महर्षि कणाद : जिनके प्रथम परमाणु विस्फोट प्रयोग से बनाये गए दिव्यास्त्र

वैशेषिक दर्शन (Vaisheshika Sutra) के रचनाकार महर्षि कणाद लगभग 6000 BC के पूर्व प्रभास क्षेत्र द्वारका के निकट गुजरात में जन्मे.

दुनिया को पहला परमाणु का ज्ञान देने वाले भी ऋषि कणाद ही है. इन्हीं के नाम पर परमाणु का एक नाम कण पड़ा. वैशेषिक दर्शन में इन्होंने गति के लिए कर्म शब्द प्रयुक्त किया है.

इसके पांच प्रकार हैं यथा :
उत्क्षेपण (upward motion)
अवक्षेपण (downward motion)
आकुञ्चन (Motion due to the release of tensile stress)
प्रसारण (Shearing motion)
गमन (General Type of motion)

विभिन्न कर्म या motion को उसके कारण के आधार पर जानने का विश्लेषण वैशेषिक में किया है.
(१) नोदन के कारण-लगातार दबाव
(२) प्रयत्न के कारण- जैसे हाथ हिलाना
(३) गुरुत्व के कारण-कोई वस्तु नीचे गिरती है
(४) द्रवत्व के कारण-सूक्ष्म कणों के प्रवाह से

Dr. N.G. Dongre अपनी पुस्तक ‘Physics in Ancient India’ में वैशेषिक सूत्रों के ईसा की प्रथम शताब्दी में लिखे गए प्रशस्तपाद भाष्य में उल्लेखित वेग संस्कार और न्यूटन द्वारा 1675 में खोजे गए गति के नियमों की तुलना की है.

महर्षि प्रशस्तपाद लिखते हैं –
‘वेगो पञ्चसु द्रव्येषु निमित्त-विशेषापेक्षात्‌ कर्मणो जायते नियतदिक्‌ क्रिया प्रबंध हेतु: स्पर्शवद्‌ द्रव्यसंयोग विशेष विरोधी क्वचित्‌ कारण गुण पूर्ण क्रमेणोत्पद्यते.‘
अर्थात्‌ वेग या मोशन पांचों द्रव्यों (ठोस, तरल, गैसीय) पर निमित्त व विशेष कर्म के कारण उत्पन्न होता है तथा नियमित दिशा में क्रिया होने के कारण संयोग विशेष से नष्ट होता है या उत्पन्न होता है.

उपर्युक्त प्रशस्तिपाद के भाष्य को तीन भागों में विभाजित करें तो न्यूटन के गति सम्बंधी नियमों से इसकी समानता ध्यान आती है.

(१) वेग: निमित्तविशेषात्‌ कर्मणो जायते
The change of motion is due to impressed force

(२) वेग निमित्तापेक्षात्‌ कर्मणो जायते नियत्दिक्‌ क्रिया प्रबंध हेतु
The change of motion is proportional‌ to the motive force impressed and is made in the direction of the right line in which‌ the force is impressed

(३) वेग: संयोगविशेषाविरोधी
To every‌ action there is always an equal‌ and opposite reaction

महर्षि कणाद ने प्रथम परमाणु विस्फोट किया जिनसे आगे चल कर दिव्यास्त्र बनाये गए.
इसकी विस्तृत चर्चा अगले लेख में की जायेगी.

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