दुश्मनों का ‘सिर’ भी जरुरी है तो अपनों के ‘खाली पेट’ की चिंता भी!

पिछले 3 दिन अनूठे थे. शायद ही पिछले 14 सालों में मोदी साहेब को इतना गरियाया गया हो, कोसा गया हो. कारण सुकमा और हाल में कश्मीर में सैनिकों की शहादत और उस पर हिमाचल में मोदी जी की चुनावी बिगुल फूंकना, रोड शो, 19000 का पैकेज और लंबा चौड़ा भाषण हवाई सेवा और विकास के बाबद!

खैर, जिन्होंने गरियाया, वो अपनी जगह सही है आखिर वो नए नए भाजपाई और भक्त जो बने हैं, सो उनका कोसना बनता है!

अब, रही बात हम जैसे घिसे हुए पुराने भक्तों की…….
तो साब…. हम तो उनके टाइम टेस्टेड नीरे भक्त जो ठहरे……

हम मोदी साहब की कार्यशैली से भली भांति परिचित है…  सैनिकों की शहादत से मोदी जी संभवतः सबसे ज्यादा दुखी होंगे लेकिन शहादत के कारण पूर्व नियोजित कार्यक्रमों का सांकेतिक तर्पण कहाँ तक सही है? ये उस व्यक्ति से तो उम्मीद ही नहीं कर सकते जिसका अंश अंश देश के विकास, पुनर्निर्माण, रोजगार, सुरक्षा और स्वास्थय के प्रति समर्पित हो!

शहादत हुई, घोर निराशा जनक है लेकिन विकास योजनाओं की आधारशिला जिसके मूल में रोजगार और नागरिक सुविधा हो उसे नाजायज कैसे ठहराया जा सकता है.

हवाई सेवा का लोकार्पण, एक नई हवाई यात्रा की विशिष्ठ सोच रोज़गार के नए मौके तय करेगी, 19000 करोड़ का पैकेज कश्मीर में नई ऊर्जा का संचार करेगी….. और रही बात चुनावी प्रबंधन की तो क्या गलत है उसमे अगर मोदी जी शिमला में रोड शो करते है!

अंतिम बात…. आप ये क्यों भूल रहे है कि आगामी इसराईल दौरा कश्मीर में सेना की आगामी तैयारी के सिलसिले में कितना महत्वपूर्ण होने जा रहा है!

1 के बदले 10 सिर का कहा था न……. आप भरोसा रखिये….. 1 के बदले 100 मिलेंगे…….!!!

दुश्मनों का ‘सिर’ भी जरुरी है तो अपनों के ‘खाली पेट’ की चिंता भी जरुरी है…….. मोदी साब…. फ़िलहाल गरीबों, और बेरोज़गारों के ‘ खाली पेट’  की चिंता कर रहे हैं !!!

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