ISIS पर अमेरिका ने गिराया सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम, ट्रंप बोले- हमें सेना पर गर्व

वॉशिंगटन. अमेरिका ने गुरुवार को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ अबतक का सबसे बड़ा हमला बोला. अमेरिका ने अफगानिस्तान में आईएस की सुरंगों और टनल को निशाना बनाकर ‘सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम गिराया’.

इस बम को ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्स’ कहा जाता है. इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि यह सफल अभियान रहा और हमें सेना पर गर्व है.

अमेरिका द्वारा गिराए गए बम का वजन करीब 10 हजार किलो है. इसे अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में गिराया गया है, जो पाकिस्तान की सीमा के पास ही है.

अमेरिका ने पहली बार जीबीयू-43 बम का इस्तेमाल किया है. बताया जा रहा है कि ये बम खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस गुफाओं पर गिराए गए हैं. इस ब्लास्ट का रेडियस तकरीबन 300 मीटर बताया जा रहा है.

अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने पुष्टि करते हुए कहा कि स्थानीय समय अनुसार तकरीबन 7 बजे बम को एमसी-130 लड़ाकू विमान से गिराया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए सेना के इस अभियान को सफल बताया. ट्रंप ने कहा, ‘वास्तव में यह एक और सफल काम था. हमें हमारी सेना पर गर्व है.’

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना को पूरी आजादी दी जिसका नतीजा ऐसे सफल अभियानों के रूप में सामने आ रहा है. ट्रंप ने पिछले हफ्तों सीरिया पर हवाई हमले के आदेश और इस अभियान का हवाला देकर ओबामा के शासन पर भी निशाना साधा.

ट्रंप ने कहा कि पिछले 8 हफ्तों में जो कुछ हुआ अगर उसकी तुलना पिछले 8 सालों से की जाए तो आपको जबरदस्त अंतर दिखाई पड़ेगा. सीरिया में केमिकल अटैक का मामला सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमले का आदेश दिया था.

अमेरिका ने अफगानिस्तान में GBU-43/B मैसिव ऑर्डनंस एयर ब्लास्ट (MOAB) नाम का बम गिराया है. इस बम को ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्स’ यानी ‘सभी बमों की मां’ भी कहा जाता है. इसका वजन 21, 600 पाउंड यानी 9,797 किलो है. यह GPS से संचालित होने वाला विस्फोटक है. अमेरिका के हथियारों के जखीरे में काफी वक्त से शामिल इस बम का पहली बार इस्तेमाल किया गया है.

हालांकि अमेरिका के इस कदम की आलोचना भी शुरू हो गई है. अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने ट्वीट करते हुए कहा है कि यह बम आतंकवाद के खिलाफ नहीं बल्कि अफगानियों पर गिराया गया है.

उन्होंने इस घटना को अमानवीय बताते हुए लिखा है कि अमेरिका अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल अपने घातक हथियारों को टेस्ट करने के लिए कर रहा है.

अफगानिस्तान में सुरक्षा के हालात अभी भी अनिश्चित हैं. अमेरिका पिछले 15 सालों से अफगानिस्तान में तालिबान और अन्य आतंकी संगठनों से युद्ध की स्थिति में है. अफगानिस्तान में कई आतंकी संगठन अपना कब्जा जमाने की कोशिश में लगे हुए हैं. इस मुल्क में फिलहाल अमेरिका के करीब 8400 सैनिक जमे हुए हैं.

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