क्या आप वास्तव में जानते हैं श्रीमद्भगवद्गीता एवं श्रीमद्भागवत पुराण के विषय में यह मूलभूत जानकारी!

अब थोड़ा कुछ वह जिसके लिए मेरा ब्राह्मण कुल में जन्म हुआ है.

श्रीमद्भगवद्गीता एवं श्रीमद्भागवत पुराण के विषय में कुछ सामान्य जानकारी साझा करने का पवित्र प्रयास करता हूं. मैंने हिंदू धर्म में कई लोगों को अक्सर भगवत गीता एवं श्रीमद्भागवत पुराण को एक ही समझते अथवा गलत समझते (आपस में ) हुए पाया है.

आइए इस विषय में जानकारी देने का यथायोग्य ब्राह्मणोचित प्रयास करता हूं. शास्त्रीय त्रुटियों को क्षमा करें.

श्रीमद्भगवद्गीता – (गीताजी, कृष्णार्जुन संवाद, गीतोपनिषद)

यह समस्त ग्रंथों का सार एवं भारतीय वांग्मय का ध्वजवाहक ग्रंथ है जिसकी शपथ लेकर न्यायालय में गवाही दी जाती है. यह महाभारत के भीष्म पर्व का एक भाग है जब महाभारत के  युद्ध से पहले दोनों सेनाएं कुरुक्षेत्र में आमने सामने थी तब अर्जुन को अपने सगे संबंधियों से युद्ध करने से पहले विषाद उत्पन्न हो गया था जिसका निराकरण भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के इस अद्भुत ग्रंथ के प्राकट्य के रूप में किया था. जिसमें कुल 18 अध्याय हैं एवं 746 (वर्तमान में 700 ) के आसपास श्लोक है.

महाभारत को लिपिबद्ध श्री वेद व्यास जी द्वारा किया गया था और यह सारी घटनाएं युद्ध के समय संजय द्वारा राजा धृतराष्ट्र को सुनाई जा रही थी लाइव कमेंट्री की तरह. अतः श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं संजय के द्वारा कहे गए श्लोक हैं जबकि राजा धृतराष्ट्र द्वारा केवल पहला श्लोक कहा गया –

“धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता यूयूत्सव “

इस परम गुह्य ज्ञान को कृष्णार्जुनसंवाद के रूप में भी जाना जाता है और संक्षेप में गीता जी भी कहा जाता है.

इस महान ग्रन्थ में जीवात्मा, प्रकृति एवं परमात्मा के विषय में दुर्लभ एवं प्रमाणिक ज्ञान उपलब्ध है. साथ ही मन, चेतना, वृतियों, प्रकृति के गुणों, ईश्वर के भौतिक प्राकट्य, विराट स्वरूप, भक्ति योग, निष्काम कर्मयोग, अभ्यासयोग आदि के विषय में अद्भुत वर्णन है.

श्रीमद्भागवत महापुराण (भागवत जी, सप्ताह जी )
अट्ठारह महापुराणों में से एक –

द्वापर के लगभग अंत में युधिष्ठिर के पुत्र राजा परीक्षित द्वारा जब संपूर्ण आर्यावर्त पर शासन किया जा रहा था तब किन्हीं कारणों से उन्हें प्राप्त सात दिवस में मृत्यु के श्राप के चलते वे अकाल मृत्यु को लेकर अत्यंत विचलित हो गए थे.

तब वेद व्यास जी के सुपुत्र शुकदेव जी महाराज द्वारा उन्हें भगवान श्री कृष्ण के बारे में एवं संपूर्ण जीवन के बारे में जो अद्भुत ज्ञान सात दिवस तक लगातार दिया गया, उसे श्रीमद्भागवत महापुराण कहा जाता है. इसमें करीब 12 स्कंद, 335 अद्ध्याय एवं 18000 श्लोक है. अक्सर जो सप्ताह जी के रूप में धर्म गुरुओं के द्वारा एवं कथा वाचकों के द्वारा वर्णन किया जाता है वह यही श्रीमद्भागवत पुराण है.

इस महापुराण में भगवान विष्णु के समस्त अवतारों की कथा, उसके साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण के संपूर्ण जीवन दर्शन एवं महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत एवं विशद वर्णन है. भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति का पावन संदेश भी यह महाग्रंथ देता है. भक्ति मार्ग के साधकों के लिए यह प्रथम वरीयता से पठनीय है.

अतः आप सभी सनातन धर्म भूषणों से निवेदन है कि कृपया अधिक से अधिक संख्या में अपने हिंदू भाइयों को अपने धर्म के संबंध में इस मूलभूत जानकारी को फैलाने का प्रयास करें.

स्वयं भी समझें, जाने, पढ़ें और अपने हिंदू भाइयों को भी इस विषय में बताएं.

सधन्यवाद.

।।जय श्री कृष्ण।

#पुरोहितजी_कहिन

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