शुक्र है कि एक प्रयोगधर्मी, नई सोच रखने वाला व्यक्ति है हमारा प्रधानमंत्री

वैट/ सर्विस टैक्स/ वो सभी टैक्स रजिस्ट्रेशन होल्डर ध्यान दें जो जीएसटी में माइग्रेट हो रहे हैं….

31 दिसबंर 2016 थी आखिरी तारीख अपनी वर्तमान टैक्स प्रणाली से जीएसटी में माइग्रेट करने की (हालांकि ये डेट बढ़ गई बाद में).

माइग्रेशन में कुछ नही करना था बस टैक्स विभाग से मिली प्रोविजिनल आईडी के साथ जीएसटी पोर्टल पर लॉग इन करके खुद को रजिस्टर करना था, आसान काम था, खुद घर पर ही कर लिया….

हालांकि मेरे जैसे छोटे व्यापारी ज्यादातर इन कामों के लिये अपने वकील और सीए पर निर्भर करते हैं जिसके लिए बहुत छोटी रकम खर्च भी होती है.

एक मामूली वकील या सीए भी 1 हज़ार क्लाइंट रखता है और मेरे शहर (आगरा) में इस माइग्रेशन के 1500-2000 चार्ज किये गए, टोटल कैश, अनअकॉउंटेड.

हिसाब लगा लीजिये कि पूरे देश में कितना पैसा लोगों ने इकट्ठा करवा दिया इस मद में भाई लोगों के पास. हालांकि लेख का विषय नहीं.

जब मैंने माइग्रेशन पूरा किया तब वहां आखिरी साइन करके फाइनल करने का ऑप्शन था, पर वो ऑप्शन सिर्फ डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट, पहले से लागू है ऑडिट वाली फर्मो के रिटर्न के लिए) से ही हो सकता था.

वहां उसको छोड़ा और अगले दिन डीएससी के लिए अप्लाई किया. 2 साल की वेलिडिटी की डीएससी 1000-1200 रुपये में बनती है, बन गई और 2 दिन पहले उस फॉर्म को फाइनल भरने को जीएसटी पोर्टल खोला.

अब नया ऑप्शन वहां मौजूद था, ई साइन (E Sign), मतलब आपको अपना आधार नंबर साथ में देना है फॉर्म में, और आपके e sign पर क्लिक करते ही आपके आधार नम्बर से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक OTP (वन टाइम पासवर्ड) आएगा, उस OTP को वहां जीएसटी पोर्टल पर डालिये, उसने वेलिडेट किया और काम खत्म…

कमाल है, जिस काम के लिए लोग बरसों से डीएससी इस्तेमाल कर रहे थे, वो फ्री में और फौरन, सही है कि आधार योजना कांग्रेस की देन है, पर उसका उपयोग कहाँ और कैसे किया जा सकता है ये तो न कांग्रेस को पता था और न ही इसको विकसित करने वाले नीलकेणी साहब को.

एक महीने पहले पैन कार्ड भी सिर्फ आधार नंबर और OTP से बन के आ गया था बिना कोई फालतू खर्च हुए (पैन कार्ड फीस के 115 रुपये लगे थे) और फिजिकल कागज जमा किये.

भगवान का शुक्र है कि हमारा प्रधानमंत्री, एक प्रयोगधर्मी, नई सोच रखने वाला व्यक्ति है, जो मिट्टी से सोना बनाने में माहिर है, अलकेमिस्ट या कीमियागार जैसा.

आने वाले वक्त में न आपको कोई एप्प चाहिये होगा, न कोई कार्ड, बस आपका आधार नम्बर और उस पर रजिस्टर्ड मोबाइल, ये भारत के बदलने की शुरुआत है.

अभी तो बस 3 साल होने वाले हैं, और मोदीजी अभी 10 साल में और क्या-क्या बदल डालेंगे, मैं अनुमान तक नहीं लगा सकता… मैं हर हाल में मोदीजी के साथ हूँ और रहूंगा.

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