कब तक पुलिस के भरोसे जीते रहोगे

हिंदपीढ़ी… राँची के सबसे खत्म इलाकों में से एक… कारण?… कारण शांतिदूत बाहुल्य इलाका!… और इनके मध्य स्थित है राँची के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में से एक मारवाड़ी कॉलेज.

अब यहाँ स्थित है तो आप आसानी से अंदाज़ लगा सकते है कि क्या माहौल होगा वहां का!… आये दिन छात्राओं के साथ छेड़खानी बड़ी आम सी बात है. कमेंट्स पास करना, गाली-गलौच करना, लव-जिहाद करना ये सब बड़ा आम है.

छात्राओं को मेन रोड से आना-जाना तो मज़बूरी है लेकिन इनके मुहल्लों की गलियों से पास होने में हिम्मत नहीं जुटा पाती. पहले भी बहुत केसेज़ सुने हैं वहाँ के… अब कल की घटना बताते हैं…

अभी परीक्षाएं चल रही है… कल शाम 5 बजे को यूजी की परीक्षा दे कर 10 छात्राएं घर को लौट रही थी… इतने में दो शांतिदूत स्कूटी से आये और पीछे से एक लड़की को पैर सटा दिया…

लड़की ने विरोध किया… तो शांतिदूत गाली-गलौच पे उतर आये… वहाँ खड़े कॉलेज के प्रेसिडेंट नितीश सिंह से लड़कियों ने शिकायत भी की लेकिन उसने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया…

लड़कियां फिर वहाँ से आगे बढ़ गई… जब वो बड़ा तालाब के पास पहुँची तो वो दोनों जोल्हा फिर से आ गए और एक लड़की को जबरदस्ती स्कूटी में बिठाने लगे… इसके बाद लड़कियां ही हिम्मत जुटाकर उन दोनों के ऊपर टूट पड़ी…

इसके बाद एक जोल्हा भाग खड़ा हुआ और एक धरा गया… बाद में अगल-बगल में जा रहे स्टूडेंट्स और स्थानीय लोगों ने जम के धुलाई की… और पुलिस के हवाले कर दिया.

भागा हुआ जोल्हा सैफ मियां है जो हिन्दपीढ़ी का ही रहने वाला है… और पकड़ाया जोल्हा फैजान खान काँटाटोली का है…

फैजान जोल्हे का कहना है कि हम कोलकाता में पढ़ते है… हमको यहाँ सैफ मियां लाया था और लड़की को पैर भी उसी ने सटाया था… मने कि हम बिल्कुल ही निर्दोष टाइप का शांतिदूत हूँ.

नीच… अगर तुम उस लड़की को उठा कर ले जाते तो तुम क्या उसकी आरती उतारते रे कमीने!?…

इनकी हिम्मत इतनी कि खुले आम लड़कियों को उठा भी लें! .. और ऐसी हिम्मत तब आई होगी जब ये जोल्हे पहले भी किये होंगे… वहां बहुत सुनने को मिलता हैं… बहुत लड़कियां लोक-लज्जा के डर सबकुछ घूंट पीकर रह जाती हैं.

और ऐसा नहीं है कि केवल छात्राओं के साथ ही ऐसा होता है… आने-जाने वाली मैडम तक को नहीं छोड़ते ये जोल्हे!!… कुछ दिन पहले ही वहां सुरक्षा के नाम पर फ़ोर्स बिठा दिया गया था… PCR वैन भी स्पेशली तैनात किया गया था… लेकिन क्या हुआ?… कुछ भी तो नहीं.

आज मुखर हो के कॉलेज के टीचर लोग भी मीटिंग कर रहे है कि जब तक हम लोगों की भी सुरक्षा की गारन्टी नहीं मिलेगी तब तक हम लोग एग्जाम को पोस्टपोन कर रहे हैं.

कुछ समझ में आ रहा है??… ऐसे ही हमारी सुरक्षा को ले के फ़ोर्स आते रहेंगे और हम गुहार लगाते रहेंगे… और वो फिर भी तुम्हें छेड़ना कम न करेंगे…

राँची में और भी कॉलेज है… किधर को फ़ोर्स लगी है?… किधर को मांग उठ रही है कि यहाँ छात्राओं के लिए फ़ोर्स बिठा के दो??…

हिन्दू बाहुल्य इलाकों में कौन सी लड़कियां पास होने में कतराती है?.. फिर उनके मोहल्लों में ऐसा क्या होता है कि उधर से हमारी माताएं-बहनें पास होने से कतराती है?

ऐसे भी दिन आने वाले हैं जहाँ हमारी बहनें पुलिस की सुरक्षा में कॉलेज जाएंगी और आएंगी?!.. लेकिन वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाले…

कुछ अच्छे शांतिदूत डिफेंड (विरोध नहीं करेंगे) करते हुए मिलेंगे… कि क्या खाली छेड़खानी मुस्लिम मोहल्लों में ही होती है?.. क्या छेड़खानी केवल मुस्लिम ही करते हैं?

जी, बेशक छेड़खानी सभी करते हैं… लेकिन जिस मनचले की बिना जात-धर्म देख के अच्छे से धुलाई जितना हिन्दू करते हैं उतना तुम बस दाढ़ी और टोपी देख के नहीं करते हो.

इसलिए ही हिन्दू बाहुल्य इलाकों में लड़कियां बेख़ौफ़ पास होती है, क्योंकि उन्हें मालूम है कि अगर कोई दुष्टता करता है तो अच्छे से रेलायेगा भी…

वहीँ मुस्लिम मोहल्ले में सब कुत्ते की तरह टूट पड़ेंगे. एक दो अच्छे हुए भी तो साइड कर दिया जाता है.

और वही साइड किये हुए लौंडे ही हम हिंदुओं को भाई-चारा का पाठ सिखाते मिलते हैं… साले यही बातें अपने वालों को क्यों नहीँ सिखाते हो बे… और यही कारण होता है कि उनके मोहल्लों से कोई पास नहीं होना चाहता.

ये जोल्हे ऐसे ही बढ़ते रहेंगे और अपने इलाकों को आइसोलेट कर दूसरे इलाके में घुसपैठ करते रहेंगे व हमारी लड़कियों को छेड़ते रहेंगे… सौ में से दस लड़कियां तो जाल में फंसनी ही फंसनी हैं…

कब तक पुलिस के भरोसे जीते रहोगे बे??

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