बेटे का साथ दें या भाई का, दुविधा में मुलायम, शिवपाल ने किया नई पार्टी का ऐलान

लखनऊ. हाल में सम्पन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शर्मनाक पराजय झेल चुके पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को एक और करारा झटका लगा है. अखिलेश के चाचा और राज्य के पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा नाम से नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है.

दिलचस्प बात यह है कि इस नई पार्टी के अध्यक्ष सपा के संस्थापक और संरक्षक मुलायम सिंह यादव होंगे, जो अखिलेश यादव के पिता भी हैं.

ऐसा करके शिवपाल ने मुलायम के लिए भी एक लक्ष्मण रेखा खींच डाली है कि या तो वे खुलकर बेटे अखिलेश के साथ आएं या फिर अपने अपमान के खिलाफ भाई शिवपाल के साथ आकर खड़े हो जाएं.

यानी अखिलेश के साथ ही शिवपाल ने मुलायम को भी कसौटी पर कसने की रणनीति चली है. फिलहाल इस घटनाक्रम पर मुलायम सिंह की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है.

इस मौके पर शिवपाल यादव ने कहा कि नेताजी के सम्‍मान के लिए नई पार्टी का गठन कर रहा हूं. अभी दो रोज पहले उन्‍होंने इटावा में इसके संकेत भी दिए थे. हालांकि उस दौरान उन्‍होंने सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव से कहा था कि वह इस पद को छोड़ दें और मुलायम सिंह यादव को राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष की कुर्सी सौंप दें.

उल्‍लेखनीय है कि यूपी चुनावों के बाद से इटावा के जसवंतनगर से विधायक और सपा के पूर्व प्रदेश अध्‍यक्ष शिवपाल यादव लगातार अखिलेश और पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव पर निशाना साध रहे थे.

शिवपाल शुक्रवार को पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात करने इटावा पहुंचे. उसके बाद अपने बहनोई डॉ. अजंट सिंह के घर मीडिया से मुलाकात कर नई पार्टी बनाने का बड़ा बयान दे दिया.

दो दिन पहले ही शिवपाल ने इटावा में अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव पर हमला बोला था और उन्हें शकुनि तक कह डाला था.

इससे ठीक चार दिन पहले मीडिया के सवालों और शिवपाल के बयानों से भड़क कर रामगोपाल ने कहा था कि शिवपाल यादव बेकार की बातें करते हैं. उन्होंने पार्टी का संविधान नहीं पढ़ा है. पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है. शिवपाल तो अभी तक सदस्य भी नहीं बने हैं.

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले से ही सपा परिवार में जबरदस्त घमासान मचा हुआ था. अखिलेश ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव को पार्टी में किनारे कर दिया और रामगोपाल यादव की सहायता से पार्टी पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया था.

सपा को अपने मुट्ठी में करने में बाद अखिलेश ने कांग्रेस का साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह चारों खाने चित हो गए.

नई पार्टी के ऐलान से शिवपाल एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की है. शिवपाल के इस कदम से अखिलेश को या तो सपा में ही चाचा शिवपाल को बड़ा पद देकर संतुष्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा या फिर पार्टी में टूट झेलने के लिए तैयार रहना होगा.

दूसरी तरफ नवगठित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर मुलायम का नाम आगे कर शिवपाल ने मुलायम समर्थक वोटरों को भी अपने पाले में करने का दांव चला है.

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