भारतीय महिला आइस हॉकी टीम को बधाई और खेल मंत्रालय को श्रद्धांजलि

कुछ समय पहले एक अंग्रेज़ी अखबार के आखरी पन्नो में, एक छोटी से खबर पढ़ी थी कि आइस हॉकी की भारतीय महिला टीम ने कोई मैच जीता है. मुझे यह जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि भारत मे आइस हॉकी भी खेली जाती है!

मुझे तो यही जानकारी थी कि आइस हॉकी तो यूरोप, अमेरिका, कनाडा में खेले जाने वाला खेल है, जहां बराबर बर्फ होती है और वहां तो बर्फ में खेले जाने वाले खेलों के लिए, शीत ओलंपिक्स भी हर 4 वर्ष में आयोजित होते है.

मुझे यही समझ में आया कि रग्बी और बेसबॉल की तरह, आइस हॉकी भी भारत मे खेला जाना तो कुछ अमीरों के चोंचले होंगे.

इसी उधेड़बुन में उस अखबार को बंद करने बाद मैं इस खेल और महिला आइस हॉकी टीम के बारे में भूल गया क्योंकि बाद में इससे सम्बंधित कोई भी खबर न मैंने मीडिया में पढ़ी और न ही देखी.

फिर कुछ समय बाद मुझे जब यह वीडियो देखने को मिला तो मेरे सारे पूर्वाग्रह कपूर की तरह उड़ गए और भारतीय महिलाओं की जीवटता और उनके विश्वास पर विश्वास करने वालों के प्रति अपार श्रद्धा उमड़ पड़ी है.

ये भारतीय महिलाएं, जिन्हें आइस हॉकी के खेल से अगाध प्रेम था, उनके पास इस खेल को खेलने के लिए कोई मूलभूत सुविधाएं नहीं थी.

यहां तक कि उनके पास आइस स्केटिंग रिंग की भी सहूलियत नही थी, जिस पर अंतराष्ट्रीय स्तर पर यह खेल खेला जाता है.

लेकिन इन महिलाओं को यह भरोसा था कि उनको मौका मिलेगा तो वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टक्कर दे सकती है.

इसके लिए उन्होंने अपनी एसोसिएशन से बात की परन्तु आइस हॉकी को लेकर भारत के जनमानस की अनभिज्ञता और एसोसिएशन की उदासीनता के चलते, उन्हें एसोसिएशन और सरकार से कोई विशेष मदद नही मिली.

लेकिन खेलना तो था ही, आगे भी बढ़ना था इसलिए इन महिलाओं ने, लद्दाख में ठंड में बर्फ से जमी झीलों को ही अपना आइस स्केटिंग रिंग बनाया और आइस हॉकी की जम कर प्रैक्टिस करने लगी.

यह एक बड़ा खतरा भी था क्योंकि झील में जमी बर्फ टूटती रहती है और जानलेवा दुर्घटनाओं का बराबर डर बना रहता है.

इन महिलाओं के इस खेल के प्रति उत्कटेच्छा को देख कर ‘लॉजिकल इंडियंस’ नामक एक संस्था सामने आई और उन्होंने इंटरनेट पर लोगो से इन आइस हॉकी खेलने वाली महिलाओं की सहायता करने की अपील की, जिसका परिणाम यह हुआ कि सिर्फ 9 दिन में 32 लाख रुपये इकट्ठा हो गये.

इन रुपयों से आइस हॉकी की टीम काकिर्गिस्तान गयी, जहां पर उन्होंने आधुनिक साज सामान के साथ, थाईलैंड में होने वाले एशिया चैलेंज कप 2017 के लिए प्रेक्टिस की.

इन भारतीय महिलाओं की मेहनत और लगन का यह परिणाम हुआ कि अपने पहले ही अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट में, भारतीय महिला आइस हॉकी टीम ने, मलेशिया और फिलीपीन्स को हराया और 7 राष्ट्रों की इस प्रतियोगिता में चौथा स्थान प्राप्त किया.

मैं, इस लेख के माध्यम से जहां भारत की आइस हॉकी टीम की सभी महिलाओं और उनकी सहायतार्थ आगे आने वाले Logical Indians को बहुत बहुत बधाई देता हूँ.

इसके साथ ही मैं भारत के खेल मंत्रालय व खेलों के एसोसिएशन की उदासीनता और दरिद्रता पर श्रद्धांजलि भी अर्पित करता हूँ.

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