जीवन रक्षक बन जाता है कभी कभी चिकित्सा विज्ञान का सामान्य ज्ञान

dr ram shrivastava important-medical-information making india

कहा जाता है “नीम हकीम तो खतरा ए जान”. यह कहावत यथार्थ में सही है. पर यह बात भी सत्य है कि कुछ मामलों में हर साधारण आदमी को कुछ मूल भूत स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अवश्य होनी चाहिये.

मुझे अच्छी तरह याद है इन्दौर में कलेक्टर रहे उच्च शासकीय अधिकारी के स्वसुर जी एक निजी अस्पताल में जीवन मृत्यु से संघर्ष कर रहे थे. मैं उस समय कलेक्टर महोदय की पत्नी और अन्य परिजनों के पास पिताश्री की तबियत देखने पहुंचा ही था कि श्रीमती कलेक्टर फूट फूट कर रोने लगीं.

क्योंकि ड्यूटी डाक्टर ने कह दिया था कि “हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं अब आप ईश्वर से प्रार्थना कीजिये कि हमारी मेहनत सफल होजाए”. दूसरे शब्दों में डाक्टर ने घुमा फिराकर साफ साफ बोल दिया था कि मरीज के बचने की उम्मीद नहीं है. स्वाभाविक था, पुत्री, पत्नी पुत्रों का बिलख विलख कर रोना. जहाँ तक मुझे याद है गंगाजल और तुलसी दल भी उनके मुंह में डाल दिया गया था.

तभी मैंने अपनी मोटर साईकिल की चाबी से पिताश्री के दोनों पैर के पंजों में चाबी को गढ़ाते हुए नीचे से ऊपर की ओर खींचा. मुझे मरीज के पैरों में संचेतना दिखी, और लगा कि दोनों पैरों में समान रूप से रिफ्लेक्सेज काम कर रहे हैं.

मैंने तुरन्त व्याकुल हो रही कलेक्टर महोदय की पत्नी को कहा “देखिये उनके दोनों पैरों में संचेतना पूरी है, उन्हें कुछ नहीं होगा बह इस संकट से बाहर निकल आवेंगे.” श्रीमती कलेक्टर ने जब मेरे मुंह से यह सुना तो खुश होकर बोला “भगवान करे आपकी बोली सही हो जाए”.

कलेक्टर महोदय भी मेरी ओर अवाक से देख रहे थे. शायद उनको यह यकीन करने में थोड़ी सी कठिनाई हो रही थी, कि जब डाक्टर अपने हाथ ऊंचे कर चुके हैं तो मैं एक नॉन मेडीकल आदमी कैसे कह रहा हूं कि पिताजी अच्छे कैसे हो जावेंगे.

इसे ईश्वर का चमत्कार कहिये या मेरी फालतू बहुतेरी चीजें पढ़ते समझने की (बुरी ) आदत कहिये कि मेरा अनुमान सही निकला. पिताश्री ठीक होकर घर आए और कई वर्ष जीवित रहे.

ऐसे ही एक बार मैं दोपहर में अपने पी एच डी के गाईड के घर पहुंचा. गाईड की पत्नी हृदय रोगी थीं. जिस कमरे में वह लेटी थी वह बुरी तरह से तड़फ रहीं थी. उस समय घर में अकेली एक वृद्ध महिला नानी जी मौजूद थी. वह भी दूसरे कमरे में , बीमार की छटपटाहट नहीं सुन पा रही थी.

मैं बहुत समय से अपनी पर्स में ‘नाईट्रोग्लीसरीन की सारबिटोल ‘ गोलियॉ और एस्प्रीन की गोली जरूर रखता हूं. मुझे गाईड की पत्नी की हालत देखते ही संकट समझ में आ गया और तुरन्त सारबिटोल की एक गोली मरीज की जबान के नीचे रख दी.

दवा ने आश्चर्यजनक रूप से काम किया और मेरे गाईड की पत्नी पर आया क्षणिक संकट टल गया. यह सब इस लिये सम्भव हुआ कि मैं सदैव ही संकट के समय काम में आने वाली कई जानकारियाँ लम्बे समय से पढ़ने का आदी हूं.

एक साल पहिले 2016 में चिकित्सा जगत की प्रख्यात पत्रिका LANCET में प्रकाशित एक लेख मैंने पढ़ा था. उस लेख का सारांश आप लोगों के सन्दर्भ के लिये संलग्न कर रहा हूं. जिस समय मेरे पड़ोसी श्री पौरूष बोरगाँवकर जी की श्रीमती जी ने फोन करके सर की तबियत की जानकारी दी, मैं तुरन्त ही ब्लड प्रेशर नापने का यंत्र लेकर उनके पास गया.

BP 180/100 निकला. उनको शिकायत थी कि पसीना आया घबराहट हुई और बांया हाथ भारी हो रहा था. मैंने उनके हाथों में अपनी ऊंगलिया देकर जोर से दबाने का कहा, हाथों में ताकत पूरी थी. अपने हाथ की ऊंगली को दिखाते हुए मैंने बगैर गर्दन मोड़े मेरी तर्जनी अंगुली बोरगाँकर जी की आंखों के सामने दाएं बाएँ घूम रही ऊंगली को देखने को कहा.

आँखों की पुतलियां साथ साथ घूम रही थी, पैर के पंजों में भी रिफ्लेक्सेज बराबर थे. पर जब मैने बोरगांवकर जी को उनकी आँखें बन्द करके हाथों को फैलाकर तर्जनी ऊंगली को उनकी नाक की टिप पर लगाने का कहा तो बोरगांवकर जी का दाहिना हाथ तो सही निशाने पर जा रहा था पर बांया हाथ जिसमें भारी पन और कमजोरी थी, निशाने से भटक रहा था.

