एक्सीडेंट में किसी एक इंसान की मौत, मानों पूरे परिवार की मौत

जब एक इंसान मरता है तब उसके साथ कई परिवार और कई उम्मीदें भी मर जाती हैं, इसलिये आप ऐसी कोई गलती न करें जिसके कारण किसी परिवार का मरना हो.

किसी विद्वान् का कथन है कि “इंसान को दूसरों की गलतियों से भी सीखना चाहिए, अगर वह सिर्फ़ अपनी ग़लतियों से सीखता है तब भूल सुधारने के लिए ये जीवन बहुत छोटा है”.

हम अक्सर अपने जीवन में अपनी गलतियों से ही सीख लेते हैं और दूसरों की गलतियों से सीख न लेते हुए उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं. हमारे जीवन में कई बार एक मामूली सी चूक से कई घटनाएँ ऐसी घट जाती हैं जिसका खामियाज़ा हम जीवन भर नही चुका पाते.

किसी घटना के घटित होने से पहले हमारी ज़रा सी लापरवाही या घटना के प्रति असावधानी ऐसी घटनाओं को जन्म दे देती है जिसकी भरपाई मानों असंभव सी हो.

आजकल युवा रोज़गार और व्यवसाय के चक्कर में अपने घर परिवार से दूर रहकर अकेले किसी शहर में जॉब करते हैं, और अपने सुखः दुःख को छिपाते हुए मात्र अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं.

वे प्रतिदिन कई घटनाओं से जूझते रहते हैं, परिवार में कोई दुःखी न हो इसलिए अपने हालात को परिवार में बयान नही करते, प्रतिदिन वे कई दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं .

वैसे तो हम सभी के जीवन में हज़ारों तरह की घटनाएं घटित होती हैं और सारी घटनाएँ हमेशा आकस्मिक ही होती हैं. ऐसी ही घटनाओं में से एक है रोड एक्सीडेंट, जो आज मेरे साथ घटित हुई.

वैसे तो भारत में प्रतिदिन रोड एक्सीडेंट में मरने वालों की संख्या बहुत है जिसमें मरने वाला अधिकतर दूसरोँ की ग़लती से मारा जाता है, अक्सर मरने वाला दूसरों को बचाने के चक्कर में ख़ुद मारा जाता है और जब कोई मारा जाता है तब हम उसकी ज़िम्मेदारी प्रशासन और ट्राफिक पुलिस पर लगा देते हैं, लेकिन हम ख़ुद कभी ऐसी घटना से सीखते नही हैं.

आजकल रोड एक्सीडेंट से सुरक्षा की ख़ातिर पुलिस द्वारा बहुत से प्रबंध किए जा रहे हैं और बहुत से जागरूकता अभियान भी चलाये जा रहे हैं. किसी भी चौराहे पर ये स्लोगन “Do Not Drunk & Drive” लिखा दिख जाता है लेकिन कितने लोग इसका पालन करते हैं वह हम सभी भारतीय जानते हैं. आज भी बहुत से लोग शराब पीकर वाहन चलाते हैं जो दूसरों के लिए मौत का फ़रमान लाते हैं.

दुपहिया वाहनों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर पुलिस द्वारा कितनी सख़्ती की जाती है, भारत के सभी शहरों में हेलमेट को लेकर प्रतिदिन चालान काटे जाते हैं फिर भी कई लोग आज भी हेलमेट नही पहनते.

हेलमेट को लेकर जगह-जगह कितने अच्छे स्लोगन लिखे मिलते हैं जैसे “हेलमेट को ना समझो बीमारी, सुरक्षा है यह सिर की भारी” फिर भी हम कितने लोग उसका पालन करते हैं वह भी सभी जानते हैं.

आप सभी सोच रहे होंगे की मैं आप सभी को इस मुद्दे पर ज्ञान क्यों दे रहा हूँ, तो हुआ यूँ कि आज दोपहर लगभग दो बजे मैं और मेरा दोस्त किसी काम से अपनी बाइक ‘रॉयल इन्फिल्ड’ से मार्केट जा रहे थे.

मेरा दोस्त बैक चला रहा था और मैं पीछे बैठा हुआ था. हमारी स्पीड लगभग 50-60 थी, हमारी बाइक one-way मेन रोड पर थी और हमारे पीछे एक डस्टर कार और एक बस आ रही थी.

