किसी के हाथों का खिलौना तो नहीं बने हुए हैं राष्ट्रवादी!

Sword of Truth नाम की एक फैंटेसी उपन्यास की सीरीज है… लेखक हैं Terry Goodkind. फैंटेसी, यानि जादू की दुनिया. हैरी पॉटर से कुछ साल पहले आयी इस सीरीज ने अपने समय दुनिया में अलग ही धाक जमाई थी. इसकी पहली किताब है “Wizard’s First Rule”…

इस सीरीज की हर किताब में विज़ार्ड का एक नया रूल दिया गया है. वैसे तो ये रूल कई हैं, पर पहले तीन रूल यहाँ शेयर करना चाहूंगा. आज के दिन राष्ट्रवादियों और सरकार पर समान रूप से लागू होते हैं. सोचें, विचारें और अपने अंदर देखें…

Wizard’s First Rule : “People are stupid; given proper motivation, almost anyone will believe almost anything….”

Wizard’s Second rule : “The greatest harms can result from the best intentions.”

Wizard’s Third Rule : “Passion rules reason.”

ये तीनों नियम देश में राष्ट्रवादियों पर ऐसे हूबहू लागू हो रहे हैं कि आश्चर्य होता है. लोग कुछ भी विश्वास कर लेते हैं, क्योंकि लोग मूलतः मूर्ख हैं…

जब हम यह कहते हैं तो सामान्यतः अपने आपको इससे बाहर कर लेते हैं. थोड़ी अंतर्दृष्टि की जरूरत है. ये नियम हम पर भी लागू होते हैं. मूर्ख सिर्फ दूसरे लोग ही नहीं हैं, हम भी हैं… हम, आप, हम सब…

हम जो विश्वास करना चाहते हैं, करते हैं… वही देखते हैं जो देखना चाहते हैं… अगर 2014 में हमने विश्वास किया था कि नरेंद्र मोदी आएंगे तो देश मे सभी देशद्रोही शक्तियों की नकेल कसेंगे, उन्हें जड़ से मिटा देंगे… तो यह अपनी ही आवाज़ हम सुन रहे थे… अगर हम मोदीजी की आवाज़ सुनते तो हमें सबका साथ, सबका विकास ही सुनाई देता…

आज भी अगर हम पाकिस्तान का नाम सुनकर उबाल खा रहे हैं, तो वह हमारी अपनी ही कल्पना है. वरना यही पाकिस्तान कल भी था, यही काश्मीर कल भी था… यही सैनिक कल भी मरते थे… कुछ नया नहीं हुआ… सिर्फ सरकार बदली है…

अब आते हैं दूसरे रूल पर… अच्छे इंटेंशन्स सबसे ज्यादा नुकसान कर सकते हैं…

सरकार के इंटेंशन्स अच्छे हैं… पहली बार एक सरकार आई है जो अच्छे इरादे लेकर आई है, कुछ अच्छा करना चाहती है इसमें किसी को शक नहीं है. पर सिर्फ अच्छी नीयत अच्छे परिणामों की गारंटी नहीं हैं.

आप अच्छे इरादों के साथ कश्मीर के अलगाववादियों को राष्ट्र की मुख्य धारा में जोड़ना चाहते हैं, पिछड़े हुए मुसलमानों का आर्थिक विकास करना चाहते हैं, कुचली हुई महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना चाहते हैं…

सारे अच्छे इंटेंशन्स हैं… ये अच्छे इंटेंशन्स अच्छे परिणामों की गारंटी नहीं हैं… बुरे परिणामों से बचाव भी नहीं हैं…

और हम आप जो विरोध कर रहे हैं, वे भी सभी अच्छे इंटेंशन से कर रहे हैं. सब देश का भला चाह रहे हैं. कुछ सुधि जन विरोध नहीं कर रहे… समर्थन बनाये रखने की अपील कर रहे हैं… वे भी अच्छी नीयत से ही कर रहे हैं.

मोदी के समर्थन करने से किसी का घर नहीं चलता, ना ही विरोध करने के पैसे मिल रहे हैं. पर नीयत से देश नहीं चलता… नीयत से किसी का भला नहीं होता. बात रिजल्ट की कीजिये… अपने संदर्भ में भी इस प्रश्न को सामने रखिये… मेरे समर्थन और विरोध में देश का भला है या नहीं?

क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण है Wizard’s 3rd rule.. Passion rules reason… हम सभी का पैशन ही हमारी बुद्धि पर शासन कर रहा है. हमारा समर्थन या विरोध इसी पैशन पर टिका है. बात अच्छी लगी तो समर्थन करते हैं, दिल दुखा तो विरोध…

और यही वह नियम है जो हमारे दुश्मनों को भी ठीक-ठीक ही पता है… वे हमारे पैशन को ही टारगेट कर रहे हैं… टीवी पर खबरें दिखाई जा रही हैं तो इसी पैशन को केंद्रित करके.

उन्हें पता है यह राष्ट्रवादी दिल से सोचने वाले जंतु हैं. अगर टीवी पर किसी शहीद की माँ को दिखा रहे हैं तो उसकी फिक्र में नहीं, इसी पैशन को भड़काने के लिए…

तो अपने रिएक्शन्स सोच समझ कर दें… अपेक्षाओं, आशाओं, मोहभंग या समर्थन… सबकुछ को तर्क और रीज़न की कसौटी पर परख कर देखें… क्योंकि कोई है जो हमारी रीज़निंग से, हमारी तर्क बुद्धि से खेल रहा है… किसी और को भी ये नियम पता हैं… क्योंकि किताब चाहे कुछ बरस पहले लिखी गयी हो… नियम ये पुराने हैं, शाश्वत हैं…

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