मौत का सौदागर : देश में बेची जा रही घटिया किस्म की दवाइयां

यह सुनकर हर किसी के कान खड़े हो जाएंगे कि हमारे देश में 60 अलग अलग किस्म की दवाइयाँ जांच करने पर घटिया किस्म की पाई गई हैं. मार्च 2017 में केन्द्रीय औषधि मानक एंव नियंत्रण संस्थान भारत सरकार ने अलग अलग दवाइयां बनाने वाली कम्पनियों की दवा के सेम्पल इकट्ठे किये.

इन मेडीसिन की गुणवत्ता का जब मानक प्रयोग शाला में परीक्षण किया गया तो पता चला कि निम्न 60 जीवन रक्षक एंव उपयोगी दवाइयां गुणवत्ता के मामले में निर्धारित कसौटी पर खरी नहीं पाई गई. इन साठ दवाइयों की सूची इस प्रकार है :-
The 60 drugs which have found their way into the ‘substandard’ list are as below:
1. Stromix A 75 (Clopidogrel & Aspirin Capsules)
2. Nifesta – 10 (Nefidipine Sustained Release Tablets I.P.)
3. Primaquine Tablet I.P. 2.5 mg
4. Macmika 100 (Amikacin Sulphate Injection I.P. 2 ml)
5. Onset (Ondansetron Injection I.P.)
6. Amoxycillin & Cloxacillin Capsules
7. Micarti – DS (Glucosamine Capsules 500 mg)
8. Clobetasol Propionate Cream B.P. 10 gms
9. Gentamicin Injection I.P.
10. Ceftriaxone Injection I.P.
11. Injection of Etofylline & Theophylline
12. Nkacin – 500 (Amikacin Sulphate Injection I.P.)
13. Cefuroxime Axetil Tablets I.P. 500 mg
14. Metronidazole Tablets IP 200 mg
15. Fungal Diastase (1:1200)+Pepsin (1:3000)/15ml (Nutozyme Syrup)
16. Cetirizine Tablets IP (Ceriz Tablets)
17. Ofloxacin Dispersible Tablets 100mg (Oflox-100 DT)
18. Paracetamol, Caffeine anhydrous and Phenylephrine HCl Tablets (New D Cold Total Tablets)
19. Pantoprazole Gastro-Resistant Tablets IP (Panza- 40 Tablets)
20. Atenolol Tablets IP (Tenol-50 Tablets)
21. Calcium Carbonate with Vitamin D3 Tablets (Osocal- 500 Tablets)
22. Thiocolchicoside and Etoricoxib Tablets (EtoxtanMR Tablets)
23. Cefixime and Ofloxacin Tablets (Matcef-o Tablets)
24. Erythromycin Stearate Tablets IP 500mg
25. Combiflam (Ibuprofen and Paracetamol Tablets)
26. Etoril-5 (Ramipril Tablets I.P. 5mg)
27. Stromix A 75 (Clopidogrel & Aspirin Capsules 75mg+75mg)
28. Lactulose Solution USP 10g/15ml (B. No.: LSS5001B)
29. Lactulose Solution USP 10g/15ml (B. No.: LSS50038)
30. Cadilose (Lactulose Solution USP)
31. Lactulose Solution USP 10g/15ml (B. No.: LSS6001B)
32. Lactomed ( Lactulose Solution USP 10g)
33. Ciprofloxacin Tablets IP 250mg
34. X’ tor-10 (Atorvastatin Calcium)
35. Calcium Carbonate with Vitamin D3 Tablets
36. Doxylamine Succinate Tablets
37. Doxylamine Succinate Tablets
38. Doxylamine Succinate Tablets
39. Theo – AsthalinTablets
40. Lomotin Tablets
41. Pyra Tablets
42. Acloway – P Tablets
43. Carbamal – 200 Tablets
44. Elkaf – CM Expectorant
45. Ibuprofen Tablets
46. Zinc Sulphate Dispersible Tablets
47. Cipro – 500 Tablets
48. Elkaf – CM Expectorant
49. Fexonil – 180 Tablets
50. Doxylamine Succinate Tablets
51. Tramaford Tablets
52. Zinc Sulphate Dispersible Tablets
53. Aricepo – 200 Tablets
54. Riptin – 25 Tablets
55. Ferrous Sulphate & Folic Acid Tablets (LARGE)
56. Iron Tablets with Folic Acid (B. No.: IFL-27)
57. Ferrous Sulphate & Folic Acid Tablets
58. Ceftrixone & Sulbactum Injections
59. Iron Tablets with Folic Acid (B. No.: IFL-31)
60. Ferrous Sulphate & Folic Acid Tablets (LARGE)

इन दवाइयों के निर्माताओं को नोटिस जारी कर दिए गए हैं. आगे इन पर क्या कार्यवाही होगी इसका कोई अता पता नहीं है.

इन्सान की जिन्दगी से खिलवाड़ करने वाले इन दवा निर्माताओं पर मोदी सरकार ने शिकन्जा कसना शुरू कर दिया है. दवाइयों के दाम घटाने के प्रयास को असफल करने के लिए और डाक्टरों को सस्ती दवा लिखने के मोदी सरकार के स्पष्ट आदेशों का बदला लेने के लिए, यह सब दवा निर्माताओं की सोची समझी साजिश नजर आ रही है.

सरकार ने डाक्टरों को कमीशन खिलाकर तीन रूपये की दवाई को 13 सौ रूपयों में बेचने  के षड़यन्त्र पर जैसे ही चाबुक चलाया और स्पष्ट आदेश जारी किए कि चिकित्सक सिर्फ “जेनेरिक कही जाने वाली” सस्ती दवाइयां ही मरीजों को लिखे, इस आदेश के बाद दवा निर्माताओं ने इन सस्ती जेनेरिक कही जाने वाली दवाइयों का निर्माण घटिया करना शुरू कर दिया. जिससे यह जेनेरिक दवाइयां मरीज की बीमारी में उसे कोई फायदा न करें और मजबूर होकर जिन्दगी बचाने के लिए मंहगी दवाइयाँ खरीदना पड़े.

