फिलहाल तो सरकार भी इस दिशा में कुछ करते नहीं दिख रही

मेरे एक सीनियर(ex colleague) हाल ही में तंज़ानिया शिफ्ट हुए हैं, अपनी फेसबुक वॉल पर अक्सर वहाँ के न्यूज़ पेपर की कटिंग्स लगाते रहते हैं, जिसमें तंज़ानिया से जुड़ी सकारात्मक खबरें होती हैं.

मसलन तंज़ानिया के वैज्ञानिकों ने हाल ही में प्रोस्टेड कैंसर का इलाज खोज लिया, तंज़ानिया में उद्योग लगाना या काम करना कितना आसान है, वहाँ के लोग खुश रहते हैं, टूरिज़्म बढ़िया है, वगैरह वगैरह…

अभी परसों उन्होंने एक न्यूज़ लगाई कि नई दिल्ली में एक तंज़ानिया के नागरिक के साथ लाखों रुपयों की लूट हो गई है, जिससे उन्हें बेहद शर्मिंदगी महसूस हुई.

स्वाभाविक सी बात है कि वे खुद के भारतीय होने पर गर्व करते हैं, वहाँ किसी से भी भारत के गौरव पूर्ण अतीत और यहाँ की संस्कृति के बारे में बतलाते होंगे. उसी बीच ऐसी खबरें उन्हें कितना ना नीचा दिखाती होंगी… तंज़ानिया के लोगों के सामने.

तभी में सोचने लगा कि एक ये छोटा सा देश और उसका मीडिया है जो अपने देश की छवि के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा है जबकि उसके पास दिखाने बतलाने के लिए भारत की तुलना में कितना है?

पर यहाँ के मीडिया की खबरें देखकर जहाँ मुंह से केवल गाली निकलती हैं तो तंज़ानिया जैसे देश की खबरें पढ़कर प्रसन्नता होती है कि कितना जिम्मेवार मीडिया है वहाँ का… ख़ैर.

अख़बार, मीडिया या न्यूज़ चैनल चाहें तो किसी भी देश की छवि बना और बिगाड़ सकते हैं, तंज़ानिया कैसा देश है, वहाँ क्या होता है मैं कुछ नहीं जानता पर जिस तरीके से अलग-अलग अख़बार तंज़ानिया के बारे में खबरें छापते हैं उससे तंज़ानिया की कहीं ना कहीं मेरे मन में एक अच्छी छवि ही बन रही है.

वहाँ के मीडिया के लिए तो विशेष सम्मान भर गया है. कितना चिंतित दिखता है अपने देश के नागरिक के साथ हुई लूट के लिए कि उसे फ्रंट पेज पर छापता है, साथ ही सकारात्मक खबरें छापकर अपने देश की छवि बना रहा है.

क्या वहाँ हत्याएँ, लूट, बलात्कार, मज़हबी फसाद और भेदभाव नहीं होते होंगे? निश्चित होते होंगे, हर देश में होते हैं पर उनसे निपटने का तरीका अलग होता है.

भारत के वामपंथी मीडिया का चरित्र उस स्त्री जैसा है जिसकी जाँघ में चोट लग जाने पर वह हर आने जाने वाले को उघाड़कर दिखाती रहती है बजाए डॉक्टर के पास जाने के, समझने में ज़रा भी देर नहीं लगती कि ये इलाज चाहती है या ग्राहक खोज रही है? ख़ैर.

प्रशासन, कानून के रखवाले और मीडिया अपनी ज़िम्मेवारी समझ लें तो कोई भी देश हीरो बन सकता है…. पर भारत एक ऐसा अभागा देश है कि लाख अच्छाई हो पर एकाध घटना को इतनी बार उघाड़ उघाड़ कर दिखाया जाता है कि मन में केवल और केवल निराशा और नकारात्मकता ही आती है…. सरकार भी इस दिशा में फिलहाल तो कुछ करते नहीं दिख रही आगे राम जाने.

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