कुछ भी तो नहीं बदला!

शायद 95% हिन्दू मित्रों को ये मालूम भी ना होगा कि मुस्लिम त्यौहार ‘शब ए बरात’ है क्या! खैर मैं बताए देता हूँ.

ये त्यौहार अपने गुनाहों से बरी होने के लिए खुदा से की जाने वाली प्रार्थना की रात का त्यौहार है… जैन बंधुओं के क्षमावाणी पर्व जैसा या कहिए हमारी महा शिवरात्रि जैसे रात्रि जागरण वाला…

कहीं कोई जलूस वाली बात नहीं, कोई भीड़ भरे प्रदर्शन वाली बात नहीं… जब गुनाहों से बरी होने की ही रात है तो कोई सांप्रदायिक तनाव की भी संभावना नहीं…

यदि तनाव होता भी है तो मुसलमानों के ही किन्हीं गुटों मैं आतिशवाजी की होड़ को लेकर… लेकिन इस त्यौहार के लिए आगरा का मुख्य मार्ग ‘महात्मा गांधी मार्ग’ बंद रहता है…

यहाँ इस मार्ग पर चौराहा नालबंद के आसपास मुस्लिम आबादी है… वो भी रोड की एक साइड यानि पूर्वी साइड में… 2007 में यहाँ से BSP से ज़ुल्फिकार भुट्टो विधायक बन चुके थे सो मुसलमानों में काफी जोश भी रहता था…

28 अगस्त 2007 की शब ए बरात की रात 4 बजे एक बाइक पर विधायक के संबंधी सहित चार मुस्लिम लड़के बाइक लहराते हुये निकले तो दुर्योग से एक ट्रक की चपेट में आ गए और एक रिक्शा भी उसके नीचे आ गया…

क्रोधित मुसलमानों ने ट्रक का पीछा कर पकड़ कर उसमें आग लगा दी… और फिर चौराहे पर वापस आकर एक के बाद एक लगभग एक दर्जन ट्रक आग के हवाले कर दिये…

तब हिन्दू भी आक्रोशित हो गए और कभी भी सांप्रदायिक दंगा ना होने के लिए पहचाने जाने वाले आगरा शहर में ‘नाई की मंडी’ थाना क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगा हो गया…

इसके बाद से ही शब ए बरात की पूरी रात महात्मा गांधी मार्ग पर वाहनों का प्रवेश वर्जित किया जाने की परंपरा आगरा पुलिस प्रशासन ने कायम कर दी…

लेकिन जिम्मेदार मुसलमानों को बुला कर ये बात करने की कोशिश नहीं की कि अंततः गुनाहों से बरी होने की रात में दारू पीकर एक ही बाइक पर चार सवार और बाइक को लहरा कर चलाने का क्या मतलब था…

बस MG रोड एक रात मुस्लिम हुड़दंगबाजों के नाम कर दी… ये परंपरा तब से अभी तक कायम है… और अब प्रदेश सरकार बदलने के बाद भी शब ए बरात के मौके ये रोड बंद है…

खैर कोई बात नहीं थी और ना है कि एक रोड एक रात को बंद हो जाती है तो… राम बरात, अंबेडकर जयंती या बरहबफात पर रोड बंद होती ही हैं… सावन में कैलाश मेला या परिक्रमा वाले सोमवार और मोहर्रम के जलूस वाले दिन ट्रेफिक डायवर्ट होता है… कोई परेशानी नहीं किसी को भी तो एक रात ये भी सही…

लेकिन क्या शब ए बरात का त्यौहार भी ऐसा है जो कि MG रोड जैसा महत्वपूर्ण मार्ग बंद करना पड़े!…

जैन भी अल्पसंख्यक समुदाय है… यदि क्षमावाणी पर्व पर आगरा के जैन, लोहा मंडी या छिपीटोला में कोई हुड़दंग करते हैं तब, क्या तो आगरा पुलिस और क्या सम्पूर्ण जैन और हिन्दू समाज उन हुड़दंगबाजों को यूं ही बिना सबक सिखाये छोड़ देगा?

शिव रात्रि को हिन्दू लड़कों की ऊधमबाजी किसी को भी बर्दाश्त होगी क्या?… और वैसे भी सावन की 20 कोस वाली परिक्रमा में श्रद्धालुओं की लाठी वर्जित कर नहीं दी क्या?

चलिये अभी तक तो बसपा और सपा का राज्य था सो सरकारी मशीनरी की हिम्मत क्या थी जो इस तरफ कुछ बदलाव की सोचती… लेकिन अब तो प्रशासन को कुछ सोचना था कि नहीं…

आखिरकार MG रोड मुस्लिम बस्ती के बीच से तो गुजर नहीं रही… केवल साइड से ही तो गुजर रही है… ट्रेफिक पुलिस के केवल चार सिपाही जिस कार्य को अंजाम दे सकते हैं उसके लिए पूरे रोड को बंद करने की क्या तुक और लॉजिक है

आगरा का प्रशासन और पुलिस क्या इतनी निकम्मी है कि एक चौराहे पर ट्रेफिक को सुचारु ना कर सके! आखिर क्या बदला है अब? काहे का कुशल प्रशासन? कैसा सुशासन?

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