‘उन’ के लिए ये लड़ाई नहीं, इबादत है, जिसमें मर जाना फ़ख्र की बात

कुछ लोग इज़रायल के उदाहरण देते हैं कि छोटा सा देश हो कर भी उसने आतंकवाद पर काबू पा लिया. भारत इतना बड़ा देश है और मोदी जी प्रधानमंत्री हैं, फिर भी तीन साल हो गए पाकिस्तान को काबू में नहीं कर पाए हैं.

छोटे से श्रीलंका ने लिट्टे को खत्म कर दिया पर मोदी जी कश्मीर को नहीं सुधार सके, जबकि उनके पास तो प्रचण्ड बहुमत के साथ-साथ जम्मू-काश्मीर में सरकार भी है.

भाई ऐसा है कि…. मोदी जी को तो कुछ आता-जाता है नहीं… घूमने और बोलने के अलावा करते ही क्या हैं वो!

परंतु इज़रायल बहुत आक्रामक तेवर रखता है, जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता है, अपने दुश्मनों को चुन-चुन कर मार देता है.

इसके बाद भी एक बात कोई बता सकता है क्या…. फिलिस्तीन ने इज़रायल को परेशान करना छोड़ दिया है?

इज़रायल एक मौत के बदले फिलिस्तीन के अस्पताल और रिहायशी इलाकों में भी मिसाइल दागने से परहेज नहीं करता है, इसके बाद भी आए दिन फिलीस्तीन इज़रायल में आतंकी घटना को अंजाम देता रहता है.

पत्थरबाजों को कुचल देने मार देने के बाद भी पत्थरबाज़ी वहाँ होती ही है… आखिर क्यों? इस पर भी कभी विचार तो करिए ज़रा…

इज़रायल जैसा एक्शन भारत से चाहते हैं… चलो मान लेते हैं कि भारत वैसा ही करने लगेगा तो इज़रायल बनने की पैरवी करने वाले गारण्टी लेंगे… पाकिस्तान सुधर कर नापाक हरकतें बंद कर देगा?

चार-चार युद्धों में मुँह की खाने के बाद भी जो न सुधरा वो कभी नहीं सुधरेगा… पाकिस्तान और फिलिस्तीन का एक ही डीएनए है… दोनों कुत्ते की पूँछ है जो कभी सीधी नहीं ही सकती है…

इनके बच्चे-बच्चे के मन मे नफरत बैठी हुई है और भारत या इज़रायल को नुकसान पहुँचाने के लिए किया जाने वाला हर काम उनके लिए देशभक्ति और धर्म का काम है.

हम अपनी रक्षा करने के लिए लड़ते हैं… वो मजहब के लिए लड़ते नहीं हैं इबादत कर रहे होते हैं जिसमें मर जाना भी फख्र की बात होती है.

पाकिस्तान का क्या किया जाए, इसका उत्तर बहुत मुश्किल है… लड़ कर, डाँट कर, धमका कर, प्यार दिखा कर… सब करके देखा जा चुका है… परिणाम ढाक के तीन पात वाले ही रहे हैं.

अब एक ही उपाय समझ में आ रहा है कि पाकिस्तान को विश्व पटल पर अलग-थलग कर दिया जाए… परंतु इसको करना इतना सरल नहीं है जितनी सरलता से हम लिख या बोल लेते हैं.

सरकार इसके लिए प्रयासरत है, परिणाम सामने आने में समय लगेगा… हम फास्टफूड युग के प्राणी हैं इसलिए हमको तुरंत परिणाम चाहिए होता है…

एलोपैथी दवा खा कर रोग को दबा देने को ही हम उपचार समझते हैं… आयुर्वेदिक दवा खा कर रोग को जड़ से खत्म करवाने का धैर्य हममें नहीं है.

हमको तो सिर्फ सर दर्द बंद करना है, सर दर्द होने का कारण भी नहीं जानना है, ना ही उसको ठीक करने का प्रयास करना है.

चाहे पेनकिलर खा-खा कर भविष्य में लिवर-किडनी ही क्यों न खराब हो जाए…. तत्काल तो राहत मिल गयी न…

भारत को पाकिस्तान पर आक्रमण कर देना चाहिए… यदि आक्रमण नहीं कर रहे हैं तो 56 इंच का सीना नहीं है…

अच्छा ठीक है, आक्रमण नहीं करना है तो कम से कम एक-दो मिसाइल ही दाग दें पाकिस्तान पर… तब हम लोगों को विश्वास होगा कि मोदी जी सही काम कर रहे हैं नहीं तो मनमोहन सिंह ही ठीक थे…

वैसे केजरीवाल ज्यादा अच्छा है ट्वीट करके ही पाकिस्तान को डरा देगा… मोदी जी से तो पाकिस्तान के विरुद्ध ट्वीट भी नहीं होता है….

बेकार सरकार है ये… ना तो इनके मंत्री कुछ काम कर रहे हैं ना ही प्रधानमंत्री ही… इनसे कुछ नहीं हो रहा है तो सोशल मीडिया से ही कुछ सक्षम लोगों को मंत्री और प्रधानमंत्री बना दें.

सोशल मीडिया शूरवीरों के आते ही एक महीने में ही देश की तस्वीर और तकदीर दोनों में परिवर्तन हो जाएगा… चीन, पाकिस्तान तो दो दिनों में ही घुटने टेक देंगे… पंद्रह दिनों में अमेरिका हाथ जोड़े हमारे सामने खड़ा मिलेगा… आईएसआईएस सामूहिक आत्महत्या कर लेगा और देश के अंदर राम राज्य स्थापित हो जाएगा.

मोदी जी आप तो इस्तीफा दे दीजिए…. आपसे कुछ नहीं होगा… आपका मौन लोगों को उद्वेलित कर रहा है…

सिर्फ इतना बता दीजिए कि पाकिस्तान को “मोस्ट फेवर्ड नेशन” बनाए रखने की क्या मजबूरी है?

वैसे आपके उत्तर के पहले का मौन सार्थक ही रहा है अभी तक तो… उत्तर की उम्मीद इस बार कुछ ज्यादा की है.

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