आयुर्वेदिक उपचार से ही ठीक होगी सत्तर साल पुरानी बीमारी

मेरे पास पिछले महीने एक औरत अपने ग्यारह साल के बच्चे के साथ आई थी. बच्चा दिखने में आठ-नौ वर्ष का दिख रहा था.

पूछने पर पता चला कि महीने में कम से कम दस दिन वो बीमार ही रहता है. सर्दी-जुकाम और बुखार तो हर सप्ताह होता था.

डॉक्टर पाँच दिनों का एंटीबायोटिक का कोर्स दे देते थे, दस दिनों के बाद फिर से वही हाल… बीमारी के कारण वो चिड़चिड़ा भी हुआ रहता था… खाना भी ठीक से नहीं खाता था. ऐसे में शरीर पनपे तो कैसे पनपे.

मम्मी परेशान थी… किसी की सलाह पर आयुर्वेदिक दवा लेने मेरे पास आई थीं…

मैंने पहले ही समझा दिया कि ग्यारह साल पुरानी बीमारी है… पाँच दिन में ठीक होने की उम्मीद मत करना…

सर्दी-जुकाम और बुखार तो दो-तीन दिनों में ठीक हो जाएगा पर बार-बार बीमारी ना हो इसको ठीक करने में समय लगेगा.

आज फिर वो आई थी बहुत खुश थीं… एक महीने में सिर्फ थोड़ा सा जुकाम हुआ बच्चे को और अब उसकी डाइट भी बढ़ गई… स्कूल की छुट्टी भी नहीं करनी पड़ी.

बचपन में उसको दो बार न्यूमोनिया हुआ था जिसका ठीक से उन लोगों ने इलाज नहीं करवाया था…

उसका असर अभी तक बना हुआ था… अभी तक इतना ज्यादा एन्टीबायोटिक खा चुका था कि वो भी बेअसर हो रहा था…

ठीक यही स्थिति है युद्ध की… पाकिस्तान के लिए युद्ध वो एंटीबायोटिक बन चुका है जिसका असर उस पर नहीं होता है.

जन्म लेने के साथ ही उसने युद्ध करना शुरू कर दिया था, 70 साल में उसके अंदर इसके एंटीबॉडीज़ तैयार हो गए हैं… इसलिए युद्ध बेअसर साबित होता है.

कारगिल में बुरी तरह पराजित हुआ था फिर भी नहीं सुधरा… पिछले साल के सर्जिकल स्ट्राइक का भी असर ज्यादा देर तक नहीं रहा…

अब उसको आयुर्वेदिक इलाज की जरूरत है… आयुर्वेदिक उपचार से ठीक होने में तो समय लगेगा….

मोदी जी केजरीवाल को भी क्रोनिक खाँसी के इलाज के लिए आयुर्वेदिक उपचार की सलाह देते हैं… तो पाकिस्तान जैसे नासूर का इलाज युद्ध वाली एलोपैथी एन्टीबायोटिक से तो करेंगे नहीं…

चाहे आप लोग कितना भी छाती पीट लो… अटल जी वाले बादल भी नहीं मँडराने वाले हैं इस बार…

बीमारी तो ठीक होगी ही… सत्तर साल पुरानी है इसलिए समय भी ज्यादा लगेगा और आयुर्वेदिक तरीके से ही होगा… क्योंकि आयुर्वेद भारत का अपना है

अमेरिका की नकल करके कोई काम क्यों करना है? वैसे अमेरिका ने भी जो व्यवहार इराक और तालिबान के साथ किया वैसा पाकिस्तान के साथ नहीं किया.

सद्दाम के महल पर तो बमबारी कर दी थी पर एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के घर पर बमबारी नहीं की.

एबटाबाद के घर के अंदर जब सील कमांडो पहुँच सकते थे तो अमेरिका का प्लेन वहाँ बम नहीं गिरा सकता था क्या?

कुछ तो कारण रहा होगा…. अब कोई अति समझदार ये कह देगा कि अमेरिका भी पाकिस्तान के परमाणु बम से डरता है!

ओसामा बिन लादेन को ढूँढने में उसको भी समय लगा था…. 9/11 के दूसरे सप्ताह में ही ओसामा को पकड़ कर नहीं मार दिया था…

अमेरिकी जनता बहुत स्वार्थी है और देशभक्ति तो उनमें हैं ही नहीं… इसलिए उन लोगों ने ना सोशल मीडिया पर क्रांति करके अपनी सरकार पर दबाव बनाया, ना ही बराक ओबामा से उनका विश्वास खत्म हुआ.

हम कुछ बड़े वाले देशभक्त हैं इसलिए बेवकूफ सरकार चुनते हैं, फिर उसको धमकी के साथ सलाह दे कर काम करवाते हैं.

आज हमारे सामने दो विकल्प हैं, या तो केंद्र सरकार पर युद्ध करने का दबाव बनाएं जैसा कंधार काण्ड के समय किया था…  या शान्त रहें… सरकार को अपना काम करने दें.

चुनाव हमको करना है… जिनको लगे कि वो शांत नहीं रह सकते हैं वो फेसबुक से थोड़ा समय निकालें… समाज में जा कर कुछ काम करें… मन भी शांत रहेगा और देश के विकास में कुछ कदम का योगदान भी होगा.

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