चाहिये]

जब रात हुई तो बीबी हाजरा बड़ी परेशान हुईं क्योंकि पास में न खाने को कुछ था, न पीने को. जंगली जानवरों की ओर से लगातार हमले का खतरा बना हुआ था और उन जानवरों की आवाजों से बच्चा डर कर न सो रहा था, न ही हाजरा को सोने दे रहा था.

सुबह हुई तो भूख और प्यास से दोनों की हालत खराब. प्यास से मरणासन्न स्थिति में पहुँच गये अपने बेटे को जब हाजरा ने प्यास से तड़पता देखा तो वहां चारों ओर दौड़नी लगी ताकि कहीं से पानी मिल जाये.

हाजरा वहां के दो पहाड़ सफा और मरवा के बीच दौड़ लगाने लगी. इसी बीच जिब्रील प्रकट होते हैं और चमत्कारिक रूप से वहां एक पानी का सोता फूट पड़ता है.

पानी वाली कथा में भी इस्लामिक और यहूदी मान्यता में विभेद है. तौरात के अनुसार मश्क का पानी ख़त्म होने के बाद जब हाजरा बैरसबा के इलाके में भटक रही थी तब उसने देखा कि उसका बच्चा प्यास से तड़प रहा है तब उसने अपने बेटे को किसी झाड़ी के किनारे डाल दिया और खुद वहां से दूर चली गई ताकि प्यास से तड़प-तड़प कर अपने बच्चे को मरता हुआ न देख सके.

वो बेचारी वहां दहाड़े मार-मार का रो रही थी तभी एक फ़रिश्ता प्रकट हो गया और उसने दोनों को एक कुआँ दिखाया. हाजरा ने बेटे को पानी पिलाया और वहीं उसकी परवरिश शुरू कर दी.

क्रमशः

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