मत चूको साहेब, निकला समय फिर लौट के नहीं आता

समय बलवान होता है व्यक्ति नहीं… यह कटु सच इस हद तक है कि कंस का वध करने वाले श्रीकृष्ण भी जीवन के अंत में एक समय बेहद कमजोर और असहाय हो गए थे. ऐसी मान्यता है.

वैसे भी वो विष्णु अवतार जरूर हैं मगर थे तो मानव रूप में ही, तो फिर समय से आगे कैसे जा सकते थे.

इसलिए हमारे शास्त्रों में शिव सर्वशक्तिमान हैं क्योंकि वो महाकाल हैं, अर्थात समय हैं. यह समय ही है जो राजा को रंक तो किसी को जमीन से उठाकर सिंहासन पर बैठा देता है.

यह 2014 ही था जो आप जीते थे. अगर पहले दिल्ली आते तो शायद नहीं जीतते. तब से आप जीत रहे हैं. क्योंकि ये समय है आप के जीतने का.

यह समय ही है जो विपक्ष कमजोर, भ्रमित, भ्रष्ट और बिखरा है. यह समय ही है जो उत्तर प्रदेश ऐसे हाथों में था जहां कुशासन था और आप जीते.

समय का यह कमाल देखिये कि आज उसी दिल्ली में आप जीते जहां 2015 में बुरी तरह हारे थे. दो साल में क्या बदला?

आप भी वही हैं विपक्ष भी वही है, बस परिस्थितियाँ बदल गयीं. अर्थात समय बदल गया, और यह समय आप के पक्ष में है.

आगे भी जीत का यह सिलसिला जारी रहेगा, ऐसा समय बता रहा है. यह समय ही तो है जो अब तमिलनाडु में जयललिता नहीं हैं. यह समय ही है जो उड़ीसा में पटनायक अपनी पारी खेल चुके हैं.

यह समय ही है जो ममता यह समझने को तैयार नहीं कि उनकी तुष्टीकरण की नीति की अति हो चुकी है. यह समय ही है जो वामपंथ अपनी अंतिम साँसे गिन रहा है.

अर्थात समय ने बंगाल से लेकर उड़ीसा, तमिलनाडु, केरल का मैदान आप के लिए तैयार कर रखा है.

यह समय ही है कि देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी का नेतृत्व एक कमजोर के हाथ में है.

जब समय आपके साथ हैं तो अभी तो आपको और भी कई चुनाव जीतने हैं.

समय अच्छा चल रहा है, ऐसा हमारे लोक जीवन में एक कहावत है. और आप का ये समय स्वर्णिम है.

लेकिन समय बड़ा चंचल है किसी एक के साथ सदा के लिए रहता नहीं, एक जगह कहीं ठहरता भी नहीं. समय तो कभी नहीं हारता, हाँ समय के जाते ही मनुष्य जरूर हारते हैं.

इसके पहले कि समय आप का साथ छोड़ कर किसी और के साथ चले जाये, कर जाइये कुछ ऐतिहासिक काम.

क्योंकि समय खुद कभी नहीं दर्ज होता बल्कि इतिहास के पन्नो में जगह पाते हैं महान काम. जो फिर कर जाते हैं काम करने वाले को अमर.

श्री कृष्ण क्यों याद किये जाते हैं, सिर्फ इसलिए नहीं कि उन्होंने महाभारत के युद्ध को जीतने में अहम भूमिका अदा की थी.

युद्ध तो कई राजा जीतते रहते हैं. लेकिन महाभारत के साथ श्री कृष्ण इसलिए अमर हो गए क्योंकि इस युद्ध ने हस्तिनापुर में धर्म की स्थापना की थी और श्रीकृष्ण इस युद्ध के महानायक थे.

यही काम श्रीकृष्ण ने कश्मीर में भी किया था. जब वहां का राजा गोनंद और उसका बेटा दामोदर, दोनों जरासंध की ओर से लड़ते हुए श्री कृष्ण के हाथों मारे गए थे.

तब धर्म की स्थापना के लिए श्री कृष्ण ने खुद कश्मीर जाकर दामोदर की पत्नी यशोमती को वहाँ की राजगद्दी पर बिठाया और उनका राज्याभिषेक अपने हाथो से किया.

आज वही कश्मीर पिछले कुछ समय से एक बार फिर अधर्म के कब्जे में है. लेकिन हस्तिनापुर पर तो आप का शासन है तो जाइये करिये कश्मीर में धर्म की स्थापना, इतिहास आप को आने वाले सैकड़ों साल के लिए अमर कर देगा.

अन्यथा चुनाव-युद्ध जीतने वाले कई शासक आये और समय के हाथों पराजित हो कर भुला दिए गए.

इनमें से कइयों ने अपने राज्य में सड़क, धर्मशाला, तालाब बना कर विकास भी खूब किया होगा, मगर इतिहास सुशासन भर को स्वर्णाक्षरों से नहीं लिखता, उसके लिए चाहिए ऐतिहासिक काम जो असामान्य हों.

इस देश का शीश कश्मीर पिछले कई दशकों से लहूलुहान है और अपने उपचार की प्रतीक्षा में है.

समय सिर्फ व्यक्ति का ही नहीं होता राष्ट्र का भी आता है. और ऐसा साफ़ नजर आता है कि यह समय भारत का है. ये समय कई सदी के बाद भारत के पक्ष में आया है, इसे यूं ही बीत ना जाने दें!

इस बार तो श्री राम के वनवास को भी पांच सौ साल हो गये. अब यही सही समय भी है श्रीराम के अयोध्या लौटने का. उनका वनवास कलयुग में लंबा खिंच गया.

महाकाल ऊपर बैठकर मुस्कुरा रहे हैं. समय ने अपने आप को थाली में परोस कर आपको दिया है.

हिन्दुस्तान दशहरा मनाने को बेक़रार है. समय को इंतज़ार है तो बस इतना कि रावण पर कब ब्रह्मास्त्र फेंका जाता है.

मत चूको साहेब, समय निकल गया तो फिर लौट के कभी नहीं आता.

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