शिक्षित होने की त्रासदी हमारी पीढ़ी की सबसे बड़ी त्रासदी

जीवन को जीने के लिए क्या चाहिए? मूलतः तीन चीजें – एक स्वस्थ शरीर, जो जीवन का वाहक है, एक प्रसन्न मन और विकसित बुद्धि, जो जीवन के सौंदर्य का आनंद ले सके, और भौतिक साधन… और इन तीनों का संतुलन…

एक स्वस्थ बलिष्ठ, बुद्धिमान व्यक्ति भी अगर अभाव में है तो क्लेश पायेगा. एक साधन संपन्न धनवान और बुद्धिमान व्यक्ति भी अगर व्याधिग्रस्त होगा तो क्लेश पायेगा. और एक सुंदर सुडौल हैंडसम और अमीर बंदा अगर मूर्ख या अहंकारी निकले तो नहीं झेला जाएगा.

शिक्षा का लक्ष्य होना चाहिए एक बच्चे को जीवन के इन तीनों क्षेत्रों में सक्षम बनाना. पर हमारी शिक्षा कितनी एकांगी हो गई है. बुद्धि, सुरुचि, सौंदर्य बोध तो हमारी शिक्षा में कहीं स्थान ही नहीं पाता.

कला के नाम पर भद्दा भोंड़ा बॉलीवुड, साहित्य के नाम पर सस्ता साम्यवाद… शारीरिक विकास का तो नाम ही नहीं लेना है. खेल कूद तो बदमाश लड़कों का काम है… चल, चुपचाप पढ़ाई कर… सामाजिकता और संस्कार का तो नाम भी लेना पाप है… इतिहास बोध और सांस्कृतिक सुरुचि तो पता नहीं किस चिड़ियाघर में पाए जाते हैं…

तो स्कूलों में हम जिंदगी बिता कर पाते क्या हैं? सिर्फ एक नौकरी की पात्रता… हमारी शिक्षा सिर्फ भौतिकता का लक्ष्य संधान कर रही है.

पूरा देश विज्ञान पढ़ रहा है तो इंजीनियर बनने के लिए, गणित पढ़ रहा है तो आई आई टी में जाने के लिए…इंजीनियर बन कर एप्पल या माइक्रोसॉफ्ट में जाना तो जैसे निर्वाण है…

बच्चा इतिहास पढ़ रहा है तो आंटी पूछेंगी आई ए एस बनना है? झुंड के झुंड मेडिकल की दौड़ में शामिल हैं… डॉक्टर बनना है… फिर बड़का डॉक्टर बनना है… बड़का डाक्टर माने भारी पिरेक्टिस… माने ये लंबी लाइन, वो बड़की गाड़ी… गाँव से गठरी लेकर आये मरीज…

किस चीज के डॉक्टर हो बेटा? मन तो करता है कहूँ – इंसानों का डॉक्टर हूँ आंटी… आपके काम का नहीं हूँ…

ऐसी एकांगी शिक्षा से निकले रोबोट पता नहीं कैसा जीवन जीने की महत्वाकांक्षा रखते हैं… उनके बादलों में पानी होता है या नहीं? या सीधा जैगुआर के नलके से उनके संगमरमर के बाथ टब में ही गिरता है?

उनके इंद्रधनुष में रंग अल्ट्रा एचडी का 4K टीवी भर के जाता है क्या? उनके पेड़ों की छाँव को ठंडक सैमसंग का स्प्लिट एसी पहुंचाता है? उनकी खुशियाँ अमेज़न से पैक होकर डिलीवर होती हैं क्या?

हमारे स्कूलों से पढ़कर जो बिना कुछ सीखे-जाने सही सलामत निकल गया, वह समझो बच गया… शिक्षित होने की त्रासदी हमारी पीढ़ी की सबसे बड़ी त्रासदी है…

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