कल को कोई दलित सिनेमा, दलित कला, दलित पर्यटन, दलित संगीत होने की भी संभावना है क्या?

मेरे मन में बहुत दिन से ये जिज्ञासा है. एक बार, बहुत दिन पहले, मैंने बहुत डरते-डरते ये सवाल फेसबुक पर पूछा भी था.

उन दिनों मेरी लिस्ट में कुछ बड़े भारी -भरकम किस्म के साहित्यकार किस्म के लोग भी थे, पर उस समय किसी ने भी जवाब देना उचित नहीं समझा था.

आज फिर पूछ लेता हूँ.

ये भला स्त्री विमर्श क्या होता है? उसी प्रकार ये दलित साहित्य, दलित चिंतक या दलित विमर्श क्या होता है?

जैसे दलित साहित्य होता है क्या उसी प्रकार से सवर्ण साहित्य या फिर ठाकुर साहित्य, बाभन साहित्य या बनिया साहित्य भी है क्या? मने जैसे तेली साहित्य, खटीक साहित्य?

उसी प्रकार ये दलित चिंतक क्या होता है? माने अगर कोई दलित किसी दलित की चिंता करे तभी दलित चिंतक कहलायेगा?

या फिर मान लो कि कोई ठाकुर साहब या पंडी जी किसी दलित की चिंता करें तो वो भी दलित चिंतक कहलायेगा?

या इसको उलट देते हैं. कोई दलित यदि किसी बाऊ साहब की चिंता करे तो क्या यह भी दलित चिंतन कहलायेगा?

कल को कोई दलित सिनेमा, दलित art, दलित cuisine, दलित tourism, दलित music होने की भी संभावना है क्या?

मने कौनो बिसेस बात नहीं है…. मने बस अइसहीं पूछ रहे हैं…. मने जस्ट फॉर जनरल नॉलिज…. मने कल बाबा साहब का जन्म दिन है न इसलिए पूछ लिए.

वैसे सवाल मन में ये भी है कि जैसे बाबा साहब दलित समाज के registered महा पुरुष हैं न…. तो हम लोग भी उनका जन्मदिन मना सकते हैं न….

मने कौनो आब्जेक्सन नहीं न होगा किसी को? मने कोई stay वगेरा नहीं न ले लेगा कोई? मने हमरा महा पुरूस को छीन रहा है ई सवर्ण लोग….

मने हमरा पूछने का मतलब सिर्फ ये है कि मैं भी दलितों, महादलितों, पददलितों की बहुत चिंता करता हूँ…. मैं भी मुसहरों की चिंता में मरा जा रहा हूँ…. सो मुझे दलित चिंतक माना जायेगा या नही?

और हमरा फेसबुकिया साहित्य दलित साहित्य माना जायेगा या नहीं???

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