अमेरिका में यदि बाजार में बिकने वाली दवा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होती तो निर्माता कम्पनी के मालिक को तत्काल गिरफ्तार करके मुकदमा चलाया जाता है. कानून के अनुसार अपराध सिद्ध होने पर निर्माता को एक साल की सजा और एक हजार डालर का दण्ड तत्काल कर दिया जाता है.

हमारे देश में ऐसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है जिसके मुताबिक नियमों का उल्लंघन करने तथा गुणवत्ता में खरा नहीं उतरने वाली दवाई कम्पनियों के मालिकों को किसी प्रकार की कानूनी सजा दी जा सके.

दरअसल दवा बाजार में जितनी खुली लूट है उतनी किसी भी व्यापार में नहीं है. “जेनेरिक ” कही जाने वाली दवाइयां वह दवाई होती हैं जिसे रासायनिक अणुओं को मिला कर मूल दवाई बनाई जाती है. सभी बीमारियों में काम आने वाली असली दवाइयां यही जेनेरिक दवाई ही होती हैं.

दूसरी मंहगी दवाइयां इन जेनेरिक यानि मूल दवाइयों को अलग अलग मात्रा में मिलाकर नया फार्मूला तैयार करके मँहगी कीमत पर बेचा जाता है. मंहगी दवाई बेचने का एक सुव्यवस्थित रैकेट या गिरोह होता है. इसमें डाक्टरों को कमीशन के आधार पर मंहगी और अलग अलग नामों की दवाई लिखवाई जाती हैं. जबकि बीमारी मिटाने के लिए सिर्फ जेनेरिक दवा ही काम करती है.

सरकार की सस्ती दवाइयों की नीति को चूना लगाने के लिए अब खुलम-खुल्ला जेनेरिक दवाइयों को घटिया बनाना शुरू कर दिया है. जिससे सरकार की सस्ती दवाई दिलाने की योजना असफल हो जाये.

जब एक प्रख्यात दवा बनाने वाली बड़ी कम्पनी के मालिक से पारिवारिक चर्चा के दौरान घटिया दवाइयों के मुद्दे पर जानकारी चाही गई तो, उन्होंने बहुत ही आश्चर्य जनक जानकारी दी. मालिक के अनुसार जेनेरिक दवाईयों को परस्पर मिलाकर किसी नई फार्मूले की दवा बनाने की अनुमति या लायसेन्स लेने में करोड़ो रूपयों की घूंस देना पड़ती है.

फिर मार्केटिंग और डाक्टरों के कमीशन के कारण मंहगी दवा बेचना पड़ती हैं. उनका कहना है कि सरकार अगर अपने औषधि नियन्त्रक कार्यालय में घूंस लेना बन्द करा दे, तो दवाइयां बाजार में अपने आप सस्ती हो जाएँगी.

जब इन सज्जन के ध्यान में ‘CDSCO’ की ताजा जानकारी के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि हर साल मार्च के महिने में इस तरह की दवाइयों को घटिया करार करने वाला नोटिस हर साल आते रहते हैं. इन नोटिसों में गुणवत्ता की कमी का मामला कम होता है, औषधि नियन्त्रक के कार्यालयों में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी कर्मचारियों अधिकारियों को उनके निजी सालाना फीस की बात अधिक छुपी होती है.

सबको अपना अपना हिस्सा पहुंचा दीजिए, गुणवत्ता में बिना कुछ किए सुधार हो जाता है. अब देखियेगा कि दर्द निवारक “काम्बीफ्लेम”, सर्दी जुकाम की “डी कोल्ड” जैसी आम गरीब आदमी के उपयोग की दवाइयों को घटिया बताया गया है.  क्योंकि यह दवाइयां  ऐसी है, जो गरीब से गरीब आदमी भी अपनी परेशानी में बगैर डाक्टर के पूछे ले लेता है.

इन दवाइयों का मार्केट इतना बड़ा है कि उनका टर्न ओवर सैंकड़ों करोड़ों रुपयों का है. जबकि इनके प्रचार में न किसी विज्ञापन की जरूरत होती है न किसी डाक्टर को कमीशन देने की जरूरत है. इसी प्रकार सिपला का बहु चर्चित “ओफ्लोक्स”, अस्थमा की “अस्थालीन” हृदयरोग की “केडीलोक” दवाइयों को निम्न स्तर की बताना साफ जाहिर करता है कि अफसरों और नेताओं का सालाना निजी फीस का टाईम खत्म हो गया जल्दी से लिफाफा भेजो. लिफाफे के पहुंचने के बाद इन सभी 60 दवाइयों की गुणवत्ता उत्तम हो जाएगी.

पता नहीं दवा निर्माता के इन नामी दिनामी सज्जन के उवाच में कितनी सत्यता है? क्या यह हजरत सही बोल रहे हैं या फिर सी डी एस सी ओ “केन्दीय औषधि मानक एंव नियन्त्रण संस्थान” भारत सरकार की जांच रिपोर्ट सही है? पर दोनो की वर्तमान स्थिति में यह तो सुनिश्चित है कि या तो एक मौत का सौदागर हैं या दूसरा इन मौत के सौदागर रूपी नागों को दूध पिलाकर पालने वाले खूंखार लोग हैं. दोनों ही हालातों में जहर की फूंफकार का शिकार तो आम गरीब जनता को ही होना है.

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