ज्यादा सरल, शांत और सुव्यवस्थित न बनाए तो गलत है वो विवाह

मेरे एक वक्तव्य में मैंने कहा है कि शादी जैसी आज है, विवाह जैसा आज है, वह इतना इतना विकृत है कि उस विवाह से गुजर कर मनुष्य के चित्त में विकृति ही आती है, सुकृति नहीं. यह बात सच है कि विवाह एक अति सामान्य, अति जरूरी स्थिति है. और साधारणतः अगर विवाह वैज्ञानिक … Continue reading ज्यादा सरल, शांत और सुव्यवस्थित न बनाए तो गलत है वो विवाह