संघी बनो या न बनो, लेकिन ‘हिन्दू’ ज़रूर बनो

एक शांतिदूत बुद्धिजीवी के यहाँ भटकते-भटकते पढ़ने को मिला कि… “JMM (झारखण्ड मुक्ति मोर्चा) वाले भी संघी होते हैं.”

इनके कहने का तात्पर्य समझ गया था… इन्होंने कहीं पे JMM वाले को ‘हिन्दू’ की बात करते हुए देखा होगा… हनुमान जी का झंडा घुमाते हुए देखा होगा.. कहीं झड़प हुई होगी तो उनको वहां उछलते-कूदते हुए देखा होगा!!

और जब इन्होने ऐसा देखा होगा तब इन्हें बहुत चोट पहुँची होगी… और तब अंत में ये राय बनाई होगी कि JMM वाले भी संघी होते हैं.

यहाँ संघी होना मतलब संघ का कोई आधिकारिक सदस्य होना नहीं है… बल्कि आप मुसलमानों के प्रति विचार कैसा रखते हैं, क्या सोचते हैं, क्या करते हैं… वो आपको बताएगा कि आप संघी हो कि क्या हो?

JMM, JVM, कांग्रेस जैसी पार्टियों में जा के अगर हिन्दू एक्टिविटी और मुसलमानों के सम्बन्ध में कुछ दीगर राय रखते हैं तो आप संघी हो!! होना ये चाहिए था कि इन जैसी पार्टियों में आ के हिंदुओं को ‘खस्सी’ बन जाना चाहिए था.

शांतिदूत चाहे कोई भी पार्टी में रहे वो शांतिदूत ही रहता हैं, लेकिन हिंदुओं से अपेक्षा रखता है कि वो अपना वंध्याकरण करवा ले.

आज देश में केवल BJP और RSS से सम्बंधित पार्टी ही नहीं हैं और भी हैं… RSS के जन्म के पूर्व भी कोई हिन्दू संगठन जैसा चीज नहीं थे… लेकिन क्या तब भी हिन्दू आपके प्रति ऐसी सोच नहीं रखते थे? और क्या तुम भी हिंदुओं के प्रति ऐसा नहीं सोचते थे??

तुम्हारी करतूतों का विरोध करना और अपने (हिन्दू) समर्थन में आवाज उठाना ‘संघी’ होना होता है क्या?

किसी सेकुलर टाइप की पार्टी में शामिल हो के हिन्दू अपना ‘हिन्दू’ होना ही भूल जाए क्या?… तुम्हारी हरकतों को बस सहते जाये क्या??

तुम किसी मजहबी पार्टी में रहो या सेकुलर पार्टी में, रहते तो तुम शांतिदूत ही शांतिदूत हो लेकिन हिन्दू क्यों हिन्दू न हो??

हाँ सेकुलर पार्टियों ने हिंदुओं शक्तिहीन बनाने का काम किया है और तुम लोग चाहते हो कि हिन्दू ऐसा ही बना रहे और सेकुलरपने को मज़बूत करते रहे.. और इन सेकुलरों की पीठ पीछे तुम शांतिदूत अपना मजहबी कट्टरपन दिन-रात बढ़ाते रहो.

लेकिन अब हिन्दू थोड़े सुगबुगाने शुरू हुए हैं… चाहे किसी भी पार्टी में क्यों न हो थोड़े मुखर हो के सामने आ रहे हैं…

पार्टी विचारधारा से पहले हिन्दू खून उबाल मार रहा हैं… और तुम्हारे अनुसार हिन्दू का अपने हिन्दू होने का बोध होना ही आज ‘संघी’ होना हो गया हैं.

हाँ तो बेटा सुनो… अब ‘संघी’ हर पार्टी में घुस चुके हैं. और जन्म भी ले रहे हैं. और इनकी संख्या भी बढ़ती जा रही हैं.

वैसे मेरा मानना है कि संघ का उद्देश्य भी यही रहा होगा कि… “संघी बनो या न बनो.. लेकिन ‘हिन्दू’ जरूर बनो!”

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