मत डरिये… मुसलमानों के आसपास भी नहीं हैं आप

अलवर की घटना (असली हो या फ़र्ज़ी) पर हिंदुओं को कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए? निंदा करनी चाहिए, जस्टिफिकेशन देना चाहिए, या समर्थन करना चाहिए?

अगर समर्थन करते हैं तो अमानवीयता का समर्थन करते हैं… हम मुस्लिम जिहादियों जैसे हो जाते हैं… यह एक वाजिब चिंता है…

पहले देखें, मुसलमान ऐसी किसी घटना पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं? एक खूब लिबरल मुसलमान किसी ऐसी घटना पर कैसी प्रतिक्रिया देता है…

समझदार मुसलमान अव्वल तो चुप रहता है… उसे पता ही नहीं होता कि ऐसा कुछ कहीं हुआ भी है… कहाँ? कब? किसने किया? पता नहीं क्या हुआ है? मुझे तो इन बातों से मतलब नहीं होता… चलो, सिनेमा क्या देखा वह बताओ…

पर ऐसा नहीं कि उन्हें दुनिया मे किसी बात से मतलब नहीं होता… पैदा हुए हैं हैदराबाद में, रहते हैं लंदन में… पर गाज़ा की फिक्र खूब होती है… चचेन्या में क्या हो रहा है यह ठीक ही पता होता है…

दूसरा मुसलमान धीरे-धीरे जागता है… अच्छा, ऐसा हो गया? सचमुच हुआ है क्या? कुछ हुआ भी है या यूं ही मीडिया वाले हल्ला करते हैं? दुनिया मे इतने मुसलमानों के साथ इतना अत्याचार होता है, इतने मुसलमान बच्चे… वो गोल गोल प्यारे प्यारे बच्चे बेचारे रिफ्यूजी बने हैं… उनकी तो खबर नहीं लेते… खैर, जो हुआ बुरा ही हुआ… बुरी बातें नहीं होनी चाहिए… और बताओ, इंग्लैंड-पाकिस्तान का ICC चैंपियंस ट्रॉफी का टिकट कैसे मिलेगा वो बताओ…

तीसरा ज्यादा सजग और उदार है… वह दीन दुनिया की खबर रखता है और दुखी रहता है… उसे पता है कि क्या हुआ, उसे और सिर्फ उसे ही पता है कि क्यों हुआ… यह सब सियासी साजिश है… इसका इस्लाम से लेना देना नहीं है… हम सबको मिलजुल कर रहना है… चलो, शाम को पब चलते हैं…

चौथा सचमुच दिलेर और दिलदार है… वह इस किसी भी घटना की मज़म्मत करता है… चाहे वह पेरिस में तालिबान का हमला हो, या हिन्दुस्तान में गुजरात में फ़िरक़ापसंद हिंदुओं का किया हुआ क़त्ले-आम हो, या फिलिस्तीन में इजराइल द्वारा बच्चों के स्कूल पर बम गिराया जाना हो… वह इस जुम्मे को मस्ज़िद में सबको कहेगा कि इंतेहापसन्दगी अच्छी बात नहीं है… और इस एक मास्टरस्ट्रोक से यह घटना इस्लामी आतंकवाद नहीं रहकर पूरी दुनिया मे फैलती इनटॉलेरेंस के यूनिवर्सल फिनोमना का भाग हो जाता है जिससे सबको मिल कर लड़ना चाहिए…

पाँचवाँ इसकी मज़म्मत करता है… पर उसे मालूम है, यह इंतेहापसन्दगी दरअसल अमेरिका की चली हुई और बढ़ाई हुई चाल है… जबतक अमेरिका इज़राइल को हथियार देता रहेगा, रूस चेचेन्या में मुसलमानों पर बम गिराता रहेगा, हिंदुस्तान काश्मीर में अत्याचार करता रहेगा… बेचारा मुसलमान क्या करेगा? उसके पास अमेरिका और रूस जैसी फौजें तो नहीं हैं… वह कैसे लड़ेगा?

और आखिर में छठा लिबरल मुसलमान सबसे दुखी है… उसका नुकसान सबसे पर्सनल और जेन्युइन है… ये नालायक ऐसी हरकतें करते रहेंगे तो उसको इंग्लैंड की सिटीज़नशिप कैसे मिलेगी… वीसा एक्सटेंड नहीं होगा… अबे नालायकों, थोड़ा रुक नहीं सकते… पहले मुझे लाल पासपोर्ट मिल जाने दो…

मुसलमान आपको किसी भी आतंकवादी घटना की मज़म्मत करते मिल जाएंगे… खूब मिलेंगे पर एक अगर और दो-तीन मगर के साथ… उनमें दो बातें कॉमन हैं – पहला, इसका इस्लाम से लेना-देना नहीं है… और दूसरा, यह किसी और की गलती है, किसी और अन्याय की प्रतिक्रिया है…

पर यह निंदा, यह विरोध सीमित है दूसरे देशों में, गैर इस्लामिक देशों में की हुई हिंसा तक… आपको किसी इस्लामिक देश में किसी गैर मुस्लिम के विरुद्ध हो रही हिंसा के लिए इतनी भी प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी… पाकिस्तान से हिन्दू कैसे गायब हो गए, इसकी इतनी भी सफाई या एक्सप्लेनेशन देता कोई मुसलमान नहीं मिलेगा…

तो अगर आपको यह डर है कि किसी दादरी या किसी अलवर की घटना से हम मुसलमानों, तालिबानों जैसे हो रहे हैं तो मत डरिये… आप उनके आसपास भी नहीं हैं… दूर-दूर तक कहीं नहीं हैं… अपने हित देखिये… सिद्धांत और मानवता की ओर दुनिया में कोई नहीं देख रहा..

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