फिर से शुरू करो सलवा जुडूम

नक्सली… मानवाधिकार… सुरक्षा बल…. नेता… मोदी… राजनाथ… डोभाल… ये दोषी… वो दोषी… ऐसा हुआ, वैसा हुआ… उफ़ तुम झूठे… तुम OK… क्या कर रहा 56 इंच वाला… राजनाथ नहीं खाजनाथ… डोभाल माने बकरा का मेमना…

नक्सली हमले के बाद लोग बातें कर रहे थे… गुस्से में लाल-पीले थे… भुजाएँ पिलपिला रही थी… अंगारे दहक रहे थे…

एक बोला : चल मूर्ख, तुझे क्या पता, मैं एक बार ट्रेन में बैठकर भिलाई गया था. कुछ लोग दिखे काले-काले, ऊबड़खाबड़ मूंछ-दाढ़ी… मैने पूछा लोगों से ये कौन हैं, तो बोले ये छत्तीसगढ़ी हैं… नक्सलवादी हैं… हर तरफ नक्सली ही नक्सली… बंदूके नहीं दिखी थी, जंगल में छुपा के आये थे…

दूसरा बोला : और हां अखबार में लिखा था एक बार बिलासपुर में पढ़ा था… नक्सली बड़े जालिम होते हैं… मारो सालों को जंगल में घुस के…

तीसरा बोला : तुम क्या जानो बे, मैं 5 दिन था जंगलों में… मैं बताता हूँ क्या है नक्सली… ये खाकी कपड़े, बन्दूक गोली…

दूसरा बोला : अरे बेवक़ूफ़ वो पुलिस वाले थे… आर्मी की ड्रेस में होते है नक्सली…

चौथा बोला : ओह अच्छा… मैंने देखा है उनको जैसलमेर में…

तीसरा टपका : अरे धत्त… वो सच के फौजी थे…

पांचवा बोला : मैंने पढ़ा है बहुत इनके बारे में, मार्क्स और माओ ने लिखा है, मैंने ग्वेरा और कास्त्रो की जीवनी से भी सीखा है इनके बारे में, पर तुम लोग को समझ न आएगा मूरख हो।

छठा बोला : सेना भेज के नक्सलियों को मार देना चाहिए…

सातवाँ बोला : पहचानोगे कैसे…

छठा बोला : आसान है, दुबले-पतले, गरीब, खाने को न हो और जंगल में रहता हो वही नक्सली होता है। (ई तो साला मंगरुआ को झूठ में मरवाएगा).

आठवां बोला : नक्सली के पास चाइना का गन होता है, जंगल में चाऊमीन खाता है। उसके पास सब आराम है, चाइना के शह पर करता है।

नवा बोला: गाँधी जी को भेज देते बस्तर, अगर होते तो…

कुछ ऐसा ही हो रहा है हर जगह – TV पर, अखबारों में, फेसबुक पर… एक जनाब को जानता हूँ जिनको लखनऊ से कानपुर जाने में पेचिश पड़ जाता है… कल शाम से ले दनादन नक्सलवाद समस्या और समाधान पर रेलमपेल मचाये है FB पर…

कोई जापान, कोई अमेरिका और कोई Hong Kong में बैठ कर धरपकड़ मचाये है… चलो ठीक है, कल-परसों कोई काण्ड आने ही वाला है इस मुद्दे को छोड़ आगे बढ़ जाएँगे और फिर चालू करेंगे नए काण्ड पर एक्सपर्टबाज़ी… तब तक…

असलियत… नक्सली जंगलों में नहीं हैं बे… वो सिर्फ ऑपरेशन के लिए आते हैं… ये कोई भी हो सकते हैं पान की गुमटी वाला, चाय वाला… आपके घर की झाड़ू पोछे वाली… ऑटो चलाने वाला…

इनको सबको इकठ्ठा करके ऑपरेशन कराने वालों को मार डालना जरूरी है… ये रुकेंगे अगर बेला, सोनी सोरी, गोपाल राय जैसों को पेल दिया जाए… कोबाड गाँधी से किसी को मिलने न दो या उड़ा दो साले को… प्रो साईबाबा को पेल डालो…

इस तरह के लोग हैं अब इन नक्सली हमलों की जड़… ये साले स्पांसर हैं और नक्सलियों के स्लीपर सेल को मैनेज करते हैं… पता नहीं सरकार इस पर कमजोर क्यों है… रमन सिंह का भी बहुत हो गया… इनको बदलो… सलवा जुडूम फिर से शुरू करो.

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