जंगलों में बैठे माओवादी कमाण्डर को हैंडल करने वाले शहरी माओवादी

पहले एक बार फिर ये जान लें कि नक्सली माने नक्सलबाड़ी के रहने वाले जैसे भारत के भारतीय, चीन के चीनी, इंग्लैंड के अँगरेज़… नक्सलबाड़ी और नक्सली लोगों से बस्तर डिवीज़न में जो हो रहा है उसको न जोड़ें…

नक्सलबाड़ी के नक्सली भाई लोग जय श्रीराम, वन्दे मातरम और भारत माता की जय बोल रहे है… वो हर राष्ट्रवादी के साथ उसके बराबर से खड़े हैं… नक्सलबाड़ी के हमारे भाई लोग बस्तर डिवीज़न के सुकमा और दंतेवाड़ा में लाल आतंक मचाये लोगों को नक्सलवादी कहने से खफा है… बस्तर के लाल आतंकियों को माओवादी बोलिये…

जंगलों में शहरी माओवादियों के गुण्डे बैठे हैं… भाड़े के टटू हैं वो… इन भाड़े के टट्टुओं के हैंडलर शहरों में है… शहरी माओवादियों और तस्करों को पहचानिये… इनको उजागर कीजिये… इनकी गर्दन नापिये…

सीताराम येचुरी, डी राजा जैसे लोग संसद में…

गोपाल राय – दिल्ली सरकार में मंत्री, ये पिछले एक वर्ष में 5 बार बस्तर गया है,

आशुतोष कुमार, नंदिनी सुंदर (ये ऋचा केशव के नाम से बस्तर में जाती है) और साईबाबा जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में,

विनीत तिवारी – जोशी अनुसंधान संस्थान,

संजय पराते – CPI (M) का छत्तीसगढ़ का सचिव

अप्पा राव – आंध्र विवि,

बालकिशन रविदास — भागलपुर विवि,

अर्चना प्रसाद, जयति घोष और निवेदिता मेनन जैसे 15 लोग जवाहरलाल नेहरू विवि (JNU) में…

जाधवपुर विवि में कम से कम 26 लोग

बस्तर के गांव वालों ने जो कि कुमाकोलेंग, सुतार और नामा गाँव के लोग हैं, JNU, DU और अन्य जगहों के इन प्रोफेसरों और कई NGO वालों के खिलाफ नामजद FIR कराई है कि ये लोग आये थे और धमकाया कि जंगल के माओवादियों की मदद करो वरना कोई प्रशासन तुम्हे नहीं बचा पाएगा,

ग्रामीणों के मुताबिक़, इन लोगों ने बच्चों को उठा ले जाने, लड़कियों का बलात्कार करवा देने और लोगों को मरवा डालने का भी धमकी दिया है… इन गांववालों ने ये भी बताया कि वो एकजुट होकर इन माओवादी लाल आतंकियों के खिलाफ खड़े हैं..

इन्होने लिखित में बताया कि ये लोग माओवादी लोग आते हैं उनके घरों से राशन लूटते हैं, उनको पीटते हैं अक्सर छोटे बच्चों को उठा ले जाते हैं…

ध्यान रखिये कि बस्तर का जंगलों में रहने वाला आदिवासी हिंसक नहीं है, वो जंगल में आराम से या बाहर मुख्यधारा में आकर बाकी देशवासियों के साथ आराम से रहना चाहते हैं,

उनकी जिंदगी इन शहरी माओवादियों ने अपने जंगल में बैठा रखे गुंडों के साथ मिलकर तबाह कर रखी है…

इस शहरी माओवादियों को तबाह कीजिये… बस्तर का सुकमा, कांकेर और दांतेवाड़ा भी नक्सलबाड़ी की तरह तिरंगे के नीचे खड़ा होने को तड़प रहा है…

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