तभी एक गली से एक नौसिखिया बाइक रेसर फुल स्पीड में शार्ट कट मारने के चक्कर में, बिना कोई इंडिकेटर दिए रॉंग डायरेक्शन में हमें क्रॉस करने के चक्कर में हमारे सामने से हमारी बाइक में टकरा गया.

अब उसे बचाने के चक्कर में हमने तुरंत डिस्क ब्रेक मारा और दोनों की गाड़ियाँ आपस में टकरा गयीं. चूँकि गाड़ी स्पीड में थी सो न्यूटन के नियम से मैं पहले सीधा सिर के बल रोड पर गिरा, फिर बायें कंधे के बल रोड पर फिसलता चला गया.

वहीँ मेरा दोस्त बाइक के साथ ही फिसलता हुआ गया, तभी पीछे आने वाली डस्टर कार ने हमें बचाने के चक्कर में फुल ब्रेक मार दिए जो हमसे मात्र दो या तीन फीट दूरी पर आकर रुकी. वहीँ बस ने भी कार को बचाने के चक्कर में ब्रेक मार दिए जो कार से टकराने से क्षण मात्र ही बची.

इस एक्सीडेंट में दोनों बाइकों को कचूमर निकल गया, दोनों बाइक लगभग फुल डैमेज हो गईं, हम दोनों को काफ़ी चोट आयी, हाथ पैर छिल गये और उससे भी ज़्यादा हमें अंदरुनी चोटें आयीं जैसे दोस्त का पैर फ्रैक्चर होना और मेरे बायें कंधे में बहुत चोट आना, वहीँ नौसिखिया बाइक वाला हेलमेट नहीं पहने हुए था सो उसको हम से ज़्यादा चोटें आयीं.

अब चूँकि फ़ौज में अनुशासन के नाम पर बहुत अच्छी चीजें सिखायीं जाती हैं और उनका पालन भी कराया जाता है जिनमें से एक है बाइक चलाते समय दोनों हेलमेट पहनेंगे… चालक भी और पीछे बैठने वाला भी. सो फ़ौजी हमेशा हेलमेट पहनकर ही बाइक चलाते हैं और आज उसी आदत के कारण मेरी और मेरे दोस्त की जान बची.

आज मैंने पहली बार मौत को अपने सामने खड़ा देखा, मेरा दिमाग़ शून्य पड़ गया, मेरी आँखों के सामने अँधेरा हो गया था. मुझे कुछ समझ ही नही आ रहा था, सारी घटना मानो फ्रेक्शन ऑफ़ सेकंड में घट गई.

अब मैंने जल्दी से अपने दोस्त को उठाकर रोड के साइड में बैठाया, फिर एक लड़के की मदद से उस नौसिखिया बाइक ड्राइवर को भी उठाकर रोड के साइड में बैठाया. फिर किसी तरह बाइक को वहाँ से उठाकर रोड क्लियर किया. फिर हम तीनों लगभग दस मिनट रोड की साइड में लेटे रहे, फिर अपने-अपने रास्ते चले गये.

आज मैं भगवान का शुक्रगुज़ार हूँ कि हम तीनों सही सलामत जिन्दा बच गए जो शायद मेरे माता-पिता की तपस्या का असर हो या गुरुजनों का आशीर्वाद का असर.

लेकिन इस घटना के बाद मेरे जेहन में कई बातें कचोटने लगीं, जैसे अगर मैने हेलमेट नहीं पहना होता तो शायद मैं यह घटना लिखने के लिए जीवित ना होता, अगर उस डस्टर कार और बस वाले ने टाइम से ब्रेक नहीं लगाये होते तो भी शायद मैं आज जीवित नही होता, हेलमेट की उपयोगिता आज मुझे समझ आयी.

इस पोस्ट के माध्यम से मैं सभी से यही कहना चाहता हूँ कि कृपया ट्रैफिक के नियमों का पालन कीजिये. अपनी ख़ातिर न सही लेकिन अपने परिवार की ख़ातिर हमेशा हेलमेट लगाकर ही बाइक चलाइये. बाइक की स्पीड लिमिट में रखिए और जल्दबाजी में किसी शार्ट कट के चक्कर में अपनी और दूसरों की जान जोख़िम में न डालिये.

क्योंकि एक्सीडेंट में मात्र एक इंसान नही मरता बल्कि पूरा परिवार मर जाता है, सो आप इस पाप के भागीदार न बनिए.. एक बार पुनः मैं भगवान का धन्यवाद करता हूँ हमें जीवन दान देने के लिए.

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