मुझे तुरन्त शक हुआ यह मिनी स्ट्रोक का संकेत है. चूंकि आवाज में Distortion नहीं था न किसी तरह की फेशियल विकृति थी तथा रक्तचाप ज्यादा होते हुए भी हेमरेज करने की स्थिति में नहीं था.

मैंने फोन पर डाक्टर होरा को डिटेल्स बताकर एक डिस्प्रीन की गोली पानी में घोल कर तत्काल पिला दी. फिर चोइथ राम अस्पताल के ICU यूनिट के ड्युटी डाक्टर को पर्सनली पूरे डिटेल्स बताकर मेरे द्वारा पढ़े गए LANCET पत्रिका के लेख के आधार पर कहा कि मुझे यह T I A यानि मिनी स्ट्रोक लग रहा है. आप मेहरबानी करके MRI जल्दी से जल्दी करा लीजिये. और MRI के बाद मिनी स्ट्रोक की पुष्टि हो गई.

सारांश में कहूं तो तत्काल एक एस्प्रीन की गोली से बोरगांवकर जी पर आया बडा संकट टल गया. इसलिये मेरी आप सबसे प्रार्थना है कि चिकित्सा विज्ञान की आपातकालीन स्थिति में मरीज के पास के लोगों को कब क्या क्या करना चाहिये इसका ज्ञान अवश्य जुटा लें.

(Reference of LANCET:

After a mini-stroke, almost all of the benefit of aspirin in reducing the risk of another stroke was found to be in the first few weeks, and researchers also found that aspirin also likely reduced the severity of these early Strokes.

Using aspirin urgently could substantially reduce the risk of major strokes in patients who have minor ‘warning’ events, a group of European researchers has found. Writing in the Lancet, the team say that immediate self-treatment when patients experience stroke-like symptoms would considerably reduce the risk of major stroke over the next few days.

Aspirin is already given to people who have had a stroke or transient ischaemic attack (TIA — often called a ‘mini-stroke’) to prevent further strokes after they have been assessed in hospital and in the longer-term, reducing the subsequent stroke risk by about 15%. However, based on a previous study in Oxford (the EXPRESS Study) the team suspected that the benefits of more immediate treatment with aspirin could be much greater.

Lead researcher Professor Peter Rothwell, a stroke expert from the University of Oxford, explained: ‘The risk of a major stroke is very high immediately after a TIA or a minor stroke (about 1000 times higher than the background rate), but only for a few days. We showed previously in the ‘EXPRESS Study’ that urgent medical treatment with a ‘cocktail’ of different drugs could reduce the one-week risk of stroke from about 10% to about 2%, but we didn’t know which component of the ‘cocktail’ was most important.’

‘One of the treatments that we used was aspirin, but we know from other trials that the long-term benefit of aspirin in preventing stroke is relatively modest. We suspected that the early benefit might be much greater. If so, taking aspirin as soon as possible after ‘warning symptoms’ event could be very worthwhile.’

The team — from Oxford (UK), University Medical Center Utrecht (Netherlands), University Duisburg-Essen (Germany), and Lund University (Sweden) — therefore revisited the individual patient data from twelve trials (about 16,000 people) of aspirin for long-term secondary prevention — that is, to prevent a further stroke — and data on about 40,000 people from three trials of aspirin in treatment of acute stroke.

They found that almost all of the benefit of aspirin in reducing the risk of another stroke was in the first few weeks, and that aspirin also reduced the severity of these early strokes. Rather than the 15% overall reduction in longer-term risk reported previously in these trials, aspirin reduced the early risk of a fatal or disabling stroke by about 70-80% over the first few days and weeks.

Professor Rothwell said: ‘Our findings confirm the effectiveness of urgent treatment after TIA and minor stroke — and show that aspirin is the most important component. Immediate treatment with aspirin can substantially reduce the risk and severity of early recurrent stroke. This finding has implications for doctors, who should give aspirin immediately if a TIA or minor stroke is suspected, rather than waiting for specialist assessment and investigations.’

‘The findings also have implications for public education. Public information campaigns have worked in getting more people to seek help sooner after a major stroke, but have been less effective in people who have had minor strokes or TIAs. Many patients don’t seek medical attention at all and many delay for a few days. Half of recurrent strokes in people who have a TIA happen before they seek medical attention for the TIA. Encouraging people to take aspirin if they think they may have had a TIA or minor stroke — experiencing sudden-onset unfamiliar neurological symptoms — could help to address this situation, particularly if urgent medical help is unavailable.’

Dr Dale Webb, Director of Research and Information at the Stroke Association, said: ‘A TIA is a medical emergency and urgent neurological assessment must always be sought. We welcome this research which shows that taking aspirin after TIA can dramatically reduce the risk and severity of further stroke. The findings suggest that anyone who has stroke symptoms, which are improving while they are awaiting urgent medical attention can, if they are able, take one dose of 300 mg aspirin.

‘The research findings are also timely, as the stroke community is currently working to develop a new set of national clinical guidelines on stroke.’)


My next door neighbour Shri Pourush Borgaonkar ji today came back to home after 4 days stay in ICU of Choithram Hospital Indore . He was received at home by his family. The joy, pleasure and happiness seen over the faces of his wife ,son (senior Army Officer) and daughter is memorable. It is the moment of thanks giving event to the almighty GOD who saved him from a stroke . With the grace of GOD Mr Borgaonkar is now perfectly alright. We all pray for his good health.

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