बहुत ही खतरनाक है आगरा कांड पर चुप्पी

संघ और भाजपा के नेताओं की आगरा कांड पर चुप्पी बहुत ही खतरनाक है…. वे नहीं पूछ रहे कि मेडिकल कराने के बाद थाने ले जाकर उनके लड़कों की बर्बर पिटाई क्यों की गयी?

आखिर क्या उनके लोग थाने को लूट रहे थे? क्या किसी पुलिसिए को आग में झोंक रहे थे? हथियार तो उनके पास थे नहीं, और बिना हथियार के तो केवल आग में झोंक कर ही मारा जा सकता है…

क्यों लकवा मार गया सबकी जुबान को?

अंतत: क्या 11 मार्च के बाद फतेहपूर सीकरी व आगरा पुलिस का कोई शुद्धिकरण यज्ञ हो गया था, जो अखिलेश यादव की पुलिस यूं देव अवतार मानी जा सके….

और इस कांड में शामिल लोग अभी कल तक मतलब 8 मार्च तक ही संघ और भाजपा की आँखों के नूर थे…. कमाऊ पूत थे….

वे क्या रातों रात खलनायक बन गए? लुटेरे-माफिया हो गए!

आखिर कोई भी अमित शाह जी की भाजपा, या संघ के न्यायप्रिय नेता योगी आदित्यनाथ जी, उत्तरप्रदेश पुलिस का उच्चाधिकारी एक भी उदाहरण दे सकता है कि मामूली सी आर्थिक स्थिति के ये लोग जिनके लिए उनकी बाइक किसी BMW से कम हैसियत की नहीं होती, वे थाने पर डकैती डालने… पुलिस कर्मियों को पीटने-लूटने के लिए जाते समय अपनी उन बाईक्स को सीधे थाने पर ले जाकर ही खड़ा करते हों…

संघ और भाजपा के नेतागणों! गालियां तो बहुत हैं आपके प्रति मेरे और मेरे जैसे ना जाने कितनों के मन में, लाचारी भरी बददुआएं भी हैं… उन्हें लिखूँ ना लिखूँ लेकिन मैं नपुंसक तो कह ही सकता हूँ…

अंततः आप लोग राजकाज भोगो…. और जिन कंधों पर चढ़ कर आप लोग राजमहल पहुंचे हो…. उन कहारों का ये भी अधिकार नहीं कि उनके अपने बहुत छोटे से ही क्षेत्र में कोई पुलिसिया उनको थोड़ा सा सम्मान भी दे सके….

इस किंचित सम्मान से अंततः कोई चक्रवर्ती सम्राट तो बन ही नहीं जाता, हाँ राजकाज के हिस्से बनने की भावना से उत्तरदायित्व का भाव अवश्य पैदा हो जाता है…

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